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उज़्बेकिस्तान में बच्चों की मौत मामला: डब्ल्यूएचओ ने भारतीय कफ सीरप में विषाक्त पदार्थ पाए

दिसंबर 2022 में उज़्बेकिस्तान ने दावा किया था कि भारतीय कफ सीरप पीने से उनके देश में कथित तौर पर 18 बच्चों की मौत हो गई थी. सीरप की निर्माता नोएडा की मैरियन बायोटेक कंपनी थी. अब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कंपनी के दो कफ सीरप के ख़िलाफ़ चेतावनी जारी की है.

मैरियन बायोटेक का नोएडा स्थित दफ़्तर. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) बुधवार (11 जनवरी) शाम एक भारतीय फर्म द्वारा बनाए गए दो कफ सीरप (खांसी की दवा) के खिलाफ चेतावनी जारी की, जो संभावित रूप से उज्बेकिस्तान में 18 बच्चों की मौत से जुड़े हुए हैं.

चेतावनी (उत्पाद अलर्ट) में कहा गया है कि दोनों कफ सीरप में डायएथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) और एथिलीन ग्लाइकॉल (ईजी) अस्वीकार्य स्तर पर पाए गए हैं.

यह घटनाक्रम गांबिया में ऐसी ही एक अन्य घटना के बाद हुआ है, जिसमें डब्ल्यूएचओ की एक अन्य चेतावनी के अनुसार, बच्चों के चार सीरप में डीईजी और ईजी पाए गए.

बुधवार का उत्पाद अलर्ट दो उत्पादों- ‘एंब्रोनॉल कफ सीरप’ और ‘डॉक्स-1 मैक्स’ सीरप के खिलाफ है. दोनों का निर्माण नोए़डा स्थित दवा कंपनी मैरियन बायोटेक द्वारा किया जाता है. डब्ल्यूएचओ की चेतावनी पर कंपनी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. इसकी वेबसाइट बंद कर दी गई है.

संयुक्त राष्ट्र निकाय की स्वास्थ्य चेतावनी में कहा गया है कि उज्बेकिस्तान के स्वास्थ्य प्राधिकरणों के आदेश पर ‘राष्ट्रीय गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाओं’ द्वारा विवादित नमूनों का परीक्षण किया गया था.

चेतावनी में कहा गया है, ‘आज की तारीख तक उल्लिखित निर्माता ने इन उत्पादों की सुरक्षा और गुणवत्ता पर डब्ल्यूएचओ को गारंटी नहीं दी है.’

डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि दोनों उत्पादों के पास अन्य देशों में बाजार की मंजूरी हो सकती है या अनौपचारिक बाजार के माध्यम से आपूर्ति की जा सकती है.

डब्ल्यूएचओ की चेतावनी में कहा गया है, ‘मरीजों को नुकसान से बचाने के लिए इन घटिया उत्पादों का पता लगाना और प्रचलन से हटाना आवश्यक है.’

इसमें दुनिया भर के दवा नियामकों से अपने-अपने बाजारों में इन उत्पादों की निगरानी बढ़ाने को कहा गया है.

द वायर ने पहले भी अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि जिन सीरप पर सवाल उठ रहा है, उनमें डायएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा 21 फीसदी तक है. बाद में गांबिया संसद की एक रिपोर्ट में निष्कर्ष निकला कि वे सीरप उनके देश में 70 बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार थे. भारत सरकार ने अब तक गांबिया की संसदीय रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है और उन सीरप के निर्माण के लिए जिम्मेदार भारतीय फर्म को क्लीनचिट दे दी है.

उज्बेकिस्तान ने पहली बार 27 दिसंबर, 2022 को दो उत्पादों में से एक ‘डॉक्स-1 मैक्स’ सीरप के खिलाफ चेतावनी दी थी. जिसमें कहा था, ‘अब तक सांस संबंधी रोग वाले 21 में से 18 बच्चों की मौत ‘डॉक्स-1 मैक्स’ सीरप के सेवन के चलते हुई है.’

चेतावनी में आगे कहा गया था, ‘यह पाया गया कि मृत बच्चों ने अस्पताल में भर्ती होने से पहले इस दवा को घर पर 2 से 7 दिनों तक दिन में 3-4 बार 2.5 से 5 एमएल लिया था, जो बच्चों के लिए दवा की मानक खुराक से अधिक है.’

उज्बेकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय के बयान में कहा गया कि दवा में एथिलीन ग्लाइकॉल शामिल है.

इसके दो दिन बाद भारतीय दवा नियामक केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की एक टीम ने जांच के लिए नियंत्रण नमूने (कंट्रोल सेंपल) एकत्र किए. बाजार में जारी उत्पादों के प्रत्येक बैच के लिए एक निर्माता को भविष्य की जांच के लिए नमूनों को संरक्षित करना होता है और उन नमूनों को नियंत्रण नमूने के रूप में जाना जाता है.

भारतीय जांच के परिणाम लंबित हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश राज्य ड्रग कंट्रोलर ने 10 जनवरी को मैरियन बायोटेक का लाइसेंस रद्द कर दिया है.

समाचार एजेंसी एएनआई ने गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) के ड्रग इंस्पेक्टर वैभव बब्बर के हवाले से कहा, ‘हमने मैरियन बायोटेक कंपनी का उत्पाद लाइसेंस निलंबित कर दिया है, क्योंकि उन्होंने हमें पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए.’

बब्बर ने एएनआई को यह भी बताया, ‘निरीक्षण के दौरान मांगे गए दस्तावेजों, जो उन्होंने (मैरियन बायोटेक) उपलब्ध नहीं कराए, के आधार पर राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण द्वारा एक कारण बताओ नोटिस दिया गया था. कंपनी में सभी दवाओं का निर्माण बंद कर दिया गया है.’

इससे पहले उज्बेकिस्तान में कफ सीरप से बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के तहत काम करने वाली संस्था औषधि निर्यात संवर्धन परिषद (फार्मेक्सिल) ने उज्बेकिस्तान के घटनाक्रम के बाद मैरियन बायोटेक का लाइसेंस निलंबित कर दिया था.

परिषद ने कंपनी से डॉक्स-1 मैक्स सीरप का निर्यात कहां किया गया, आयातकों के नाम, विनिर्माण लाइसेंस की प्रति सहित अन्य विवरण मांगा था. कंपनी कथित तौर पर ये विवरण प्रदान करने में विफल रही थी.

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