भारत-मालदीव विवाद की जड़ कहां है?

मालदीव के मंत्रियों द्वारा भारत के प्रधानमंत्री को लेकर की गईं अपमानजनक टिप्पणियां कोई फौरी प्रतिक्रिया थीं या इनकी वजह कहीं गहरी है?

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मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू. (फोटो साभार: X/@presidencymv)

मालदीव के मंत्रियों द्वारा भारत के प्रधानमंत्री को लेकर की गईं अपमानजनक टिप्पणियां कोई फौरी प्रतिक्रिया थीं या इनकी वजह कहीं गहरी है?

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू. (फोटो साभार: X/@presidencymv)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लक्षद्वीप के दौरे पर गए थे. सोशल मीडिया पर लक्षद्वीप की सुंदरता की एक से बढ़कर एक तस्वीर साझा कर रहे थे. बड़ी सोच-समझकर और सावधानी से ली गई तस्वीर थी नहीं तो लक्षद्वीप का पर्यावरण, जो कोरल रीफ पर टिका हुआ है, उसकी दुर्दशा भी तस्वीरों के जरिये सामने आ जाती. नरेंद्र मोदी की तो यह खूबी रही है कि वह कामकाज पर कम और छवियों के जरिये प्रचार-प्रसार पर ज्यादा भरोसा करते हैं तो वह इसे कहां छोड़ने वाले थे. तो लक्षद्वीप की सुंदरता के फैलाव में अपनी ऐसी तस्वीरें साझा कर रहे थे, जो नरेंद्र मोदी को एक नेता के तौर पर नहीं महामानव की तरफ पेश करें. भोली-भाली जनता देखे तो अपने नेता की छवियों के नशे में डूब जाए.

एक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि जो रोमांचकारी जीवन में दिलचस्पी रखते हैं, उनकी यात्राओं की लिस्ट में लक्षद्वीप जरूर होना चाहिए. किसी सोशल मीडिया यूजर ने पीएम मोदी से ही पूछ लिया कि जिस भारत की प्रति व्यक्ति आमदनी 9-10,000 रुपये के बीच में झूल रही है उसमें कितने लोग रोमांचकारी जीवन में दिलचस्पी रखते होंगे.

इसी तरह से लक्षद्वीप के कई पर्यटन स्थल की तस्वीर साझा कर लक्षद्वीप के पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कर रहे थे. तस्वीर लक्षद्वीप की साझा हो रही थी. तो लक्षद्वीप की सुंदरता पर अभिभूत होकर उसकी प्रशंसा करनी चाहिए थी. कइयों ने ऐसा किया भी.

मगर कुछ सोशल मीडिया यूजर लक्षद्वीप की सुंदरता का बखान करने के साथ-साथ मालदीव का विरोध करने लगे. पर्यटन के तौर पर मालदीव न जाने की हिदायत देने लगे, मसलन- हम अपना पैसा उस देश में जाकर खर्च क्यों करें, जहां पर भारत विरोधी सरकार है, अच्छा हो कि हम अपने ही देश की सुंदरता की तरफ बढ़े. किसी ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि मालदीव को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए. आने वाले 100 साल में ही इस देश का अस्तित्व खत्म हो जाएगा.

इसके बाद मालदीव सरकार के मंत्रियों ने अनाप-शनाप बोलना शुरू किया. पीएम मोदी की तस्वीरों पर मालदीव सरकार में मंत्री मरियम शिउना ने आपत्तिजनक ट्वीट किए. शिउना ने पीएम मोदी को इज़रायल से जोड़ते हुए निशाने पर लिया था. मालदीव के नेता जाहिद रमीज ने लिखा कि बेशक ये अच्छा कदम है, लेकिन भारत कभी हमारी बराबरी नहीं कर सकता. मालदीव टूरिस्ट को जो सर्विस देता है वो भारत कैसे देगा. वो इतनी सफाई कैसे रख पाएगा. उनके कमरों से बदबू आती है जो टूरिस्ट की बड़ी दिक्कत है.

संक्षेप में समझें, तो पीएम मोदी के लक्षद्वीप के तस्वीरों के जवाब में मालदीव के समर्थकों की तरफ से अंधराष्ट्रवादी किस्म का अभियान छिड़ गया. जब मालदीव में अभियान छिड़ गया तो भारत के अंधराष्ट्रवादी कहां पीछे रहने वाले थे. इधर से भी अनाप-शनाप बोले जाने लगा और सोशल मीडिया पर बॉयकॉट मालदीव ट्रेंड होने लगा. अक्सर मालदीव जाने वाले अभिनेता-अभिनेत्री, सेलेब्रिटीज़ अक्सर मालदीव जाया करते हैं, उन्हें काम भी लगा दिया गया. कमोबेश ट्वीट की एक ही शैली में कइयों ने मालदीव का विरोध किया.

उधर, मालदीव की सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक कमेंट करने वाले तीनों मंत्रियों को सस्पेंड करते हुए कि कहा कि लोकतंत्र में सबको अपनी बात रखने का हक है, मगर अपनी बात जिम्मेदारी के साथ रखनी चाहिए.

इस पूरे मामले में यह तो साफ दिखता है कि मालदीव के मंत्रियों ने भारत सरकार को लेकर जिस तरह की टिप्पणी की वह बिल्कुल गलत थी. मगर सवाल यह बनता है कि क्या यह गलत बात केवल एक पोस्ट का नतीजा है?

जवाब है नहीं, यह केवल कुछ पोस्ट के खिलाफ दी गई प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि यह मालदीव में फैली भारत विरोधी भावनाओं की अभिव्यक्ति है. तो अब सवाल यह है कि मालदीव में भारत विरोधी भावनाएं क्यों फैली हुई हैं?

भारत के दक्षिण पश्चिम में हिंद महासागर में स्थित मालदीव 1,952 द्वीपों का एक समूह है. तकरीबन 200 द्वीपों पर इंसानी आबादी रहती है. यानी ज़्यादातर द्वीपों में कोई नहीं रहता है. मालदीव का क्षेत्रफल 300 वर्ग किलोमीटर है. यानी आकार में दिल्ली से क़रीब पांच गुना छोटा है. मालदीव की आबादी चार लाख के आसपास है. इस आबादी में तकरीबन 99 फीसदी आबदी इस्लाम धर्म को मानती है. इस्लाम केवल आस्था तक ही सीमित नहीं है बल्कि मालदीव का स्टेट रिलिजन है.

केरल के कोच्चि से 800 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मालदीव की जीडीपी का तकरीबन 20% हिस्सा सीधे तौर पर पर्यटन से जुड़ा हुआ है. कुछ लोग तो कहते हैं कि अगर पर्यटन के अप्रत्यक्ष हिस्से को भी जोड़ दिया जाए तो जीडीपी का तकरीबन 80% हिस्सा केवल पर्यटन से जुड़ा हुआ है. उसमें भी भारत से जाने वाले पर्यटकों की संख्या सबसे ज्यादा है. इसीलिए जब मालदीव के मंत्रियों की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर फ़िज़ूल बयान दिए गए और भारत में बॉयकॉट मालदीव ट्रेंड करने लगा तो मालदीव के पर्यटन उद्योग संबंधित लोगों ने भी उनके मंत्रियों की टिप्पणियों की निंदा की.

साल 1965 में मालदीव को आजादी मिली थी, तब से लेकर साल 2013 तक मालदीव और भारत के संबंध बहुत अच्छे रहे हैं. 1988 में तो मालदीव के बिजनेसमैन और श्रीलंकाई तमिल लड़ाके मिलकर के तख्तापलट करना चाहते थे. भारत ने सेना भेजकर मदद की थी. इस ऑपरेशन कैक्टस का नाम दिया जाता है.

साल 2008 में मोहम्मद नासीद मालदीव के राष्ट्रपति बने. उनके दौर में भारत ने मालदीव की अच्छी खासी सैन्य सहायता की. उसके बाद 2013 में अब्दुल्ला अमीन राष्ट्रपति बनकर आए. उसके बाद मालदीव की चीन से नजदीकियां बढ़ने लगी. चीन के साथ मालदीव ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किया. चीन की कई कंपनियों ने आकर मालदीव में निवेश किया. उसके बाद साल 2018 में इब्राहिम सोलिह की सरकार आई. इस दौरान भारत और मालदीव की नजदीकियां पहले से भी ज्यादा अच्छे तरीके से बढ़ने लगी. इब्राहिम सोलिह की सरकार का भारत की तरफ झुकाव था. भारत के मालदीव के कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में निवेश किया. उसके बाद साल 2023 में मोहम्मद मुइज़्ज़ू की सरकार आई है.

इस सरकार के भारत से रिश्ते का हाल यह है कि मुइज्जू सरकार के जिन लोगों को सत्ता मिली है, उन लोगों ने सत्ता ही स्थानीय मुद्दों के साथ भारत विरोधी भावनाओं को बेचकर हथियाई है. मतलब इब्राहिम सोलिह के 2018 के दौर के बाद सरकारी स्तर पर मालदीव और भारत की नजदीकियां बढ़ रही थी मगर वहां विपक्ष भारत विरोधी भावनाओं पर सवारी कर राजनीति कर रहा था.

फ्रंटलाइन में आरके राधाकृष्णन लिखते हैं कि साल 2020 से मालदीव में सत्ता हथियाने के लिए विपक्षी पार्टियों की तरफ से भारत विरोधी अभियान चलने लगा. ‘इंडिया आउट’ का नारा दिया, जिससे आशय यह था कि मालदीव में भारत की तरफ से जो सैन्य तैनाती है उसे हटाया जाए. शुरुआत में इस अभियान ने कोई बहुत बड़ी सफलता हासिल नहीं की. मगर 2022 के बाद स्थितियां बदली.

तकरीबन 100% सुन्नी मुसलमान वाले देश में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के निर्देश पर मालदीव की राजधानी माले में मौजूद हाई कमीशन ने बहुत बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए आयोजन किया. जिस स्टेडियम में आयोजन हुआ, उस स्टेडियम पर भीड़ ने धावा बोल दिया. भीड़ को काबू में करने के लिए आंसू गैस छोड़नी पड़ी. सबसे बड़ी बात यह की प्रदर्शनकारियों ने यह घोषणा करते हुए तख्तियां लहराई कि योग इस्लाम के खिलाफ है.

यहां भारत सरकार की पड़ोसियों के साथ रिश्ता स्थापित करने की विदेश नीति की दूरदर्शिता की कमजोरी उजागर हो गई. 2020 के बाद से जो भारत विरोधी माहौल बन रहा था उसको साल 2022 कि इस घटना से बहुत ज्यादा मजबूती मिल गई. साल 2023 के चुनाव में भारत विरोधी अभियान वृहद हो गया. फ्रंटलाइन के मुताबिक, मालदीव के एक राजनीतिक प्रतिनिधि का कहना है कि 2023 के चुनाव में विपक्षी दलों ने भारत में हुई मुस्लिम प्रताड़ना की हर एक घटना को चुनावी मुद्दे की तरह पेश किया. मालदीव के स्थानीय मुद्दों, सोलिह सरकार की नाकामी और भ्रष्टाचार के साथ भारत विरोधी लहर ने मिलकर के वह माहौल बनाया जिसकी वजह से डॉक्टर मोहम्मद मुइज्जे की सरकार बनी. उन्हें कुल मतों में से 54% प्रतिशत वोट मिले है. मतलब मालदीव इतनी बड़ी आबादी कहीं न कहीं भारत विरोधी भावनाओं के साथ खुद को जुड़ा हुआ महसूस करती है.

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