प्रधानमंत्री की आलोचना वाला पोस्ट करने से वकील जज बनने के लिए अनुपयुक्त नहीं हो सकते: कॉलेजियम

सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम में शामिल भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ ने 16 फरवरी, 2022 को पिछले कॉलेजियम द्वारा मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में अधिवक्ता आर. जॉन सत्यन को पदोन्नत करने की सिफ़ारिश को दोहराते हुए यह टिप्पणी की.

/
(फोटो साभार: Pinakpani/Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0)

सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम में शामिल भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ ने 16 फरवरी, 2022 को पिछले कॉलेजियम द्वारा मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में अधिवक्ता आर. जॉन सत्यन को पदोन्नत करने की सिफ़ारिश को दोहराते हुए यह टिप्पणी की.

(फोटो साभार: Pinakpani/Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने कहा है कि एक वकील न्यायाधीश के पद के लिए सिर्फ इसलिए अनुपयुक्त नहीं हो जाता, क्योंकि उसने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री की आलोचना करने वाले एक समाचार लेख को साझा किया था.

साथ ही उन्होंने 2017 में एक मेडिकल उम्मीदवार की आत्महत्या के बारे में अपनी राय व्यक्त की थी, क्योंकि वह प्लस टू परीक्षा में अच्छा अंक पाने के बावजूद एक सीट पाने में असमर्थ रही थी. लाइव लॉ के अनुसार, उनके पोस्ट में ‘राजनीतिक विश्वासघात’, ‘शेम ऑफ यू इंडिया’ जैसे टैग शामिल थे.

कॉलेजियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ ने 16 फरवरी, 2022 को पिछले कॉलेजियम द्वारा मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में अधिवक्ता आर. जॉन सत्यन (अब एक नामित वरिष्ठ अधिवक्ता) को पदोन्नत करने की सिफारिश को दोहराते हुए यह टिप्पणी की.

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, बीते मंगलवार (17 जनवरी) को हुई कॉलेजियम की बैठक के संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि उक्त सिफारिश सभी परामर्शदाता न्यायाधीशों की सहमति से की गई थी, जिन्होंने अधिवक्ता सत्यन को पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाया था. इन परामर्शदाताओं में जस्टिस कौल और इंदिरा बनर्जी (सेवानिवृत्त), वी. रामासुब्रमण्यन और एमएम सुंदरेश शामिल थे.

इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि उनकी एक अच्छी व्यक्तिगत और पेशेवर छवि है और उनकी सत्यनिष्ठा के खिलाफ कुछ भी प्रतिकूल नहीं मिला है. रिपोर्ट में कहा गया है कि उनका कोई राजनीतिक झुकाव नहीं है. रिपोर्ट में एकमात्र प्रतिकूल टिप्पणी उसके द्वारा सोशल मीडिया में किए गए कुछ पोस्ट के संबंध में थी.

कॉलेजियम ने कहा, ‘इस पृष्ठभूमि में 2017 में एक मेडिकल उम्मीदवार (एस. अनीता) द्वारा आत्महत्या के संबंध में एक समाचार लेख और एक अन्य पोस्ट साझा करने से सत्यन की उपयुक्तता, चरित्र या अखंडता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. इस दृष्टि से कॉलेजियम की सुविचारित राय है कि आर. जॉन सत्यन मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए फिट और उपयुक्त हैं.’

इसने सिफारिश की कि उनके नाम पर पांच अधिवक्ताओं और तीन न्यायिक अधिकारियों सहित आठ अन्य नामों की वरीयता में पदोन्नति के लिए विचार किया जाना चाहिए, जिन्हें उसी हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के रूप में पदोन्नति के लिए वर्तमान कॉलेजियम द्वारा अनुमोदित किया गया था.

इन पांच अधिवक्ताओं में पांच अधिवक्ता वी. लक्ष्मीनारायणन, एलसी विक्टोरिया गौरी, पीबी बालाजी, आर. नीलकंदन और केके रामकृष्णन शामिल थे.