चीन ने अमेरिकी अधिकारियों को भारत के साथ उसके संबंधों में दख़ल न देने की चेतावनी दी थी: पेंटागन

अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन ने संसद में पेश एक रिपोर्ट में कहा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत के साथ टकराव के बीच चीनी अधिकारियों ने संकट की गंभीरता को कमतर दिखाने की कोशिश की है और इस बात पर ज़ोर दिया है कि चीन की मंशा सीमा पर स्थिरता कायम करना और भारत के साथ उसके द्विपक्षीय संबंधों के अन्य क्षेत्रों को गतिरोध से होने वाले नुकसान से बचाना है.

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(फोटो: रॉयटर्स)

अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन ने संसद में पेश एक रिपोर्ट में कहा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत के साथ टकराव के बीच चीनी अधिकारियों ने संकट की गंभीरता को कमतर दिखाने की कोशिश की है और इस बात पर ज़ोर दिया है कि चीन की मंशा सीमा पर स्थिरता कायम करना और भारत के साथ उसके द्विपक्षीय संबंधों के अन्य क्षेत्रों को गतिरोध से होने वाले नुकसान से बचाना है.

(फोटो: रॉयटर्स)

वॉशिंगटन: चीन ने अमेरिकी अधिकारियों को चेतावनी दी है कि वे भारत के साथ उसके संबंधों में दखल न दें. अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन ने कांग्रेस (संसद) में पेश एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है.

इस रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि मई 2020 से पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास कई इलाकों में भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के बीच गतिरोध पैदा हुआ है.

पेंटागन ने मंगलवार (29 नवंबर) को पेश रिपोर्ट में कहा है कि एलएसी पर भारत के साथ टकराव के बीच चीनी अधिकारियों ने संकट की गंभीरता को कमतर दिखाने की कोशिश की है और इस बात पर जोर दिया है कि चीन की मंशा सीमा पर स्थिरता कायम करना और भारत के साथ उसके द्विपक्षीय संबंधों के अन्य क्षेत्रों को गतिरोध से होने वाले नुकसान से बचाना है.

चीन की सैन्य निर्माण क्षमता पर कांग्रेस को दी गई अपनी हालिया रिपोर्ट में पेंटागन ने कहा, ‘चीनी गणराज्य (पीआरसी) तनाव कम करने की कोशिशों में जुटा है, ताकि भारत अमेरिका के और करीब नहीं जाए. चीन के अधिकारियों ने अमेरिकी अधिकारियों को चेतावनी दी है कि वे भारत के साथ उसके संबंधों में हस्तक्षेप न करें.’

पेंटागन ने कहा कि वर्ष 2021 के दौरान चीनी सेना ने भारत-चीन सीमा के एक खंड पर सैन्य बलों की तैनाती बरकरार रखी और एलएसी के पास बुनियादी ढांचे का निर्माण भी जारी रखा.

रिपोर्ट में कहा गया है कि गतिरोध के समाधान के लिए भारत और चीन के बीच वार्ता में न्यूनतम प्रगति हुई है, क्योंकि दोनों पक्ष सीमा पर अपने-अपने स्थान से हटने का विरोध करते हैं.

पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक झड़प के बाद पांच मई 2020 को पूर्वी लद्दाख सीमा पर गतिरोध शुरू हुआ था.

पेंटागन की रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य बलों की वापसी की मांग कर रहे हैं और गतिरोध पूर्व की स्थिति में लौटना चाहते हैं, लेकिन न तो चीन और न ही भारत उन शर्तों पर सहमत हैं, जिसके कारण टकराव जैसी स्थिति बनी हुई है.

रिपोर्ट के अनुसार, 2020 की झड़प के बाद से पीएलए ने लगातार सैन्य बलों की उपस्थिति बनाए रखी है और एलएसी के पास बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 की गलवान घाटी की घटना पिछले 46 वर्षों में दोनों देशों के बीच संघर्ष की सबसे घातक घटना थी.

चीन ने इससे पहले भारत के साथ उसके सीमा विवाद पर बयान देने के लिए अमेरिका की आलोचना की थी.

भारत लगातार यह कहता रहा है कि एलएसी पर अमन-चैन द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है. सीमा पर गतिरोध को हल करने के लिए भारतीय और चीनी सेनाओं ने कोर कमांडर स्तर की 16 दौर की बैठकें की हैं.

चीन से लगती सरहद पर 30 महीने से अधिक समय से जारी गतिरोध के बीच बीते नवंबर महीने में भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने कहा था कि पूर्वी लद्दाख में स्थिति स्थिर, लेकिन अप्रत्याशित है. उन्होंने कहा था कि हम 17वें दौर की वार्ता की तारीख पर विचार कर रहे हैं.

मालूम हो कि भारत और चीन के बीच मई 2020 से ही पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध बना हुआ है. पैंगोंग झील उन प्रमुख बिंदुओं में से एक है, जहां दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई थी.

लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून 2020 को हुई झड़प के दौरान भारत के 20 सैन्यकर्मी शहीद हो गए थे. बाद में चीन ने भी स्वीकार किया था कि इस घटना में उसके पांच सैन्य अधिकारियों और जवानों की मौत हुई थी. करीब 45 सालों में भारत-चीन सीमा पर हुई यह सबसे हिंसक झड़प थी.

चीन का एलएसी के पास सेना की चौकी बनाना एक और चिंताजनक संकेत: अमेरिकी सांसद

इस बीच अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने बुधवार को कहा कि भारत के साथ लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (एनएसी) के पास चीन द्वारा सैन्य चौकी का निर्माण किया जाना अपने पड़ोसियों के प्रति चीनी आक्रामकता का चिंताजनक संकेत है। उन्होंने इस संबंध में आई एक खबर के बाद यह टिप्पणी की.

समाचार पत्र ‘पॉलिटिको’ ने बुधवार को दावा किया कि चीन ने भारत के साथ अपनी विवादित सीमा के पास एक सैन्य चौकी बनाई है.

कृष्णमूर्ति ने कहा, ‘भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की एक नई चौकी संबंधी खबर बीजिंग की बढ़ती क्षेत्रीय आक्रामकता का एक और चिंताजनक संकेत है, जो अमेरिका द्वारा भारत और अन्य सुरक्षा साझेदारों के साथ संयुक्त प्रयासों को मजबूत करने की आवश्यकता को दोहराता है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)