गाज़ा के साथ इज़रायल की समस्या का सैन्य समाधान नहीं है, न ही इससे बदले की कार्रवाई को रोक सकते हैं

गाज़ा से होने वाले फिलीस्तीनी हमलों का इज़रायली सरकारों ने लगातार जो एकमात्र समाधान ढूंढा है, वो नाकाफ़ी है- कि अगर वो ज़मीन के रास्ते आए, तो दीवार बना देंगे; अगर रॉकेट दागे, तो इंटरसेप्टर बना लेंगे; अगर हमारे कुछ लोगों को मारा गया, तो उनके कइयों को मार डालेंगे. ऐसे ये सिलसिला लगातार चलता रहेगा.

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गाज़ा के रॉकेट हमले के बाद इज़रायल के एश्केलोन शहर की एक सड़क. (फोटो: जमाल अवाद)

गाज़ा से होने वाले फिलीस्तीनी हमलों का इज़रायली सरकारों ने लगातार जो एकमात्र समाधान ढूंढा है, वो नाकाफ़ी है- कि अगर वो ज़मीन के रास्ते आए, तो दीवार बना देंगे; अगर रॉकेट दागे, तो इंटरसेप्टर बना लेंगे; अगर हमारे कुछ लोगों को मारा गया, तो उनके कइयों को मार डालेंगे. ऐसे ये सिलसिला लगातार चलता रहेगा.

गाज़ा के रॉकेट हमले के बाद इज़रायल के एश्केलोन शहर की एक सड़क. (फोटो: जमाल अवाद)

(यह लेख 7 अक्टूबर को लिखा गया था.)

तेल अवीव: यह एक खौफनाक दिन है. इजरायली शहरों पर दागे गए सैकड़ों रॉकेट की बौछार के बीच बजते सायरन की आवाज से जागने के बाद से हम गाजा पट्टी की सीमा से लगे इजरायली शहरों में फिलीस्तीनी उग्रवादियों के अभूतपूर्व हमले के बारे में सुन रहे हैं.

इस समय तक कम से कम 40 इजरायलियों के मारे जाने और सैकड़ों के घायल होने की ख़बरें आ रही हैं, साथ ही कुछ लोगों का कथित तौर पर गाजा में अपहरण कर लिया गया है. इस बीच, इजरायली सेना ने पहले ही पट्टी पर हमला शुरू कर दिया है, सैनिकों ने सीमा के पास इकट्ठे होकर हवाई हमलों में अब तक कई फिलिस्तीनियों को मारा और घायल किया है. जो लोग अपनी सड़कों और अपने घरों में सशस्त्र आतंकवादियों को देख रहे हैं, या लड़ाकू विमानों और टैंकों को आते हुए देख रहे हैं, उनके डर के बारे में अंदाज़ा भी नहीं लगाया जा सकता. नागरिकों पर हमले युद्ध अपराध की गिनती में आते हैं और मेरी संवेदनाएं पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ हैं.

कई इजरायली जो कह रहे हैं उसके विपरीत, और जो कहा जा रहा है कि सेना स्पष्ट रूप से इस हमले को लेकर पूरी तरह से सतर्क हो गई थी, यह ‘एकतरफा’ या ‘बेवजह’ किया गया हमला नहीं है. मुझ समेत सभी इजरायली आज जिस डर को अभी महसूस कर रहे हैं, वह वेस्ट बैंक में दशकों से चले आ रहे सैन्य शासन और गाजा पर घेराबंदी और बार-बार होने वाले हमलों के चलते फिलिस्तीनियों ने रोज़ महसूस किया है. आज हम कई इजरायलियों से जो प्रतिक्रियाएं सुन रहे हैं- कि ‘गाजा को तबाह करो’ या ये कि ‘ये बर्बर लोग हैं, जिनके साथ आप समझौता नहीं कर सकते हैं,’ ‘वे पूरे-पूरे परिवारों क़त्ल कर रहे हैं,’ ‘इन लोगों के साथ बात करने के लिए कोई जगह नहीं है,’- ये सारी बिल्कुल वही बातें हैं, जो मैंने अनगिनत बार कब्जे वाले फिलिस्तीनियों को इजरायलियों के बारे में कहते सुना है.

आज सुबह हुए हमले के कई ताज़ा संदर्भ भी हैं. उनमें से एक सऊदी अरब और इज़रायल के बीच एक सामान्यीकरण समझौते का होना है. सालों से इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू यह दावा करते रहे हैं कि फिलिस्तीनियों से बात किए बिना या कोई रियायत दिए बिना अमन हासिल किया जा सकता है. अब्राहम समझौते ने फ़िलिस्तीनियों से उनकी आखिरी सौदेबाजी और समर्थन आधारों में से एक को छीन लिया है: अरब सरकारों की एकजुटता, बावजूद इसके कि यह एकजुटता लंबे समय से संदिग्ध ही रही है. शायद उन अरब सरकारों में से सबसे महत्वपूर्ण को खोने की बड़ी संभावना हमास को इस हद तक लाने की जिम्मेदार रही होगी.

इस बीच, विश्लेषक हफ्तों से चेतावनी दे रहे हैं कि कब्जे वाले वेस्ट बैंक में हालिया तनाव खतरनाक रास्तों की ओर बढ़ रहा है. पिछले सालभर में 2000 के दशक की शुरुआत के दूसरे इंतिफादा के बाद से किसी और बरस की तुलना में अधिक फिलिस्तीनी और इजरायली मारे गए हैं. इज़रायली सेना नियमित रूप से फ़िलिस्तीनी शहरों और शरणार्थी शिविरों में छापेमारी कर रही है. कट्टर दक्षिणपंथी सरकार बसने वालों को नई गैर-क़ानूनी चौकियां बनाने और फ़िलिस्तीनी कस्बों-गांवों में क़त्लेआम शुरू करने की पूरी तरह से खुली छूट दे रही है, जिसमें सैनिक बसने वालों के साथ हैं और अपने घरों को बचाने की कोशिश कर रहे फ़िलिस्तीनियों को मार रहे हैं या अपाहिज कर रहे हैं. यहूदी त्योहारों की छुट्टियों के बीच यहूदी चरमपंथी जेरुसलम में टेंपल माउंट/अल-अक्सा मस्जिद के आसपास ‘यथास्थिति’ को चुनौती दे रहे हैं, जिसे उनकी विचारधारा वाले नेताओं का समर्थन मिल रहा है.

इस बीच, गाजा में चल रही घेराबंदी लगातार दो मिलियन से अधिक फिलिस्तीनियों की ज़िंदगी तबाह कर रही है, जिनमें से कई बेहद गरीबी में जी रहे हैं, उनके पास साफ पानी की बहुत कम पहुंच है और दिन में क़रीब चार घंटे बिजली मिलती है. इस घेराबंदी का कोई आधिकारिक अंत नहीं है; यहां तक कि इजरायली सरकार की रिपोर्ट में भी पाया गया कि सरकार ने नाकाबंदी को खत्म करने के लिए कभी भी दीर्घकालिक समाधानों पर चर्चा नहीं की, न ही बार-बार शुरू होने वाले जंग और मौतों के दौर के किसी विकल्प पर ही गंभीरता से सोचा. असल में इस सरकार और इसके पूर्ववर्तियों के पास मौजूद इकलौता विकल्प यही है.

गाजा से होने वाले फिलीस्तीनी हमलों को लेकर इजरायली सरकारों ने लगातार जो एकमात्र जवाब ढूंढा है, वो नाकाफी है- कि अगर वो ज़मीन के रास्ते से आए, तो हम एक दीवार बना देंगे; अगर वे सुरंगों के ज़रिये पहुंचे, तो अंडरग्राउंड बैरिकेड लगा देंगे; अगर वे रॉकेट दागते हैं, तो हम इंटरसेप्टर बना लेंगे; अगर वो हमारे कुछ लोगों को मार रहे हैं, तो हम उनमें से कइयों को मार डालेंगे. और इस तरह ये लगातार चलता रहेगा.

यह सब किसी भी तरह से नागरिकों की हत्या को उचित ठहराने के लिए नहीं कहा जा रहा है- बिल्कुल नहीं. बल्कि, हमें यह याद दिलाने के लिए है कि आज जो कुछ भी हो रहा है उसकी एक वजह है, जो, अतीत में गुज़रे ऐसे सभी दौर की तरह- यह है कि गाजा के साथ इज़रायल की समस्या का कोई सैन्य समाधान नहीं है, न ही इससे हिंसक नस्लीय भेदभाव की स्वाभाविक प्रतिक्रिया के तौर उभरने वाले प्रतिरोध को ही काबू किया जा सकता है.

हाल के महीनों में हजारों इजरायली देश भर में ‘लोकतंत्र और समानता’ के लिए मार्च कर रहे हैं, कई लोगों ने तो यहां तक कहा है कि वे इस सरकार के तानाशाही रवैये के चलते मिलिट्री सर्विस से इनकार कर देंगे. उन प्रदर्शनकारियों और आरक्षित सैनिकों, जिनमें से कई ने मार्च छोड़कर गाज़ा के खिलाफ जंग में शामिल होने का ऐलान किया है, को, खासतौर पर आज की तारीख में, यह समझने की जरूरत है कि फिलिस्तीनी दशकों से उनके जैसी ही मांगों को लेकर लड़ रहे हैं- और उनके सामने वो इजरायल है, जो उनके प्रति पहले से ही पूरी तरह तानाशाह है और हमेशा से ही ऐसा रहा है.

जब मैं ये शब्द लिख रहा हूं, मैं तेल अवीव में अपने घर पर बैठे हुए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा हूं कि बिना किसी आश्रय या सेफ रूम वाले घर में अपने परिवार को कैसे बचा सकता हूं. इजरायल में गाजा के पास के शहर, जो हमलों से जूझ रहे हैं, में होने वाली भयानक घटनाओं की रिपोर्ट और अफवाहों के कारण घबराहट बढ़ रही है. मैं आसपास के लोगों को देख रहा हूं, उनमें से कुछ मेरे दोस्त भी हैं, जो सोशल मीडिया पर गाजा पर पहले से कहीं अधिक उग्रता से हमला करने की बात कर रहे हैं. कुछ इजरायली कह रहे हैं कि अब गाजा को पूरी तरह से खत्म करने का समय आ गया है- सीधे तरह से कत्लेआम का उकसावा. तमाम धमाकों, डर और खूनखराबे के बावजूद किसी शांतिपूर्ण रास्ते को चुनने की बात करना उन्हें पागलपन जैसा लगता है.

फिर भी, मैं याद करता हूं कि जो कुछ मैं और हर इजरायली महसूस कर रहा है, वह बहुत लंबे समय से लाखों फिलिस्तीनियों का अनुभव रहा है. इसका एकमात्र समाधान, जैसा कि हमेशा से रहा है, नस्लीय भेदभाव, कब्जे और घेराबंदी को ख़त्म करना और हम सभी के लिए इंसाफ और बराबरी पर आधारित भविष्य को बढ़ावा देना है. ऐसा नहीं है कि इस खौफनाक मंजर को देखकर हमें रास्ता बदलना पड़ा है- इसकी वजह यही रही है.

(लेखक प्रतिष्ठित और पुरस्कृत इज़रायली पत्रकार हैं और ‘+972 मैगज़ीन’ नाम के डिजिटल मीडिया आउटलेट के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं. +972 मैगज़ीन इज़रायली और फिलिस्तीनी पत्रकारों का साझा उपक्रम है.)

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