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2022 की पहली तीन तिमाहियों में भारत में कुल 73 प्रतिशत लैपटॉप चीन से आयात हुए: रिपोर्ट

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के हवाले से एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले पांच सालों में भारत में आयात हुए हर 4 में से 3 लैपटॉप चीन से आए हैं.

(फोटो: अनस्प्लैश)

नई दिल्ली: साल 2022 की पहली तीन तिमाहियों में भारत के कुल लैपटॉप आयात का लगभग 73 प्रतिशत चीन से आया है. द प्रिंट ने वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों का हवाला देते हुए इस संबंध में रिपोर्ट की है.

भारत का लैपटॉप आयात जनवरी और सितंबर 2022 के बीच बढ़कर 5.24 अरब डॉलर हो गया, जिसमें से लगभग 3.82 अरब डॉलर मूल्य के लैपटॉप अकेले चीन से आए.

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2021 की समान अवधि में चीन से 3.5 अरब डॉलर मूल्य के लैपटॉप का आयात हुआ था, 2022 में इसमें 9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच सालों में भारत में आयात हुए हर 4 में से 3 लैपटॉप चीन से आए हैं. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों से यह आंकड़ा कम हो रहा है.

2017 में, भारत के कुल लैपटॉप आयात में चीन का हिस्सा 94.2 फीसदी था. पिछले तीन वर्षों में यह आंकड़ा घटकर लगभग 73 फीसदी रह गया है.

द प्रिंट ने बताया कि भारत अब हांगकांग (0.55 अरब डॉलर), ताइवान (0.12 अरब डॉलर), सिंगापुर (0.62 अरब डॉलर) और वियतनाम से अधिक लैपटॉप आयात कर रहा है.

इसमें कहा गया है कि सामूहिक तौर पर देखें तो भारत ने इन देशों से 2022 के पहले 9 महीनों में 1.29 अरब डॉलर या भारत के कुल लैपटॉप आयात का 25 फीसदी आयात किया. 2017 में इन देशों से भारत में 5 फीसदी लैपटॉप भी आयात नहीं हुए थे.

विशेष रूप से चीन से इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के आयात में कटौती करने के लिए नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार ने पिछले साल 7,350 करोड़ रुपये की उत्पादन-लिंक्ड योजना (पीएलआई) योजना शुरू की थी, ताकि लैपटॉप, टैबलेट, ऑल-इन-वन पर्सनल कंप्यूटर और सर्वर जैसे आईटी हार्डवेयर के स्थानीय विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा दिया जा सके.

हालांकि, बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले साल योजना के तहत उत्पादन कमजोर रहा है.

भारत में अंतरराष्ट्रीय डेटा केंद्र (आईडीसी) के वरिष्ठ बाजार विश्लेषक भरत शेनॉय ने द प्रिंट को बताया कि भारत में लैपटॉप का स्थानीय विनिर्माण कम बना हुआ है और बड़े पैमाने पर लैपटॉप का उत्पादन करने के लिए देश को विशेष रूप से इसके लिए कुशल श्रम की आवश्यकता है.

उन्होंने बताया कि हमारी क्षमता कम कीमत वाले लैपटॉप बनाने की तो है लेकिन प्रीमियम लैपटॉप सेगमेंट के लिए हमें आयात पर निर्भर रहना पड़ता है.

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