ज़मानत पर बाहर आए आतंक के आरोपी की ‘जीपीएस ट्रैकर’ से निगरानी करेगी जम्मू-कश्मीर पुलिस

जम्मू-कश्मीर पुलिस की राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) के अधिकारियों ने ज़मानत पर छूटे आतंक के आरोपियों की निगरानी के लिए जीपीएस ट्रैकर एंकलेट पेश की है, जिसे उन्हें पायल की तरह पैरों में पहनाया जाएगा. अधिकारियों ने बताया कि जम्मू कश्मीर ऐसा करने वाला देश का पहला पुलिस बल बन गया है.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: ट्विटर/@JmuKmrPolice)

जम्मू-कश्मीर पुलिस की राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) के अधिकारियों ने ज़मानत पर छूटे आतंक के आरोपियों की निगरानी के लिए जीपीएस ट्रैकर एंकलेट पेश किया है, जिसे उन्हें पायल की तरह पैरों में पहनाया जाएगा. अधिकारियों ने बताया कि जम्मू कश्मीर ऐसा करने वाला देश का पहला पुलिस बल बन गया है.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: ट्विटर/@JmuKmrPolice)

नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर पुलिस ने जमानत पर छूटे आतंक के आरोपियों की निगरानी के लिए जीपीएस ट्रैकर पेश किया है, जो पायल की तरह उनके पैरों में पहनाया जाएगा. जीपीएस ट्रैकर एंकलेट एक पहनने योग्य उपकरण है, जिसे व्यक्ति के टखने के चारों ओर चिपका दिया जाता है और उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाती है.

अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि जम्मू कश्मीर ऐसा करने वाला देश का पहला पुलिस बल बन गया है.

समाचार वेबसाइट एनडीटीवी में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, इस उपकरण का उपयोग पहले से ही अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे पश्चिमी देशों में जमानत, पैरोल और घर में नजरबंदी पर आरोपी व्यक्तियों की गतिविधियों पर नजर रखने और जेलों में भीड़भाड़ को काफी हद तक कम करने के लिए किया जा रहा है.

अधिकारियों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस की राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) के अधिकारियों ने जमानत पर छूटे आतंक के आरोपियों की निगरानी के लिए जीपीएस ट्रैकर एंकलेट पेश किया है.

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर पुलिस इस तरह का उपकरण पेश करने वाला देश का पहला पुलिस विभाग है.

अधिकारियों ने कहा कि इन उपकरणों को विशेष एनआईए अदालत, जम्मू द्वारा एक आदेश पारित करने के बाद पेश किया गया था, जिसमें पुलिस को आतंक के एक आरोपी पर जीपीएस ट्रैकर एंकलेट लगाने का निर्देश दिया गया था – जिसके महत्व पर पुलिस के अभियोजन विभाग ने प्रकाश डाला था.

मामले की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने कहा कि यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एक एफआईआर में आरोपी गुलाम मोहम्मद भट ने जमानत के लिए आवेदन किया था.

जमानत पर सुनवाई लंबित रहने के दौरान आरोपी ने अंतरिम जमानत पर रिहा करने की मांग की थी. अधिकारियों ने बताया कि आरोपी पर विभिन्न आतंकवादी संगठनों से जुड़े होने और प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के इशारे पर आतंक के वित्तपोषण में शामिल होने का मुकदमा चल रहा है.

वर्तमान एफआईआर में भट को हिजबुल मुजाहिदीन के आदेश पर आतंकवाद की आय को 2.5 लाख रुपये तक ले जाने का प्रयास करते समय गिरफ्तार किया गया था.

अधिकारियों ने बताया कि आरोपी को एक अन्य मामले में आतंकवादी संगठन से जुड़े होने और आतंकी कृत्य की साजिश रचने के आरोप में एनआईए कोर्ट, दिल्ली की पटियाला हाउस ने भी दोषी ठहराया है.

अधिकारियों ने कहा कि विशेष जोनल पुलिस मुख्यालय (जेडपीएचक्यू), जम्मू के अभियोजन विभाग द्वारा एनआईए अदालत, जम्मू में आतंक के आरोपियों की कड़ी निगरानी और यूएपीए के तहत जमानत देने की कड़ी शर्तों के महत्व पर प्रकाश डाला गया था.

उन्होंने कहा, ‘अभियोजन पक्ष की दलीलों में योग्यता पाते हुए विशेष एनआईए अदालत, जम्मू ने एक आदेश पारित करते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस को आरोपी पर जीपीएस ट्रैकर एंकलेट लगाने का निर्देश दिया.’

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