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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने संघ से कहा- सिखों के मामले में अनावश्यक दख़ल बंद करें

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के महासचिव गुरुचरण सिंह ग्रेवाल ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि भाजपा नीत केंद्र सरकार, हरियाणा सरकार और संवैधानिक पदों पर बैठे भाजपा नेता सीधे तौर पर एसजीपीसी चुनाव में दख़ल दे रहे हैं.

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के महासचिव गुरुचरण सिंह ग्रेवाल. (फोटो साभार: फेसबुक/@SGPC)

अमृतसर: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने मंगलवार को मांग की है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सिखों के मामले में ‘अनावश्यक हस्तक्षेप’ करना बंद करे.

शीर्ष गुरुद्वारा निकाय के स्थापना दिवस पर इसके महासचिव गुरुचरण सिंह ग्रेवाल ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को लिखे पत्र में कहा कि बड़े बलिदानों के बाद एसजीपीसी अस्तित्व में आया और इसकी स्थापना के लिए शुरू किए गए संघर्ष ने देश की आजादी का मार्ग प्रशस्त किया.

ग्रेवाल ने आरोप लगाया, ‘लेकिन यह दुखद है कि भाजपा नीत केंद्र सरकार और भाजपा नेता एसजीपीसी के मामले को जटिल बनाने के लिए प्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप कर रहे हैं. इस हस्तक्षेप का एक उदाहरण नौ नवंबर को एसजीपीसी के पदाधिकारियों के लिए सालाना चुनाव के दौरान सामने आया.’

ग्रेवाल ने आरोप लगाया कि भाजपा नीत केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार और संवैधानिक पदों पर बैठे भाजपा नेता सीधे तौर पर एसजीपीसी चुनाव में दखल दे रहे हैं.

एसजीपीसी और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने इसके पहले आरोप लगाया था कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा गुरुद्वारा निकाय को ‘तोड़ने’ का प्रयास करके सिख समुदाय के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं

शिअद ने लालपुरा पर आरोप लगाया था कि उन्होंने गत नौ नवंबर को हुए एसजीपीसी चुनाव के लिए अब निष्कासित नेता बीबी जागीर कौर का समर्थन मांगा था.

ग्रेवाल ने कहा कि एसजीपीसी ने 102 साल का अपना शानदार सफर पूरा किया है और इस दौरान इसने अनुकरणीय कार्य किए.

उन्होंने लिखा कि आज एसजीपीसी के ऐतिहासक स्थापना दिवस पर हम आरएसएस और भाजपा को सुझाव देते हैं कि वे सिख मामलों में हस्तक्षेप करना बंद करें.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, उन्होंने कहा कि एसजीपीसी जिम्मेदारी से सिखों के मसलों को उठाता रहा है.

ग्रेवाल ने भगवत को लिखे पत्र में कहा है, ‘अगर यह (हस्तक्षेप) आपकी जानकारी के बगैर हो रहा है तो आपको फ़ौरन इसमें दखल देना चाहिए और अगर आपको ऐसा होने की जानकारी है तब यह सही समय है कि आपका संगठन (आरएसएस) अपने वैचारिक दृष्टिकोण पर विचार करे  क्योंकि यह इस बहु-सांस्कृतिक और बहु-धार्मिक समाज में आपसी धार्मिक संबंधों में दरार पैदा कर रहा, जिसके लिए मुझे डर है कि यह भविष्य में और गहरी होगी.’

उन्होंने कहा, ‘इस तरह के विचारों से सिखों के मन में अस्थिरता आएगी जो देश के लिए अच्छी नहीं है.’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि  पर आरएसएस और भाजपा है, उसी तरह ‘सिख-विरोधी’ कांग्रेस दखल दिया करती थी.

ग्रेवाल ने लिखा, ‘आज एसजीपीसी के ऐतिहासिक स्थापना दिवस पर हमारा सुझाव है कि आरएसएस और भाजपा को सिख मुद्दों में दखल देना बंद कर देना चाहिए. हमें उम्मीद है कि आप इस पर गहराई से विचार करेंगे और सिख संगठनों की गतिविधियों और भविष्य में सिखों के मुद्दों को उलझाने वाली गतिविधियों से दूर रहेंगे.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)