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भारतीय कफ सीरप से गांबिया में बच्चों की मौत ने देश को शर्मसार किया: नारायण मूर्ति

बीते अक्टूबर महीने में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अफ्रीकी देश गांबिया में 66 बच्चों की मौत का संभावित कारण हरियाणा की मेडन फार्मास्युटिकल्स कंपनी की दवाओं को बताया गया था. इंफोसिस के संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति ने कहा कि इसने देश की दवा नियामक एजेंसी की विश्वसनीयता को चोट पहुंचाई है.

इंफोसिस साइंस फाउंडेशन के कार्यक्रम में एनआर नारायण मूर्ति. (फोटो: पीटीआई)

बेंगलुरू: इंफोसिस के संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति ने मंगलवार को कहा कि अफ्रीका महाद्वीप के गांबिया में भारत निर्मित कफ सीरप के कारण 66 बच्चों की मौत ने देश के लिए अकल्पनीय शर्म की बात है और इसने देश की दवा नियामक एजेंसी की विश्वसनीयता को भी चोट पहुंचाई है.

नारायण मूर्ति ने इंफोसिस साइंस फाउंडेशन की ओर से प्रदान किए जाने वाले पुरस्कार के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में यह बात कही. इसके तहत एक लाख अमेरिकी डॉलर का पुरस्कार दिया जाता है. इस बार यह पुरस्कार छह लोगों को प्रदान किया गया.

नारायण मूर्ति ने कोविड-19 टीकों की अरबों खुराकों का निर्माण और आपूर्ति करने वाली कंपनियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह प्रत्येक मानक पर खरी उतरने वाली एक उपलब्धि है.

हालांकि, उन्होंने जोड़ा कि कोविड-19 रोधी टीका बनाने और लोगों को यह टीका लगाने के बावजूद विज्ञान में अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

इंफोसिस के संस्थापक ने प्रोफेसर गगनदीप कांग और कई अन्य लोगों के लंदन में रॉयल सोसाइटी के फेलो बनने और मिलेनियम पुरस्कार जीतने वाले प्रोफेसर अशोक सेन की भी सराहना की.

उन्होंने कहा, ‘ये सभी उत्साहजनक और सुखद घटनाएं हैं, जो दर्शाती हैं कि भारत पूरी तरह से विकास के पथ पर है, लेकिन हमारे सामने अभी भी बड़ी चुनौतियां हैं.’

द हिंदू के मुताबिक, नारायण मूर्ति ने कहा, ‘वर्ष 2020 में घोषित दुनिया के विश्वविद्यालयों की वैश्विक रैंकिंग के शीर्ष 250 संस्थानों में उच्च शिक्षा का एक भी भारतीय संस्थान नहीं है. यहां तक कि हमारे द्वारा उत्पादित टीके भी, या तो उन्नत देशों की तकनीक पर आधारित हैं, या विकसित दुनिया के शोध पर आधारित हैं. नतीजतन, हमने अभी भी डेंगू और चिकनगुनिया के लिए कोई टीका नहीं बनाया है, जो बीमारियां पिछले 70 वर्षों से हमें तबाह कर रही हैं. मैं यह बात इसलिए कह सकता हूं क्योंकि मैं डेंगू के लिए वैक्सीन बनाने के एक प्रोजेक्ट का हिस्सा हूं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘गांबिया में भारत निर्मित खांसी के सीरप के कारण 66 बच्चों की मौत की घटना हमारे देश के लिए बेहद शर्मसार करने वाली है और इसने हमारी दवा नियामक एजेंसी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं.’

ज्ञात हो कि गांबिया में 66 बच्चों की मौत के बाद 5 अक्टूबर को डब्ल्यूएचओ ने घोषणा की थी कि भारत की मेडन फार्मास्युटिकल द्वारा बनाए गए कफ सीरप में डायथिलिन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल थे, जो मनुष्यों के लिए विषाक्त होते हैं और इनसे बच्चों में गुर्दों संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, जिनका नतीजा मौत भी हो सकता है. डब्ल्यूएचओ ने कंपनी की चारों दवाओं के खिलाफ अलर्ट जारी किया था.

नारायण मूर्ति के मुताबिक, विशेषज्ञों का मानना है कि तत्काल दबाव वाली समस्याओं को हल करने के लिए अनुसंधान का उपयोग करने में भारत की अक्षमता, कम उम्र में जिज्ञासा पैदा करने की कमी, शुद्ध और अनुप्रयुक्त अनुसंधान के बीच संबंध, उच्च शिक्षण संस्थानों में अपर्याप्त अत्याधुनिक अनुसंधान बुनियादी ढांचे की कमी, अपर्याप्त अनुदान और अनुसंधान के लिए प्रोत्साहन देने में अत्यधिक देरी के अलावा वैश्विक अनुसंधान संस्थानों के साथ ज्ञान साझा करने के लिए अपर्याप्त मंच अनुसंधान के क्षेत्र में देश के पिछड़ने के कारण हैं.

इंफोसिस के संस्थापक ने कहा कि आविष्कार या नवाचार के क्षेत्र में सफलता के लिए धनराशि प्राथमिक संसाधन नहीं है.

उन्होंने आगे कहा, ‘अनुसंधान में सफलता के लिए दो अन्य महत्वपूर्ण घटक हैं. पहला यह है कि स्कूलों और कॉलेजों में हमारे शिक्षण को सवाल पूछने और कक्षा में सीखी गई बातों को उनके आसपास की वास्तविक दुनिया की समस्याओं से जोड़ने की दिशा में काम करना चाहिए. कोचिंग क्लासेस के अत्याचार के चलते हमारे आईआईटी भी इस सिंड्रोम के शिकार हो गए हैं. दूसरा कदम शोधकर्ताओं के लिए हमारी तात्कालिक समस्याओं को हल करने पर ध्यान केंद्रित करना है और इस तरह की मानसिकता, मेरी राय में, अनिवार्य रूप से बड़ी चुनौतियों को हल करने की ओर ले जाएगी.’

उन्होंने देश के स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षा का स्तर सुधारने की भी वकालत की.

इंफोसिस पुरस्कार- 2022 के विजेता इंजीनियरिंग और कंप्यूटर विज्ञान में सुमन चक्रवर्ती; मानविकीमें सुधीर कृष्णास्वामी; जीवन विज्ञान में विदिता वैद्य; गणितीय विज्ञान में महेश काकड़े; भौतिक विज्ञान में निसीम कानेकर और सामाजिक विज्ञान में रोहिणी पांडे हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)