ओडिशा: वेदांता, अडानी को बॉक्साइट खनन के लिए वनभूमि देने के विरोध में आए आदिवासी समूह

ओडिशा के रायगड़ा ज़िले की सिजिमाली पहाड़ियों में वेदांता और रायगड़ा और कालाहांडी ज़िलों में फैली कुटरुमाली पहाड़ियों में अडानी समूह को वनभूमि पट्टे पर दी गई है. आदिवासी अधिकार संगठन और कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध कर रहे आदिवासी युवाओं के पुलिस द्वारा दमन का आरोप लगाया है.

/
(प्रतीकात्मक तस्वीर: द वायर)

ओडिशा के रायगड़ा ज़िले की सिजिमाली पहाड़ियों में वेदांता और रायगड़ा और कालाहांडी ज़िलों में फैली कुटरुमाली पहाड़ियों में अडानी समूह को वनभूमि पट्टे पर दी गई है. आदिवासी अधिकार संगठन और कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध कर रहे आदिवासी युवाओं के पुलिस द्वारा दमन का आरोप लगाया है.

(प्रतीकात्मक तस्वीर: द वायर)

नई दिल्ली: ओडिशा में बॉक्साइट खनन के लिए वेदांता और अडानी समूह को वनभूमि पट्टे पर देने के खिलाफ आदिवासी अधिकार संगठन और कार्यकर्ताओं ने सोमवार को विरोध प्रदर्शन किया. साथ ही उन्होंने विरोध करने वाले आदिवासी युवाओं पर पुलिस द्वारा दमन का आरोप भी लगाया.

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, मूलनिवासी समाजसेवक संघ (एमएसएस) ने जुलाई में अधिनियमित वन कानूनों में संशोधन, जिसने सरकार को ग्रामसभा की सहमति के बिना दो कंपनियों को वनभूमि पट्टे पर देने की अनुमति दी थी, को रद्द करने की मांग करते हुए दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया था.

इसने आदिवासी युवाओं के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की भी मांग की, जिन पर कथित तौर पर एक खनन कंपनी की एक टीम पर पथराव करने के लिए हत्या के प्रयास जैसे अपराध का आरोप लगाया गया है या आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है.

ज्ञात हो कि ओडिशा के रायगड़ा जिले की सिजिमाली पहाड़ियों में वेदांता को और रायगड़ा और कालाहांडी जिलों में फैली कुटरुमाली पहाड़ियों में अडानी समूह को वनभूमि पट्टे पर दी गई है.

संवाददाता सम्मेलन में वकील कॉलिन गोंज़ाल्वेस, दिल्ली विश्वविद्यालय के फैकल्टी सदस्य जितेंद्र मीणा और एमएसएस नेता मधु ने वन संरक्षण अधिनियम में संशोधन के लिए नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना की.

गोंज़ाल्वेस ने कहा कि भारत का एक-चौथाई वन क्षेत्र ‘अधिसूचित वन’ है और तीन-चौथाई ‘गैर-अधिसूचित’ वन है. पुराने कानून के तहत अधिसूचित या गैर-अधिसूचित वन के किसी भी क्षेत्र को पट्टे पर देने के लिए ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य थी. संशोधन ने गैर-अधिसूचित क्षेत्रों के लिए इस आवश्यकता को समाप्त कर दिया है.

मधु ने आरोप लगाया कि ओडिशा सरकार ने फरवरी में ग्रामसभा की सहमति के बिना अवैध रूप से खनन पट्टे दिए थे, शायद यह जानते हुए कि केंद्र जल्द ही अधिनियम में संशोधन करेगा.

उन्होंने कहा कि दो खनन परियोजनाओं से 180 गांवों और 2 लाख आदिवासी लोगों का विस्थापन होगा.

गोंज़ाल्वेस ने कहा, ‘केंद्र सरकार ने कॉरपोरेट (समूहों) को आदिवासी भूमि पर कब्जा करने में मदद करने के लिए वन कानून में संशोधन किया.’

मधु ने कहा कि राज्य पुलिस ने पिछले एक महीने में 22 आदिवासी प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से 9 पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है.

मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील बिस्वा प्रिया कानूनगो ने द टेलीग्राफ को बताया, ‘प्रदर्शनकारी आदिवासियों के खिलाफ हत्या के प्रयास और यूएपीए जैसे आरोप लगाए गए हैं. कुल मिलाकर 94 लोगों को नामजद किया गया है और हत्या के प्रयास के लिए मामला दर्ज किया गया है, जबकि 200 अज्ञात लोगों पर भी आरोप लगाया गया है.’

उल्लेखनीय है कि एक दशक पहले वेदांता को ओडिशा की नियमगिरि पहाड़ियों में अपनी खनन योजनाओं को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था, क्योंकि 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि स्थानीय ग्राम सभाओं से अनुमति लेना जरूरी था.

कानूनगो ने कहा, ‘अगले साल नियमगिरि पहाड़ियों की 12 ग्राम सभाओं ने वेदांता के खनन प्रस्ताव को खारिज कर दिया था.’

भुवनेश्वर में खनन विरोधी कार्यकर्ता प्रफुल्ल सामंतरा ने कहा, ‘खनन लॉबी को सरकारी समर्थन प्राप्त है. यह राज्य प्रायोजित आतंकवाद है.’

वेदांता को कालाहांडी के लांजीगढ़ में अपने स्मेल्टर प्लांट को खिलाने के लिए बॉक्साइट की जरूरत है. वेदांता के एक वरिष्ठ अधिकारी ने विरोध प्रदर्शन को ‘राजनीति से प्रेरित’ बताया और कहा, ‘हम हमेशा पुनर्वास और रिसेटलमेंट पर ध्यान देते हैं.’

अखबार के अनुसार, रायगड़ा के पुलिस अधीक्षक विवेकानंद शर्मा को बार-बार कॉल करने पर कोई जवाब नहीं मिला.

उधर, ओडिशा के इस्पात और खान मंत्री प्रफुल्ल कुमार मलिक ने कहा, ‘हमें उनकी (आदिवासी समुदायों की) मांगों के बारे में पता नहीं है. एक बार जब वे अपनी मांगें रखेंगे, तो हम उनकी जांच करेंगे.’

मलिक ने इस आरोप पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि पुलिस ने आदिवासी प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार किया है. उन्होंने कहा, ‘मुझे इसकी जानकारी नहीं है.’

वेदांता ने सिजिमाली में खनन का ठेका माइथ्री इंफ्रास्ट्रक्चर एंड माइनिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को दिया है. माइथ्री द्वारा दर्ज करवाई गई एक एफआईआर में कहा गया है कि जब उसके कर्मचारी 12 अगस्त को निरीक्षण के लिए सरकारी अधिकारियों के साथ सिजिमाली पहुंचे, तो आदिवासी प्रदर्शनकारियों ने उन पर पथराव किया.

pkv games bandarqq dominoqq pkv games parlay judi bola bandarqq pkv games slot77 poker qq dominoqq slot depo 5k slot depo 10k bonus new member judi bola euro ayahqq bandarqq poker qq pkv games poker qq dominoqq bandarqq bandarqq dominoqq pkv games poker qq slot77 sakong pkv games bandarqq gaple dominoqq slot77 slot depo 5k pkv games bandarqq dominoqq depo 25 bonus 25 bandarqq dominoqq pkv games slot depo 10k depo 50 bonus 50 pkv games bandarqq dominoqq slot77 pkv games bandarqq dominoqq