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भारतीय रेलवे में 3.12 लाख से अधिक पद रिक्त: सरकारी डेटा

राज्यसभा में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा दिए गए एक जवाब के अनुसार, भारतीय रेलवे में 1 दिसंबर, 2022 तक 18 क्षेत्रों में 3.12 लाख नॉन-गजेटेड पद खाली थे. अधिकतम 38,754 पद उत्तरी क्षेत्र में रिक्त हैं. इन नॉन गजेटेड पदों में इंजीनियर, टेक्नीशियन, क्लर्क, स्टेशन मास्टर, टिकट कलेक्टर आदि नौकरियां शामिल हैं.

(फोटोः पीटीआई)

नई दिल्ली: एक मीडिया रिपोर्ट ने सरकार के आंकड़ों के आधार पर बताया है कि भारतीय रेलवे में देश भर में 3.12 लाख अराजपत्रित (नॉन-गजेटेड) पद खाली पड़े हैं.

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले साल मार्च में कहा था कि सभी पदों के लिए कर्मचारियों की भारी कमी है, लेकिन तब से अब तक स्थिति अलग नहीं दिखती.

द हिंदू के अनुसार, राज्यसभा में एक तारांकित प्रश्न के मंत्री के जवाब के अनुसार, भारतीय रेलवे में 1 दिसंबर, 2022 तक 18 क्षेत्रों में 3.12 लाख अराजपत्रित पद खाली पड़े हैं. अधिकतम पद उत्तरी क्षेत्र (38,754), इसके बाद पश्चिमी (30,476), पूर्वी (30,141) और मध्य क्षेत्र (28,650) में खाली हैं.

इन नॉन गजेटेड पदों में इंजीनियर, टेक्नीशियन, क्लर्क, स्टेशन मास्टर, टिकट कलेक्टर आदि नौकरियां शामिल हैं.

अख़बार के मुताबिक, रेलवे में कर्मचारियों की कमी के कारण कई कर्मचारी ओवरटाइम काम कर रहे हैं और कई टिकट बुकिंग खिड़कियां बंद हो गई हैं, जिससे यात्रियों की लंबी कतारें और भीड़ बढ़ती जा रही है.

अख़बार से बात करते हुए मुंबई में मध्य रेलवे के टिकट बुकिंग कार्यालय के एक 29 वर्षीय कर्मचारी ने कहा, ‘मैं लगातार 16 घंटे तक डबल शिफ्ट में काम कर रहा हूं, क्योंकि हमारे पास रिलीव करने के लिए स्टाफ नहीं है. स्टाफ की कमी की वजह से मैं पढ़ाई के लिए छुट्टी तक नहीं ले पा रहा हूं.’

उन्होंने बताया कि वे कानून की परीक्षा की तैयारी कर रहा है और उन्हें उम्मीद है कि यह इम्तिहान पास करने के बाद वे अंतर-विभागीय तबादले के जरिये कानूनी अनुभाग में जा सकेंगे.

मध्य रेलवे में कुल 28,650 पदों में से 14,203 रिक्तियां- लगभग 50% अकेले सुरक्षा श्रेणी में हैं. इस श्रेणी की नौकरियों में संचालन और रखरखाव कर्मचारी, जैसे- विभिन्न प्रकार के निरीक्षक, ड्राइवर, ट्रेन परीक्षक, शंटर व अन्य शामिल हैं.

पिछले साल नवंबर के अंत में मध्य रेलवे के राष्ट्रीय रेलवे मजदूर संघ (एनआरएमयू) ने रेलवे में 28,705 रिक्त पदों के खिलाफ छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन किया था.

हिंदुस्तान टाइम्स ने तब बताया था कि 1.19 लाख कर्मचारियों में से 24% पद लगभग एक साल से खाली हैं. अख़बार ने यह भी बताया था कि सरकार द्वारा रिक्तियों को न भरे जाने के कारण अधिकांश कर्मचारियों को ओवरटाइम काम करना पड़ता है, जबकि कुछ पदोन्नति वाले पदों को स्वीकार करने में असमर्थ हैं क्योंकि उनकी जगह लेने वाला कोई नहीं है. ये मुद्दे ट्रेनों के कामकाज और पटरियों के रखरखाव को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा खतरे में है.

इससे इतर एक राष्ट्रीय रेलवे मजदूर संघ के कर्मचारी ने द हिंदू को बताया कि कर्मचारियों की कमी के कारण टिकट सेवाओं की आउटसोर्सिंग भी हुई है. उन्होंने बताया, ‘रेलवे निजी पार्टियों को नियुक्त करता है जो टिकट बुकिंग खिड़की के बाहर बेचे गए प्रत्येक 100 रुपये के टिकट पर 3 रुपये कमाते हैं. पर यह काम रेलवे कर्मचारियों द्वारा किया जाना चाहिए.’

हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, संसद में रेल मंत्रालय द्वारा पेश की गई एक आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा गया है, ‘रिक्तियां होना और भरना एक सतत प्रक्रिया है और रिक्तियों को पदोन्नति के माध्यम से भरा जाता है और आवश्यकताओं के अनुसार भर्ती एजेंसियों के साथ इंडेंट के माध्यम से भी भरा जाता है.’

आगे कहा गया है, ‘गैर-तकनीकी लोकप्रिय श्रेणियों के लिए सीधी भर्ती की 35,281 रिक्तियों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली गई है.’

जनवरी 2022 में रेलवे भर्ती बोर्ड की चयन प्रक्रिया को लेकर हजारों उम्मीदवारों द्वारा कई विरोध प्रदर्शन किए जाने के लगभग एक साल बाद यह निराशाजनक संख्या सामने आई है.

खबरों के अनुसार, कम से कम 10 मिलियन आवेदक 40,000 नौकरियां पाने की उम्मीद कर रहे थे जो कि प्रस्तावित थीं. यह आंकड़ा इस तथ्य की भी पुष्टि करता है कि युवा बेरोज़गारी की दर भारत में सबसे अधिक है.