चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए समिति गठित करने संबंधी विधेयक राज्यसभा में पेश

माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में पारदर्शिता, तटस्थता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए भारत के संविधान में संशोधन को लेकर एक निजी विधेयक पेश किया. संविधान (संशोधन) विधेयक-2022 में भारतीय चुनाव आयोग का एक स्थायी स्वतंत्र सचिवालय स्थापित करने की भी बात कही गई है.

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(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में पारदर्शिता, तटस्थता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए भारत के संविधान में संशोधन को लेकर एक निजी विधेयक पेश किया. संविधान (संशोधन) विधेयक-2022 में भारतीय चुनाव आयोग का एक स्थायी स्वतंत्र सचिवालय स्थापित करने की भी बात कही गई है.

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: राज्यसभा में एक निजी विधेयक पेश कर मांग की गई है कि चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जाए.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, केरल से माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने शुक्रवार (9 दिसंबर) को मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में पारदर्शिता, तटस्थता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए भारत के संविधान में संशोधन हेतु संविधान (संशोधन) विधेयक-2022 पेश किया. विधेयक में भारतीय चुनाव आयोग का एक स्थायी स्वतंत्र सचिवालय स्थापित करने की भी बात कही गई.

शनिवार को ब्रिटास ने द संडे एक्सप्रेस को बताया कि चुनाव आयुक्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से लगभग दो महीने पहले उन्होंने राज्यसभा सचिवालय को विधेयक सौंपा था.

गौरतलब है कि 22 नवंबर को सुनवाई के दौरान जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा था कि मुख्य न्यायाधीश वाली एक समिति चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का सबसे कम दखल देने वाला तरीका हो सकता है.

अदालत ने सरकार से प्रक्रिया का विवरण मांगा था, विशेष रूप से चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति से संबंधित फाइलें, जो 18 नवंबर को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने तक आईएएस अधिकारी थे. उन्हें अगले ही दिन राष्ट्रपति द्वारा चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था.

ब्रिटास ने कहा कि यह एक संयोग है कि उनके विधेयक में चुनाव आयोग की नियुक्ति के लिए सीजेआई की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने और लोकसभा अध्यक्ष और विपक्ष के नेता को शामिल करने का प्रस्ताव है.

उन्होंने कहा, ‘यह सबसे व्यवहार्य प्रस्ताव है. चुनाव आयोग अर्ध-न्यायिक निर्णय लेता है. यह एक निकाय है, जो लोकतंत्र के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है.’

ब्रिटास ने कहा कि विधेयक में चुनाव आयोग के एक स्वतंत्र सचिवालय की स्थापना का प्रस्ताव है, जो वर्तमान प्रणाली के विपरीत है, जिसमें सिविल सेवकों, जो कार्यकारिणी का हिस्सा हैं, को चुनाव आयोग में तैनात किया जाता है. उदाहरण के लिए जिस तरह लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय में अधिकारियों की भर्ती का तरीका अलग होता है, उसी तरह चुनाव आयोगई सचिवालय की भी अपनी व्यवस्था हो सकती है.

विधेयक में संविधान के अनुच्छेद 324 के खंड 2 में संशोधन का प्रस्ताव है, जो मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित है. राष्ट्रपति द्वारा की जा रहीं नियुक्तियों के बजाय, विधेयक में संबंधित खंड में ‘एक समिति की सिफारिशों के अनुसार’ पंक्ति को जोड़ने का प्रस्ताव है, जिसमें सीजेआई अध्यक्ष, लोकसभा स्पीकर सह-अध्यक्ष और लोकसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता सदस्य के रूप में शामिल हों.

बिल में यह भी प्रस्तावित किया गया है कि जब एक मुख्य चुनाव आयुक्त पद छोड़ता है, तो सबसे वरिष्ठ चुनाव आयुक्त को उस पद पर नियुक्त किया जाएगा, जब तक कि समिति उसे लिखित रूप में दर्ज कारणों से अयोग्य नहीं पाती है.

अभी तक यह सिर्फ एक परंपरा है कि वरिष्ठतम चुनाव आयुक्त को मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदोन्नत किया जाता है, लेकिन यह एक संवैधानिक प्रावधान नहीं है.

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