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भारत की उत्तर में विकास यात्रा गिलगित-बाल्टिस्तान पहुंचकर पूरी होगी: राजनाथ सिंह

स्वतंत्रता के बाद भारत की पहली सैन्य जीत के मौके पर श्रीनगर में आयोजित ‘शौर्य दिवस’ समारोह को संबोधित कर रहे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पाकिस्तान अपने क़ब्ज़े वाले कश्मीर में लोगों के ख़िलाफ़ ‘अत्याचार’ कर रहा है और उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे.

27 अक्टूबर 2022 को श्रीनगर में आयोजित शौर्य दिवस समारोह के दौरान केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह. (फोटो साभार: पीआईबी)

श्रीनगर: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के लोगों पर उसके ‘अत्याचारों’ को लेकर पड़ोसी देश को कड़ा संदेश देते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा, ‘हमने अभी उत्तर की ओर चलना शुरू किया है, हमारी यात्रा तब पूरी होगी, जब हम भारतीय संसद द्वारा 22 फरवरी 1994 को सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव को (पीओके के) शेष हिस्सों- गिलगित और बाल्टिस्तान में पहुंचकर लागू करेंगे.’

सिंह ने यह भी कहा, ‘हमने जम्मू कश्मीर और लद्दाख में विकास की अपनी यात्रा अभी शुरू की है. जब हम गिलगित और बाल्टिस्तान तक पहुंच जाएंगे तो हमारा लक्ष्य पूरा हो जाएगा.’

स्वतंत्रता के बाद भारत की पहली सैन्य जीत के मौके पर श्रीनगर में आयोजित ‘शौर्य दिवस’ समारोह को संबोधित कर रहे सिंह ने यह भी कहा कि पाकिस्तान अपने कब्जे वाले कश्मीर में लोगों के खिलाफ ‘अत्याचार’ कर रहा है और उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे.

मालूम हो कि 22 फरवरी, 1994 को संसद के दोनों सदनों द्वारा सर्वसम्‍मति से अंगीकार किए गए संसदीय संकल्‍प के अनुसार सरकार की अटल और सैद्धांतिक स्‍थिति यह है कि केंद्र शासित क्षेत्र जम्‍मू कश्‍मीर और लद्दाख के समूचे भू-क्षेत्र भारत के अभिन्‍न अंग रहे हैं, हैं और रहेंगे.

इसके अनुसार, सरकार भारत के भू-क्षेत्रों में होने वाले सभी घटनाक्रमों पर नजर रखती है, जिनमें पाकिस्‍तान द्वारा अवैध रूप से और जबरन कब्‍जे वाले भू-क्षेत्र शामिल भी हैं. हमने निरंतर पाकिस्‍तान से कहा है कि वह अवैध एवं जबरन तरीके से कब्‍जे वाले भू-क्षेत्रों को खाली कर दे और मानवाधिकारों का हनन बंद करे तथा इन भू-क्षेत्रों में तुरंत बदलाव लाने के निरंतर प्रयासों को छोड़ दे.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पीओके के निवासियों को ‘निर्दोष भारतीय’ बताते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान वहां ‘अत्याचारों’ के लिए ‘पूरी तरह से जिम्मेदार’ है. सिंह ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जा किए गए कुछ क्षेत्र अभी भी प्रगति और अधिकारों से वंचित हैं.

उन्होंने कहा, ‘आने वाले समय में इसका खामियाजा पाकिस्तान को भुगतना पड़ेगा. हम उनके (पीओके के लोगों के) दर्द को महसूस करते हैं. जम्मू कश्मीर और लद्दाख के क्षेत्र विकास के पथ पर चल रहे हैं और नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं. यह सिर्फ शुरुआत है.’

उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल का राष्ट्रीय एकता का सपना तब साकार होगा, जब 1947 के शरणार्थियों को न्याय मिलेगा और उनके पूर्वजों की भूमि उन्हें वापस मिलेगी.

राजनाथ सिंह ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा शुरू किया गया पूर्ण एकीकरण का उद्देश्य 5 अगस्त, 2019 को अपने निष्कर्ष पर पहुंचा, ‘जब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया गया था.’

उन्होंने कहा, ‘भारत का अभिन्न अंग होने के बावजूद जम्मू और कश्मीर राज्य दशकों से विकास और शांति से वंचित था. जम्मू कश्मीर को तथाकथित ‘विशेष दर्जा’ दिया गया था, लेकिन विशेष होने की बात तो दूर, यह बुनियादी अधिकारों से भी वंचित था.’

उन्होंने कहा, ‘पहले कुछ भारत विरोधी तत्व धर्म के नाम पर शांति और सद्भाव बिगाड़ते थे, लेकिन अब सरकार और सशस्त्र बलों के लगातार प्रयासों से जम्मू कश्मीर में शांति है.’

सिंह ने कहा, ‘कश्मीरियत के नाम पर जम्मू कश्मीर ने आतंकवाद के ‘तांडव’ को देखा. इस वजह से असंख्य लोगों की जान चली गई है और असंख्य घर तबाह हो गए हैं. धर्म के नाम पर कितना खून बहा है, इसका कोई पैमाना नहीं है.’

उन्होंने कहा कि कई लोगों ने आतंकवाद को धर्म से जोड़ने की कोशिश की, लेकिन क्या आतंकवाद के शिकार एक धर्म तक सीमित थे?

देश के ‘तथाकथित बुद्धिजीवियों’ पर कटाक्ष करते हुए सिंह ने कहा कि जब सुरक्षा बलों या नागरिकों पर हमला किया जाता है, तो ‘मानव अधिकारों की चिंता कहां गायब हो जाती है?’

कश्मीरी पंडितों के घाटी से पलायन को ‘दुखद’ बताते हुए उन्होंने कहा कि जब किसी समाज के बुद्धिजीवी अन्याय के खिलाफ चुप रहते हैं, तो उस समाज के पतन में ज्यादा समय नहीं लगता.

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने ‘सशस्त्र बलों के नायकों और जम्मू कश्मीर के लोगों’ को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने देश की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी.

उन्होंने कहा कि यह उनकी वीरता और बलिदान के कारण है कि जम्मू कश्मीर बना रहा है और भारत का अभिन्न अंग बना रहेगा.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘मैं पाकिस्तान से हमारे इलाकों में रहने वाले लोगों को दिए गए अधिकारों के बारे में पूछना चाहता हूं, जहां उसने अवैध कब्जा कर रखा है. हम वहां बेगुनाह भारतीयों के खिलाफ अमानवीय कृत्यों के बारे में सुनते रहते हैं, जिसके लिए पाकिस्तान पूरी तरह जिम्मेदार है और यहां मैं पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के बारे में बात कर रहा हूं.’

पाकिस्तान पर मानवाधिकारों के नाम पर घड़ियाली आंसू बहाने का आरोप लगाते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, ‘पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के लोगों का दर्द केवल उन्हें ही नहीं हमें भी परेशान करता है.’

जम्मू कश्मीर को पाकिस्तानी सेना से बचाने के लिए 1947 में श्रीनगर के पुराने एयरफील्ड में पहली सिख रेजिमेंट के आगमन की 75वीं वर्षगांठ पर सेना ने श्रीनगर (बडगाम हवाई क्षेत्र) के पुराने हवाई क्षेत्र में ‘शौर्य दिवस’ की मेजबानी की.

यह स्वतंत्र भारत का पहला सैन्य अभियान था, जिसने 1947-48 की जंग की दिशा बदल दी थी. पाकिस्तानी बलों से मुकाबले के मिशन के लिए भेजा गया भारतीय सेना के जवानों का पहला जत्था 27 अक्टूबर, 1947 को एयरफील्ड में उतरा था.

समारोह स्थल पर ब्रिगेडियर राजिंदर सिंह, ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान, मेजर सोमनाथ शर्मा और मकबूल शेरवानी के बड़े कट-आउट लगाए गए थे. ब्रिगेडियर राजिंदर सिंह की 80 वर्षीय पुत्री उषा परमार और अन्य शहीदों के परिजनों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)