लंपी त्वचा रोग से देशभर में डेढ़ लाख से ज़्यादा मवेशियों की मौत हुई: सरकार

पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने राज्यसभा में बताया कि देशभर में इस साल लंपी त्वचा रोग से 1.55 लाख पशुओं की मौत हुई, जिसमें पचास फीसदी मौतें राजस्थान में हुईं.

/
लंपी त्वचा रोग से पीड़ित एक पशु. (फोटो: पीटीआई)

पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने राज्यसभा में बताया कि देशभर में इस साल लंपी त्वचा रोग से 1.55 लाख पशुओं की मौत हुई, जिसमें पचास फीसदी मौतें राजस्थान में हुईं.

लंपी त्वचा रोग से पीड़ित एक पशु. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: संक्रामक लंपी त्वचा रोग से इस साल देश में 1.55 लाख से अधिक मवेशियों की जान चली गई. 22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में  अकेले राजस्थान में इस बीमारी से लगभग 50% (75,819) ऐसी मौतें हुईं.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, जिन अन्य राज्यों में मरने वाले मवेशियों की संख्या अधिक रही, उनमें महाराष्ट्र (24,430), पंजाब (17,932), कर्नाटक (12,244) और हिमाचल प्रदेश (10,681) शामिल हैं. हालांकि गुजरात शीर्ष प्रभावित राज्यों में शामिल है, लेकिन शीर्ष पांच की तुलना में राज्य में मौतों की संख्या कम (6,193) देखी गई है.

पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने शुक्रवार को राज्यसभा में लंपी त्वचा रोग के कारण मवेशियों के मरने के राज्यवार आंकड़ों को साझा करते हुए दावा किया कि वर्तमान में टीकाकरण से बीमारी नियंत्रण में है और अब तक लगभग 6.26 करोड़ पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है.

मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस साल 22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में अब तक 29.45 लाख से अधिक मवेशी संक्रमण से प्रभावित हुए हैं. बताया गया है कि 25.5 लाख से अधिक मवेशी पहले ही इस बीमारी, जो पहली बार सितंबर 2019 में ओडिशा में मवेशियों में सामने आई थी, से उबर चुके हैं.

हालांकि लंपी त्वचा रोग मुख्य रूप से गायों में होने वाली एक बीमारी है, लेकिन सामने आए प्रमाण बताते हैं कि यह भैंस, ऊंट, हिरण और घोड़े को भी प्रभावित कर सकती है. इस साल ऐसे जानवरों में इसके प्रसार ने प्राणीजन्य रोगों के प्रभाव के बारे में चिंताएं बढ़ा दी थीं.

मंत्रालय ने उच्च सदन में बताया कि वह बीमारी को नियंत्रित करने के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सहयोग देने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रहा है जिसमें वित्तीय और तकनीकी मदद भी शामिल हैं.