इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में श्मशान घाटों की ख़राब स्थिति को लेकर चिंता जताई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जनसंख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, लेकिन दाह संस्कार स्थलों पर बुनियादी ढांचे का विकास कछुआ गति से किया जा रहा है. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आम लोग उचित सुविधाएं पाने के लिए जीवन भर संघर्ष करते हैं और अंतिम सांस के बाद भी उचित दाह संस्कार की सुविधा पाने से वंचित रह जाते हैं.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट. (फोटो साभार: विकिपीडिया/Vroomtrapit)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जनसंख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, लेकिन दाह संस्कार स्थलों पर बुनियादी ढांचे का विकास कछुआ गति से किया जा रहा है. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आम लोग उचित सुविधाएं पाने के लिए जीवन भर संघर्ष करते हैं और अंतिम सांस के बाद भी उचित दाह संस्कार की सुविधा पाने से वंचित रह जाते हैं.

इलाहाबाद हाईकोर्ट. (फोटो साभार: विकिपीडिया/Vroomtrapit)

नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में श्मशान घाटों की खराब स्थितियों को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की है.

जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने राजेंद्र कुमार बाजपेयी द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, ‘हमें कोविड-19 महामारी के चरम के दौरान भयावह स्थिति का सामना करना पड़ा है, जब दाह संस्कार केंद्रों पर बुनियादी ढांचे की गंभीर कमी के कारण हम दिवंगत लोगों के शवों का उचित दाह संस्कार करने में असमर्थ थे.’

हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट की पीठ ने कहा, ‘जनसंख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, लेकिन दाह संस्कार स्थलों पर बुनियादी ढांचे का विकास कछुआ गति से किया जा रहा है. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आम लोग उचित सुविधाएं पाने के लिए जीवन भर संघर्ष करते हैं और अंतिम सांस के बाद भी उचित दाह संस्कार की सुविधा पाने से वंचित रह जाते हैं.’

अदालत ने कहा, ‘इस स्तर पर हम एक ट्रिलियन अर्थव्यवस्था हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अभी भी दाह संस्कार केंद्रों पर उचित सुविधाएं देने में असमर्थ हैं.’

कोर्ट ने आदेश दिया कि राज्य सरकार इस संबंध में ठोस कदम उठाए.

तदनुसार, अदालत ने अतिरिक्त महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी को इस आदेश के बारे में अतिरिक्त मुख्य सचिव (पंचायती राज) के साथ-साथ अतिरिक्त मुख्य सचिव (शहरी विकास) जैसे नए पक्षकार अधिकारियों और जरूरत पड़ने पर राज्य के मुख्य सचिव को सूचित करने का निर्देश दिया.

इससे पहले राज्य भर में श्मशानों/अंतिम संस्कार स्थलों की जीर्ण-शीर्ण स्थितियों, जिनमें बुनियादी सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की कमी है, पर विचार करते हुए अदालत ने कुछ निर्देश पारित किए थे.

अदालत के आदेश के क्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के सचिव नगर विकास की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया, जिसे कोर्ट ने रिकॉर्ड पर ले लिया था.

हालांकि, राज्य के वकील के अनुरोध पर अदालत ने बीते 18 दिसंबर के अपने आदेश में इस मामले को आगे की सुनवाई के लिए 18 जनवरी 2024 को नए सिरे से रखने का निर्देश दिया.

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