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‘द कश्मीर फाइल्स’ विवाद: आईएफएफआई के तीन ज्यूरी सदस्यों ने नदाव लपिद का बचाव किया

‘द कश्मीर फाइल्स’ को भद्दी और दुष्प्रचार करने वाली फिल्म बताने के कारण इस्राइली फिल्मकार और भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) जूरी प्रमुख नदाव लपिद भारत में एक वर्ग के निशाने पर आ गए थे.

द कश्मीर फाइल्स फिल्म का पोस्टर और इजरायली फिल्मकार नदव लापिड. (फोटो साभार: ट्विटर)

नई दिल्ली: हाल ही में समाप्त हुए भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) के जूरी सदस्यों में शामिल एकमात्र भारतीय सुदीप्तो सेन ने शनिवार को कहा कि इस्राइली फिल्म निर्माता नदाव लपिद द्वारा फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ के बारे में की गई टिप्पणी उनकी व्यक्तिगत राय थी.

सेन ने कहा, ‘अब अगर कोई सार्वजनिक रूप से किसी एक फिल्म को चुनता है और कुछ ऐसा कहता है, जिसकी उम्मीद नहीं है, तो यह उसकी निजी भावना है. इसका जूरी सदस्यों से कोई लेना-देना नहीं है.’

लपिद इफ्फी की अंतररराष्ट्रीय जूरी के प्रमुख थे. उन्होंने नौ दिन चलने वाले इस फिल्म समारोह के अंतिम दिन ‘द कश्मीर फाइल्स’ को ‘एक भद्दी और दुष्प्रचार करने वाली फिल्म’ करार दिया था.

अब अपनी चुप्पी तोड़ते हुए इफ्फी जूरी के तीन विदेशी सदस्यों ने कहा है कि लपिद ने जो कहा है, वे उनके साथ खड़े हैं. इनमें अमेरिकी निर्माता जिन्को गोटोह, फ्रांसीसी फिल्म संपादक पास्कल चावेंस और फ्रांसीसी लघु फिल्म निर्माता जेवियर एंगुलो बारटुरेन शामिल हैं.

बीते 3 दिसंबर को जिन्को गोटोह ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म को लेकर लपिद के रुख के लिए जूरी के सभी विदेशी सदस्यों के समर्थन को व्यक्त करते हुए एक बयान ट्वीट किया.

हालांकि उनके हैंडल को ट्विटर द्वारा सत्यापित नहीं किया गया है, लपिद ने द वायर से पुष्टि की कि ट्विटर अकाउंट द्वारा दिया गया बयान प्रामाणिक था और जूरी सदस्यों ने उन्हें एक प्रति ईमेल की थी.

उनके बयान के अनुसार,

फिल्म महोत्सव के समापन समारोह में जूरी के अध्यक्ष नदाव लपिद ने जूरी सदस्यों की ओर से एक बयान दिया, जिसमें कहा गया था, ‘हम सभी 15वीं फिल्म द कश्मीर फाइल्स से परेशान और हैरान थे, जो हमें एक भद्दी और दुष्प्रचार करने वाली फिल्म की तरह महसूस हुई और इस तरह के एक प्रतिष्ठित फिल्म समारोह के कलात्मक प्रतिस्पर्धी वर्ग के लिए अनुपयुक्त लगी.’

हम उनके बयान पर कायम हैं.

और स्पष्ट करते हैं कि हम फिल्म की सामग्री पर राजनीतिक रुख नहीं ले रहे थे. हम एक कलात्मक बयान दे रहे थे और यह देखकर हमें बहुत दुख होता है कि महोत्सव के मंच को राजनीति के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और बाद में नदाव पर व्यक्तिगत हमले किए गए. जूरी की यह मंशा कभी नहीं थी.

इस बयान पर जिन्को गोटोह, पास्कल चावेंस और जेवियर एंगुलो बारटुरेन ने हस्ताक्षर किए हैं. तीनों प्रतिष्ठित फिल्मकार हैं.

मालूम हो कि गोवा में 53वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव (इफ्फी) के समापन समारोह में सोमवार (28 नवंबर) को लपिद ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म को ‘भद्दी’ और ‘दुष्प्रचार वाली’ बताया था. फिल्म का प्रदर्शन 22 नवंबर को इफ्फी के ‘इंडियन पैनोरमा’ वर्ग में किया गया था.

जूरी प्रमुख नदाव लपिद अपने इस बयान के कारण भारत में एक वर्ग के निशाने पर आ गए थे.

इसके बाद इस फिल्म के लेखक-निर्देशक विवेक अग्निहोत्री, इसमें अभिनय कर चुके अनुपम खेर, पल्लवी जोशी, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत समेत कुछ भाजपा नेताओं के साथ ही भारत में इजराइली राजदूत नाओर गिलोन तथा मध्य-पश्चिम भारत में उसके महा वाणिज्यदूत कोब्बी सोशानी ने लपिद की तीखी आलोचना की थी.

अपने सत्ता विरोधी बयानों के लिए खबरों में रहने वाले लपिद ने इसके बाद आरोप लगाया था कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ को महोत्सव की आधिकारिक स्पर्धा में ‘राजनीतिक दबाव’ में जबरदस्ती शामिल कराया गया.

उन्होंने कहा था, ‘हमें पता चला है कि राजनीतिक दबाव के कारण फिल्म को महोत्सव की आधिकारिक प्रतियोगिता में शामिल किया, जो भारत में सबसे बड़ा फिल्म आयोजन है. इसलिए मुझे लगता है कि एक विदेशी के रूप में जो वहां जाता है, आपका दायित्व है कि आप उन चीजों को कहें, जो वहां रहने वाले लोगों के लिए कहना कठिन हो सकता है.’

इस बीच लपिद ने सीएनएन-न्यूज18 समाचार चैनल को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने अनजाने में किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए माफी मांगी थी और कहा था कि वह किसी का या उनके रिश्तेदारों का अपमान नहीं करना चाहते थे, जो पीड़ित हैं.

आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया में लपिद ने कहा था कि खराब फिल्म बनाना अपराध नहीं है, लेकिन विवेक अग्निहोत्री निर्देशित यह फिल्म ‘अधूरी, जान-बूझकर तथ्यों से छेड़छाड़ वाली और हिंसक’ है.

बता दें कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ 11 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. फिल्म साल 1990 में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा कश्मीरी पंडितों की हत्या के बाद समुदाय के कश्मीर से पलायन पर आधारित है. इसमें अभिनेता अनुपम खेर, दर्शन कुमार, मिथुन चक्रवर्ती और पल्लवी जोशी समेत अन्य प्रमुख किरदारों में हैं.

रिलीज के बाद राजनीतिक दलों में इसकी विषयवस्तु को लेकर बहस छिड़ गई थी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित भारतीय जनता पार्टी भाजपा के कई नेताओं ने जहां फिल्म, इसके कलाकारों और इसके फिल्म निर्माताओं की प्रशंसा की थी. वहीं विपक्ष ने इसे एकतरफा और बेहद हिंसक बताया था.

भाजपा के विरोधियों पर तीखा हमला करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 मार्च 2022 को कहा था कि ऐसी फिल्में बनती रहनी चाहिए, क्योंकि ये सच को सामने लेकर आती हैं. एक लंबे समय तक जिस सच को छिपाने की कोशिश की गई, उसे सामने लाया जा रहा है, जो लोग सच छिपाने की कोशिश करते थे, वो आज विरोध कर रहे हैं.

उन्होंने कहा था, ‘इन दिनों द कश्मीर फाइल्स की खूब चर्चा हो रही है. जो लोग हमेशा अभिव्यक्ति की आजादी के झंडे लेकर घूमते हैं, वह पूरी जमात बौखला गई है.’

इसके अलावा फिल्म को भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया गया था और सभी भाजपा शासित राज्यों में फिल्म को कर-मुक्त घोषित कर दिया गया था. इतना ही नहीं कई राज्यों में सरकारी कर्मचारियों को फिल्म देखने के लिए विशेष अवकाश दिया गया था,

फिल्म संयोग से इस साल सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्मों में से एक बन गई.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)