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पतंजलि को गंगा के तट पर पुष्प विविधता के ‘वैज्ञानिक अन्वेषण’ के लिए प्रोजेक्ट मिला

जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने हरिद्वार स्थित पतंजलि अनुसंधान संस्थान और पतंजलि जैविक अनुसंधान संस्थान को गंगा नदी के किनारों के पास पुष्प विविधता का ‘वैज्ञानिक अन्वेषण’ करने की एक परियोजना सौंपी है, जिसकी लागत 4.32 करोड़ रुपये है.

(फोटो साभार: राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी), जो जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत आता है और जो केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे योजना का शीर्ष निकाय है, ने हरिद्वार स्थित पतंजलि अनुसंधान संस्थान और पतंजलि जैविक अनुसंधान संस्थान को 4.32 करोड़ रुपये की परियोजना का आवंटन किया है.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य गंगा नदी के किनारों के पास पुष्प विविधता का ‘वैज्ञानिक अन्वेषण’ करना है.

अख़बार के अनुसार, एनएमसीजी की कार्यकारी समिति ने 23 दिसंबर, 2022 को अपनी बैठक में पतंजलि को यह प्रोजेक्ट आवंटित करने का निर्णय लिया.

एनएमसीजी के महानिदेशक जी. अशोक कुमार की अध्यक्षता में बैठक के मिनट बताते हैं, ‘चर्चा के बाद कार्यकारी समिति (ईसी) ने 18 महीने की अवधि के लिए 4,32,36,107 रुपये के अनुमानित लागत पर पतंजलि अनुसंधान संस्थान (पीआरआई) और पतंजलि जैविक अनुसंधान संस्थान (पीओआरआई), हरिद्वार, उत्तराखंड द्वारा परियोजना को लागू करने के लिए प्रशासनिक स्वीकृति और व्यय स्वीकृति (एए एंड ईएस) जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है.’

यह मिनट कुछ समय पहले ही सामने आए हैं. इसमें आगे कहा गया है, ‘परियोजना लागत में एनएमसीजी का हिस्सा 2,41,50,545 रुपये (56%) है और पीओआरआई का हिस्सा 1,90,85,562 रुपये (44%) है. यह भी निर्णय लिया गया कि पतंजलि द्वारा बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया और समिति के सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों का अनुपालन किया जाएगा.’

चर्चा के रिकॉर्ड बताते हैं कि पीओआरआई, हरिद्वार के अध्यक्ष आचार्य बालकृष्ण ने ‘कौशल विकास कार्यक्रम क्षेत्र के माध्यम से क्षेत्र के संरक्षण और आर्थिक विकास के साथ-साथ नृवंशविज्ञान (एथनोबॉटनिकल) संबंधी उद्देश्यों के लिए गंगा नदी के किनारों के पास पुष्प विविधता के वैज्ञानिक अन्वेषण’ पर प्रस्ताव प्रस्तुत किया था.

बैठक के मिनट्स के मुताबिक, ‘उन्होंने अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में पतंजलि की व्यापक गतिविधियों की संक्षिप्त जानकारी दी और नमामि गंगे मिशन का हिस्सा बनने के लिए अपनी उत्सुकता जाहिर की.’

रिकॉर्ड्स के अनुसार, आचार्य बालकृष्ण ने समिति को सूचित किया कि परियोजना का उद्देश्य ‘फाइटोकेमिकल विश्लेषण, पुष्प सर्वेक्षण, वृक्षारोपण, वनस्पतियों और जीवों के अनुसंधान और दस्तावेज़ीकरण के साथ हितधारकों के लिए आउटरीच/आईईसी समेत व्यावसायिक संभावनाओं को पूरा करना है.’

चर्चा के रिकॉर्ड से पता चलता है कि एनएमसीजी अधिकारियों में से एक ईडी (प्रशासन) ने यह जिक्र किया है कि बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया (बीएसआई) के पास भारत में ‘फाइटोडाइवर्सिटी (बिना फूल वाले पौधों सहित) की खोज, आविष्कार और दस्तावेजीकरण करने का अधिकार है और यह पौधों से जुड़े पारंपरिक ज्ञान (एथनोबॉटनी) का सर्वेक्षण और दस्तावेजीकरण करता है.’

मिनट्स में आगे कहा गया है, ‘इसलिए, पतंजलि को बीएसआई द्वारा पहले से किए गए कार्यों के दोहराव से बचने के लिए बीएसआई के पास उपलब्ध जानकारी का उपयोग करना चाहिए. इसके अलावा, इस बारे में कुछ जानकारी वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून और आयुष मंत्रालय के पास भी हो सकती है.’

अख़बार के मुताबिक, आचार्य बालकृष्ण इन एजेंसियों के साथ समन्वय करने के लिए सहमति जताई. रिकॉर्ड्स में यह भी बताया गया है कि  एनएमसीजी के अधिकारियों ने समिति को सूचित किया कि प्रस्तुत प्रस्ताव की बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा ‘समीक्षा’ की गई है.

उल्लेखनीय है कि एनएमसीजी द्वारा यह प्रोजेक्ट हरिद्वार स्थित इस संगठन के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने के कुछ दिनों बाद दिया गया है. एनएमसीजी और पीओआरआई ने 31 अक्टूबर, 2022 को ‘अर्थ गंगा’ के प्रचार और कार्यान्वयन के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे.