क़र्ज़ कम करने के लिए अंबुजा सीमेंट में हिस्सेदारी बेचने की कोशिश में है अडानी समूह: रिपोर्ट

द फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बीते जनवरी माह में अमेरिकी निवेश फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा स्टॉक हेरफेर और लेखा धोखाधड़ी के आरोपों लगाए जाने के बाद अडानी समूह की यह पहली परिसंपत्ति बिक्री होगी.

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गौतम अडानी. (फोटो साभार: विकिपीडिया)

द फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बीते जनवरी माह में अमेरिकी निवेश फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा स्टॉक हेरफेर और लेखा धोखाधड़ी के आरोपों लगाए जाने के बाद अडानी समूह की यह पहली परिसंपत्ति बिक्री होगी.

गौतम अडानी. (फोटो साभार: विकिपीडिया)

नई दिल्ली: अमेरिकी निवेश फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च की एक रिपोर्ट सामने आने के बाद विवादों में फंसा अडानी समूह अपने स्वामित्व वाले अंबुजा सीमेंट में अपनी हिस्सेदारी (Stake) का एक हिस्सा बेचने की फिराक में है, ताकि वह अपने कर्ज को कम कर सके और समूह में निवेशकों के गिरते विश्वास को बहाल किया जा सके.

फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीते जनवरी माह में हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद यह समूह की पहली परिसंपत्ति बिक्री (Asset Sale) होगी.

भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी, जिनके भाग्य में वृद्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक उदय के साथ हुई, ने सीमेंट कंपनी में अपनी हिस्सेदारी का 4 से 5 प्रतिशत बेचने के लिए अंतरराष्ट्रीय उधारदाताओं से औपचारिक अनुरोध किया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे उन्हें लगभग 450 मिलियन डॉलर जुटाने की अनुमति मिलनी चाहिए.

रिपोर्ट में यह खुलासा नहीं किया गया कि हिस्सेदारी कौन खरीदेगा और बताया गया है कि योजना को अंतिम रूप नहीं दिया गया है.

अडानी के पास अंबुजा सीमेंट का 63 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसे अंबुजा सीमेंट और एसीसी के लिए 10.5 बिलियन डॉलर के सौदे के हिस्से के रूप में अधिग्रहित किया गया था.

इस अधिग्र​हण ने अडानी समूह को रातोंरात देश का दूसरा सबसे बड़ा सीमेंट व्यवसायी समूह बना दिया था.

बार्कलेज, स्टैंडर्ड चार्टर्ड और ड्यूश बैंक के नेतृत्व में 14 अंतरराष्ट्रीय बैंकों के एक संघ ने सौदे को वित्तपोषित करने के लिए 4.5 अरब डॉलर प्रदान किए थे.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अडानी ने पहले ही 500 मिलियन डॉलर के ब्रिज लोन का भुगतान कर दिया है, जो इस पैकेज का हिस्सा था और इस महीने की शुरुआत में मेच्योर (वह तारीख जिस दिन उधार लेने वाले को अंतिम ऋण भुगतान करना होता है.) होने वाला था.

लाभदायक सीमेंट कंपनी में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचने के लिए अडानी का कदम हिंडनबर्ग रिसर्च की एक रिपोर्ट के बाद आया है. रिपोर्ट आने के बाद अडानी समूह को अपनी सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार मूल्य से 145 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है.

इस महीने की शुरुआत में अडानी परिवार की एक निजी इकाई ने अपनी चार कंपनियों में 1.9 अरब डॉलर मूल्य के शेयर फ्लोरिडा स्थित एसेट मैनेजर जीक्यूजी पार्टनर्स को बेचे हैं.

मालूम हो कि बीते जनवरी महीने में अमेरिकी निवेश रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग ने अडानी समूह पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे, जिसके बाद समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई.

इस रिपोर्ट में कहा गया था कि दो साल की जांच में पता चला है कि अडानी समूह दशकों से ‘स्टॉक हेरफेर और लेखा धोखाधड़ी’ में शामिल रहा है.

रिपोर्ट सामने आने के बाद अडानी समूह ने बीते 26 जनवरी को कहा था कि वह अपनी प्रमुख कंपनी के शेयर बिक्री को नुकसान पहुंचाने के प्रयास के तहत ‘बिना सोचे-विचारे’ काम करने के लिए हिंडनबर्ग रिसर्च के खिलाफ ‘दंडात्मक कार्रवाई’ को लेकर कानूनी विकल्पों पर गौर कर रहा है.

इसके जवाब में हिंडनबर्ग रिसर्च ने कहा था कि वह अपनी रिपोर्ट पर पूरी तरह कायम है. कंपनी ने यह भी कहा था कि अगर अडानी समूह गंभीर है, तो उसे अमेरिका में भी मुकदमा दायर करना चाहिए जहां हम काम करते हैं. हमारे पास कानूनी प्रक्रिया के दौरान मांगे जाने वाले दस्तावेजों की एक लंबी सूची है.

बीते 30 जनवरी को अडानी समूह ने हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों के जवाब में 413 पृष्ठ का ‘स्पष्टीकरण’ जारी किया है. अडानी समूह ने इन आरोपों के जवाब में कहा था कि यह हिंडनबर्ग द्वारा भारत पर सोच-समझकर किया गया हमला है. समूह ने कहा था कि ये आरोप और कुछ नहीं सिर्फ ‘झूठ’ हैं.

समूह ने कहा था, ‘यह केवल किसी विशिष्ट कंपनी पर एक अवांछित हमला नहीं है, बल्कि भारत, भारतीय संस्थाओं की स्वतंत्रता, अखंडता और गुणवत्ता, तथा भारत की विकास गाथा और महत्वाकांक्षाओं पर एक सुनियोजित हमला है.’

अडानी समूह के इस जवाब पर पलटवार करते हुए हिंडनबर्ग समूह की ओर से सोमवार को कहा गया कि धोखाधड़ी को ‘राष्ट्रवाद’ या ‘कुछ बढ़ा-चढ़ाकर प्रतिक्रिया’ से ढंका नहीं जा सकता. भारत एक जीवंत लोकतंत्र और उभरती महाशक्ति है. अडानी समूह ‘व्यवस्थित लूट’ से भारत के भविष्य को रोक रहा है.

हिंडनबर्ग की ओर से कहा गया, ‘हम असहमत हैं. स्पष्ट होने के लिए हम मानते हैं कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है और एक रोमांचक भविष्य के साथ एक उभरती हुई महाशक्ति है. हम यह भी मानते हैं कि भारत का भविष्य अडानी समूह द्वारा रोका जा रहा है, जिसने देश को व्यवस्थित रूप से लूटते हुए खुद को राष्ट्रवाद के आवरण में लपेट लिया है.’

हिंडनबर्ग रिसर्च ने प्रतिक्रिया में कहा कि धोखाधड़ी, धोखाधड़ी ही होती है चाहे इसे दुनिया के सबसे अमीर आदमी ने अंजाम क्यों न दिया हो.

इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के​ लिए यहां क्लिक करें

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