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नीरव मोदी की अपील ख़ारिज, ब्रिटिश अदालत ने कहा- आत्महत्या का जोख़िम प्रत्यर्पण से नहीं रोकता

भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की मानसिक सेहत के आधार पर प्रर्त्यपण के ख़िलाफ़ अपील ख़ारिज करते हुए लंदन के हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी कि उसके आत्महत्या करने का जोख़िम ऐसा नहीं है कि उसे धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का सामना करने के लिए भारत प्रत्यर्पित करना अनुचित और दमनकारी होगा.

(फोटो साभार: फेसबुक/नीरव मोदी)

लंदन/नई दिल्ली: ब्रिटेन की राजधानी लंदन के हाईकोर्ट ने हीरा कारोबारी नीरव मोदी की मानसिक सेहत के आधार पर प्रर्त्यपण के खिलाफ अपील बुधवार (9 नवंबर) को खारिज कर दी. लंदन के हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी कि नीरव के आत्महत्या करने का जोखिम ऐसा नहीं है कि उसे धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का सामना करने के लिए भारत प्रत्यर्पित करना अनुचित और दमनकारी होगा.

न्यायाधीश जेरेमी स्टुअर्ट-स्मिथ और न्यायाधीश रॉबर्ट जे. ने अपने फैसले में कहा कि जिला न्यायाधीश सैम गूजी की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत का पिछले साल प्रत्यर्पण के पक्ष में दिया गया आदेश सही था.

न्यायाधीश जेरेमी स्टुअर्ट-स्मिथ और न्यायाधीश रॉबर्ट जे. ने इस साल की शुरुआत में रॉयल कोर्ट्स ऑफ जस्टिस में नीरव की अपीलों पर सुनवाई की अध्यक्षता की थी.

हाईकोर्ट में अपील पर सुनवाई की अनुमति दो आधार पर दी गई थी – यूरोपीय मानवाधिकार समझौते (ईसीएचआर) के अनुच्छेद-3 के तहत और मानसिक सेहत से ही संबंधित प्रत्यर्पण अधिनियम 2003 की धारा 91 के तहत.

51 वर्षीय भगोड़े हीरा कारोबारी के पास ब्रिटेन और यूरोप की अदालतों में आगे अपील दाखिल करने का विकल्प है और भारत में मुकदमे के लिए उसे वापस लाने की प्रक्रिया बहुत तेज होने की संभावना नहीं लगती.

न्यायाधीशों ने व्यवस्था में कहा, ‘इन सभी पहलुओं को साथ में लाकर और संतुलन बनाते हुए धारा 91 के माध्यम से उठाए गए प्रश्न पर एक समग्र मूल्यांकन करने वाले फैसले पर पहुंचने के लिए हम इस बात से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं कि नीरव मोदी की मानसिक स्थिति और आत्महत्या करने का जोखिम इस तरह का है कि उसका प्रत्यर्पण करना अनुचित या दमनकारी होगा.’

उन्होंने कहा, ‘यह हो सकता है कि अपील का मुख्य लाभ और व्यापक आश्वासन प्राप्त करना रहा हो, जिसे हमने इस निर्णय के दौरान पहचाना है, जो नीरव मोदी के लाभ की स्थिति को स्पष्ट करते हैं और जिला न्यायाधीश के निर्णय का समर्थन करते हैं.’

फैसले में इस बात को भी स्वीकार किया गया है कि भारत सरकार अपने आश्वासनों को उचित गंभीरता से लेगी. इस तथ्य से भी यह बात पुष्ट होती है कि यह नामचीन मामला है, इसलिए नीरव को हर समय कड़ी सुरक्षा मिलनी चाहिए, जो मार्च 2019 में अपनी गिरफ्तारी के बाद से दक्षिण-पश्चिम लंदन में वैंड्सवर्थ जेल में बंद है.

न्यायाधीशों ने कहा, ‘भारत सरकार इस बात को निश्चित रूप से मानेगी कि उसके आश्वासनों को पूरा नहीं कर पाने पर उस परस्पर विश्वास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जो प्रत्यर्पण की व्यवस्था का आधार बना है, जिसमें भारत और ब्रिटेन पक्ष हैं.’

ब्रिटेन की तत्कालीन गृह मंत्री प्रीति पटेल ने पिछले साल अप्रैल में न्यायाधीश गूजी की व्यवस्था के आधार पर नीरव के प्रत्यर्पण का आदेश दिया था और तब से मामले में अपीलों की प्रक्रिया चल रही थी.

उसने कहा, ‘भारत सरकार ने जो आश्वासन दिए हैं, उनके आधार पर हम स्वीकार करते हैं कि नीरव मोदी की चिकित्सकीय देखभाल तथा प्रबंधन के लिए उचित चिकित्सा प्रावधान और उचित योजना होगी.’

फैसले में विशेषज्ञ गवाह के बयान के आधार पर कहा गया है कि नीरव मोदी ने अभी तक मानसिक रोग का कोई लक्षण प्रदर्शित नहीं किया है. इसमें कहा गया कि उसने खुदकुशी के विचार को जताया है, लेकिन कभी आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं की और न ही ऐसा करने की कोई योजना का खुलासा किया.

फैसले में यह भी माना गया है कि मुंबई की जिस आर्थर रोड जेल की बैरक 12 में प्रत्यर्पण के बाद हीरा कारोबारी को रखा जाना है, उसमें सुरक्षा उपाय किए गए हैं, जिससे सुनिश्चित होगा कि आत्महत्या की कोशिश के जोखिम को कम करने के लिए प्रभावी तरीके से सतत निगरानी हो.

अपील हार जाने के बाद नीरव सार्वजनिक महत्व के कानून के बिंदु पर उच्चतम न्यायालय जा सकता है. वह हाईकोर्ट के फैसले के 14 दिन के भीतर उसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय में आवेदन कर सकता है.

हालांकि उच्चतम न्यायालय में अपील तभी की जा सकती है जब हाईकोर्ट ने प्रमाणित किया हो कि मामला आम जनता के महत्व से जुड़े कानून के बिंदु वाला है.

अंतत: ब्रिटेन की अदालतों में सारे विकल्पों के समाप्त होने के बाद हीरा कारोबारी अब भी यूरोपीय मानवाधिकार समझौते के तथाकथित नियम 39 के तहत आदेश की मांग कर सकता है.

इस तरह पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) कर्ज घोटाला मामले में करीब दो अरब डॉलर की धोखाधड़ी करने तथा काले धन को सफेद बनाने के आरोपों का सामना करने के लिए और मुंबई की आर्थर रोड जेल में रखने के लिए उसे भारत वापस लाने की प्रक्रिया में अभी थोड़ा समय लग सकता है.

नीरव मोदी के वकीलों ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की किसी तरह की योजना पर अभी कोई टिप्पणी नहीं की है.

साल 2018 में पंजाब नेशनल बैंक से करीब 1400 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के मुख्य आरोपी नीरव मोदी को दिसंबर 2019 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर विशेष अदालत ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया था.

विजय माल्या के बाद नीरव मोदी दूसरा ऐसा कारोबारी था, जिसे नए भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के तहत भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया.

मालूम हो कि जनवरी 2018 में पीएनबी घोटाले के उजागर होने के बाद से सीबीआई और ईडी नीरव मोदी और उनके मामा मेहुल चोकसी की जांच कर रही है.

नीरव और उसका मामा मेहुल चोकसी पंजाब नेशनल बैंक से तकरीबन 14,000 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा करने के मामले में मुख्य आरोपी हैं, जो गारंटी पत्र जारी करने में कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है.

पीएनबी ने आरोप लगाया है कि नीरव मोदी और मेहुल चोकसी ने धोखाधड़ी की है, जिसकी वजह से पीएनबी को दो अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा है.

दोनों जनवरी 2018 में ही जांच शुरू होने से पहले ही देश छोड़कर फरार हो गए थे. नीरव मोदी को मार्च 2019 में लंदन में गिरफ्तार किया गया था, तबसे वह दक्षिण-पश्चिम लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में है.

पीएनबी में धोखाधड़ी से जुड़े मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच कर रही है और मनी लॉन्ड्रिंग के संबंध में ईडी छानबीन कर रही है.

ब्रिटेन की अदालत के फैसले का स्वागत: विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय ने ब्रिटेन की एक अदालत द्वारा बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी को भारत प्रत्यर्पण किये जाने के खिलाफ अपील को खारिज करने का बृहस्पतिवार को स्वागत करते हुए कहा कि वह मोदी के साथ-साथ अन्य आर्थिक अपराधियों को वापस लाने के अपने प्रयासों को जारी रखेगा.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा, ‘हम नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील खारिज करने के ब्रिटेन के हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘हम नीरव मोदी के साथ-साथ अन्य आर्थिक अपराधियों को वापस लाने के अपने प्रयासों को जारी रखेंगे ताकि उन्हें न्याय के कठघरे में लाया जा सके.’

प्रवक्ता ने कहा कि भारत आर्थिक भगोड़ों के प्रत्यर्पण के लिये पुरजोर तरीके से प्रयास कर रहा है, ताकि वे देश में कानूनी प्रक्रिया का सामना कर सकें.

नीरव मोदी मामले का घटनाक्रम

29 जनवरी, 2018: पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और अन्य पर दो अरब अमेरिकी डॉलर की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. मामला दर्ज होने से पहले उसी साल एक जनवरी को नीरव मोदी भारत से भाग चुका था.

05 फरवरी, 2018: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कथित घोटाले की जांच शुरू की.

16 फरवरी, 2018: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नीरव मोदी के घर और कार्यालयों से कुल 56.74 अरब रुपये के हीरे, सोना और आभूषण जब्त किए.

17 फरवरी, 2018: सीबीआई ने मामले में पहली गिरफ्तारी की. पीएनबी के दो कर्मचारियों और नीरव मोदी के समूह के एक कार्यकारी को हिरासत में लिया गया.

17 फरवरी, 2018: सरकार ने पीएनबी धोखाधड़ी के सिलसिले में नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के पासपोर्ट पर चार सप्ताह के लिए रोक लगाई.

21 फरवरी 2018: सीबीआई ने नीरव मोदी की कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी और दो अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया. अलीबाग में उसके फार्महाउस को भी सील कर दिया गया.

22 फरवरी 2018: ईडी ने नीरव मोदी और उसकी कंपनी से जुड़ी नौ महंगी कार जब्त की.

27 फरवरी 2018: एक मजिस्ट्रेट अदालत ने नीरव मोदी के खिलाफ जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया.

02 जून 2018: इंटरपोल ने मनी लॉन्ड्रिंग के लिए नीरव के खिलाफ ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ जारी किया.

25 जून 2018: नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के लिए ईडी ने मुंबई में एक विशेष अदालत का रुख किया.

03 अगस्त 2018: भारत सरकार ने ब्रिटेन के प्राधिकारों को नीरव के प्रत्यर्पण के लिए अनुरोध-पत्र भेजा.

20 अगस्त 2018: लंदन में नीरव के होने की सूचना के बाद सीबीआई अधिकारियों ने इंटरपोल मैनचेस्टर से उसे हिरासत में लेने का अनुरोध किया.

27 दिसंबर 2018: भारत को सूचित किया गया कि नीरव मोदी ब्रिटेन में रह रहा है.

09 मार्च 2019: ब्रिटेन के अखबार ‘टेलीग्राफ’ के संवाददाता ने लंदन की सड़कों पर नीरव मोदी को देखा और उसके देश में होने की पुष्टि हो गई.

09 मार्च 2019: ईडी ने कहा कि ब्रिटेन सरकार ने नीरव के लिए प्रत्यर्पण का अनुरोध पत्र आगे की प्रक्रिया के लिए ब्रिटेन की अदालत को भेजा है.

18 मार्च 2019: लंदन में वेस्टमिंस्टर अदालत ने नीरव के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया.

20 मार्च 2019: लंदन में नीरव मोदी को गिरफ्तार किया गया और उसे वेस्टमिंस्टर अदालत में पेश किया गया. उसे जमानत नहीं मिली.

20 मार्च 2019: नीरव को 29 मार्च तक वेंड्सवर्थ जेल भेजा गया.

29 मार्च 2019: लंदन में वेस्टमिंस्टर की अदालत ने नीरव मोदी की जमानत याचिका खारिज की.

08 मई 2019: नीरव मोदी की जमानत अर्जी तीसरी बार खारिज.

12 जून 2019: फरार होने की आशंका के कारण नीरव की जमानत अर्जी चौथी बार खारिज.

22 अगस्त 2019: नीरव मोदी की हिरासत 19 सितंबर तक बढ़ाई गई.

06 नवंबर 2019: ब्रिटेन की अदालत ने नीरव की जमानत अर्जी खारिज की.

11 मई 2020: पीएनबी मामले में पांच दिनों के लिए नीरव मोदी के प्रत्यर्पण मामले की सुनवाई ब्रिटेन में शुरू हुई.

13 मई 2020: भारत सरकार ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नीरव मोदी के खिलाफ और सबूत मुहैया कराए.

07 सितंबर 2020: ब्रिटेन की अदालत को मुंबई की आर्थर रोड जेल से संबंधित वीडियो मुहैया कराया गया.

01 दिसंबर 2020: नीरव मोदी की हिरासत बढ़ाई गई.

08 जनवरी 2021: ब्रिटेन की अदालत ने नीरव मोदी के प्रत्यर्पण मामले में फैसला सुनाने के लिए 25 फरवरी की तारीख तय की.

25 फरवरी 2021: ब्रिटेन की अदालत ने कहा कि नीरव मोदी को धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का सामना करने के लिए भारत प्रत्यर्पित किया जा सकता है.

01 मई, 2021: नीरव मोदी ने लंदन में हाईकोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील दायर की.

28 जून, 2022: एक ब्रिटिश अदालत ने प्रत्यर्पण के खिलाफ नीरव मोदी द्वारा दायर अपील पर सुनवाई शुरू की.

12 अक्टूबर, 2022: ब्रिटिश हाईकोर्ट ने प्रत्यर्पण के खिलाफ नीरव मोदी की अपील पर फैसला सुरक्षित रखा.

09 नवंबर, 2022: प्रत्यर्पण के खिलाफ नीरव मोदी की अपील खारिज.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)