राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और विपक्ष के नेता अजीत पवार ने महाराष्ट्र विधानसभा में कहा कि एकनाथ शिंदे सरकार के सत्ता में आने के बाद से अब तक कम से कम 1,203 किसानों ने अपनी जान ली है. शिंदे-फडणवीस सरकार कृषि के मामले में सबसे असंवेदनशील सरकारों में से एक है.
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नई दिल्ली: महाराष्ट्र में प्रतिदिन आठ किसान कथित तौर पर आत्महत्या कर रहे हैं और एकनाथ शिंदे सरकार के सत्ता में आने के बाद से अब तक कम से कम 1,203 किसानों ने अपनी जान ली है.
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता और विपक्ष के नेता अजीत पवार ने बीते 10 मार्च को महाराष्ट्र विधानसभा में यह जानकारी दी है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पवार ने कहा, ‘बेमौसम बारिश के कारण महाराष्ट्र में खेती खतरे में है, कृषि उपज को अच्छी कीमत नहीं मिल पा रही है और इसके परिणामस्वरूप किसान अपनी उपज सड़क पर फेंक रहे हैं. कृषि बिजली कनेक्शन काटे जा रहे हैं और उर्वरकों की कीमत बढ़ रही है.’
उन्होंने कहा, ‘शिंदे-फडणवीस सरकार कृषि के मामले में सबसे असंवेदनशील सरकारों में से एक है.’
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि मौजूदा प्रशासन के सात महीनों के दौरान मरने वाले 1,203 किसानों के मुकाबले उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पिछली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार के ढाई साल की अवधि में 1,660 किसानों की मौत हुई थी.
एमवीए सरकार से पहले राज्य भाजपा शासन के अधीन था और देवेंद्र फडणवीस 2014 और 2019 के बीच मुख्यमंत्री थे. उस अवधि में 5,061 किसानों ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने पवार के हवाले से कहा, ‘मराठवाड़ा क्षेत्र में पिछले दो महीनों में 62 किसानों ने आत्महत्या की है, जबकि बीड जिले में कुल 22 किसानों ने आत्महत्या की है.’
पवार ने आरोप लगाया, ‘हम किसी एक व्यक्ति या किसी खास मुख्यमंत्री को दोष नहीं देना चाहते, लेकिन यह कड़वी सच्चाई है कि शिंदे सरकार में बड़ी संख्या में किसान अपनी जिंदगी खत्म कर रहे हैं.’
उन्होंने विस्तार से बताया कि किसानों के बीच वित्तीय संकट उनकी परेशानियों के प्रमुख कारकों में से एक था.
पवार ने कहा, ‘कपास, प्याज और सोयाबीन उगाने वाले किसानों को इस वर्ष उनकी फसलों के उचित मूल्य नहीं मिले. हमने देखा है कि कैसे प्याज के किसान अपने उत्पादों को सड़क पर फेंक रहे हैं, जबकि उनमें से कुछ उन्हें खेतों में जला रहे हैं. किसान अपनी लागत और खर्च भी वसूल नहीं कर पा रहे हैं.’
हाल ही में पेश किए गए राज्य सरकार के बजट में किसानों के लिए 6,000 रुपये की वार्षिक नकद सहायता सहित कई योजनाओं की घोषणा करने के बाद विपक्ष ने सरकार की आलोचना की थी. यह वार्षिक सहायता केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की गई 6,000 रुपये की समान सहायता के अतिरिक्त होगी.
पवार ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य के सांगली जिले की एक घटना का जिक्र करते हुए किसानों से उनकी जाति के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है, जब वे उर्वरक खरीदने जाते हैं.
एनसीपी नेता जयंत पाटिल ने कहा, ‘अब सरकारी साइट पर खाद खरीदते समय किसान की जाति पूछी गई है. यह अजीब है कि वे किसानों से उनकी जाति पूछकर उन्हें कैसे अपमानित कर सकते हैं. किसान तो किसान होता है, कृपया उन्हें जाति और धर्म के आधार पर न बांटें.’
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