हेमंत सोरेन से ईडी की पूछताछ के दौरान निषेधाज्ञा उल्लंघन के आरोप सीआरपीएफ के ख़िलाफ़ एफ़आईआर

झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा ने आरोप लगाया था कि सीआरपीएफ जवानों ने बिना अनुमति के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास में प्रवेश की कोशिश की थी, जब उनसे ईडी द्वारा पूछताछ की जा रही थी. वहीं, सीआरपीएफ अधिकारियों ने कहा कि बंगाल में ईडी अधिकारियों पर हमले को लेकर जवानों की तैनाती की गई थी.

/
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन. (फोटो साभार: फेसबुक/@HemantSorenJMM)

झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा ने आरोप लगाया था कि सीआरपीएफ जवानों ने बिना अनुमति के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास में प्रवेश की कोशिश की थी, जब उनसे ईडी द्वारा पूछताछ की जा रही थी. वहीं, सीआरपीएफ अधिकारियों ने कहा कि बंगाल में ईडी अधिकारियों पर हमले को लेकर जवानों की तैनाती की गई थी.

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन. (फोटो साभार: फेसबुक/@HemantSorenJMM)

नई दिल्ली: झारखंड के सत्तारूढ़ गठबंधन में से एक झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) द्वारा रविवार (21 जनवरी) को सीआरपीएफ के खिलाफ ‘ज्यादती’ करने के लिए ‘सख्त कानूनी कार्रवाई’ की मांग करने के कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने प्रशासन के निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के आरोप में सीआरपीएम के 500 कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की.

झामुमो ने आरोप लगाया था कि सीआरपीएफ के लगभग 500 जवानों ने बिना किसी अनुमति के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के घर में प्रवेश करने की कोशिश की थी, जब उनसे ईडी द्वारा पूछताछ की जा रही थी.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी ने दावा किया था कि सीआरपीएफ द्वारा मुख्यमंत्री आवास में घुसने की कोशिश करना अवैध है और यह सोरेन के समर्थकों को उकसाने का प्रयास है, जो पहले से ही पास में प्रदर्शन कर रहे थे.

शिकायत पर प्रतिक्रिया करते हुए जिला प्रशासन ने सीआरपीसी की धारा 144 के उल्लंघन के लिए सीआरपीएफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जो मुख्यमंत्री आवास के आसपास लगाई गई थी.

झामुमो ने आरोप लगाया था कि जिला प्रशासन की अनुमति के बिना 10 बसों में सीआरपीएफ जवानों ने उच्च सुरक्षा वाले मुख्यमंत्री आवास में घुसने की कोशिश की, उन्होंने कहा कि जवानों की सोरेन के समर्थकों के साथ झड़प भी हुई थी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सात घंटे से अधिक समय तक पूछताछ के एक दिन बाद रविवार शाम को आईपीसी की धारा 188 (लोक सेवक द्वारा आदेश की अवज्ञा), 353 (लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल) और अन्य धाराओं के तहत यह एफआईआर दर्ज की गई है.

रांची के एसपी चंदन सिन्हा ने कहा, ‘शनिवार (20 जनवरी) को जब मुख्यमंत्री सोरेन से पूछताछ की गई तो रांची में कानून-व्यवस्था की स्थिति की देखरेख करने वाले एक ड्यूटी मजिस्ट्रेट के कहने पर हमने रविवार को एफआईआर दर्ज की. आरोप है कि सीआरपीएफ की तैनाती के लिए (रांची) जिला प्रशासन से कोई तालमेल नहीं था. इसके अलावा, सीआरपीएफ कर्मचारियों ने निषेधाज्ञा (धारा 144 सीआरपीसी) का उल्लंघन किया.

पार्टी महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य और विनोद पांडे द्वारा हस्ताक्षरित एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि अगर झामुमो कार्यकर्ताओं ने संयम नहीं दिखाया होता तो हिंसक स्थिति पैदा हो सकती थी.

विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया है, ‘यह कृत्य एक पूर्व-निर्धारित साजिश थी. यह केंद्र सरकार के इशारे पर है, जो राज्य सरकार को अस्थिर करने का प्रयास है और संघीय ढांचे पर कायरतापूर्ण हमला है.’

मुख्यमंत्री के 500 से अधिक समर्थक सीएम आवास के बाहर बैठे रहे, जिनमें धनुष-बाण लिए लोग भी शामिल थे, लेकिन उनके खिलाफ निषेधाज्ञा के उल्लंघन पर कोई जिक्र नहीं आया है.

नाम न छापने की शर्त पर सीआरपीएफ के एक अधिकारी ने अखबार को बताया, ‘हम ईडी के आदेश पर वहां थे और उन्होंने हमें लिखित में दिया था. इसमें इससे अधिक कुछ नहीं है.’

इंडिया टुडे के अनुसार, सीआरपीएफ अधिकारियों ने इस कदम का विरोध करते हुए कहा कि पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में टीएमसी नेताओं पर छापेमारी के दौरान ईडी अधिकारियों पर हमलों के मद्देनजर भारी संख्या में बलों की तैनाती के साथ क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी.

जांच एजेंसी के अधिकारी पूछताछ के लिए शनिवार दोपहर करीब एक बजे मुख्यमंत्री सोरेन के आवास पर पहुंचे थे, जो भारी सुरक्षा बलों की तैनाती के कारण एक किले में तब्दील हो गया था और सात घंटे से अधिक समय के बाद रात करीब 8:30 बजे वहां से निकले थे.

सोरेन ने पहले ईडी के सात समन को नजरअंदाज कर दिया था और आठवें समन भेजे जाने पर पूछताछ के लिए अपनी सहमति दी थी.

इसी बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा, ‘सीआरपीएफ कर्मचारी, ईडी अधिकारियों की सुरक्षा और उन्हें तीर-धनुष से लैस भाड़े के लोगों से बचाने के लिए आए थे. केंद्रीय एजेंसी और केंद्रीय सुरक्षा बलों को डराने के लिए पुलिस शक्ति का दुरुपयोग करने का यह प्रयास महंगा साबित होगा.’

ईडी ने हेमंत सोरेन को नया समन जारी किया

इस बीच ईडी ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को नया समन जारी किया है, जिसमें उन्हें कथित भूमि घोटाले में एजेंसी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के संबंध में आगे की पूछताछ के लिए 27 और 31 जनवरी को उसके सामने पेश होने के लिए कहा गया है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी ने कहा है कि एजेंसी को रांची में 7.16 एकड़ भूमि के स्वामित्व से जुड़े कथित घोटाले की जांच से संबंधित मामले पर स्पष्टीकरण की आवश्यकता है.

यह जमीन कथित तौर पर सेना की जमीन की अवैध बिक्री से जुड़े अपराध की आय के माध्यम से हासिल की गई थी. सोरेन ने कहा है कि मामला अस्पष्ट है और उनकी संपत्ति का विवरण सार्वजनिक कर दिया गया है.

एजेंसी ने इस मामले में 14 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें नौकरशाह छवि रंजन और व्यवसायी अमित अग्रवाल और बिष्णु अग्रवाल शामिल हैं, जो रांची में शॉपिंग मॉल के मालिक हैं.

शनिवार को सोरेन ने अपने समर्थकों से कहा कि वे राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष को एकजुट करते हुए आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘आपको डरने की जरूरत नहीं है. अपना मनोबल ऊंचा रखें. मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आपका नेता हम पर चलाई गई पहली गोली खाएगा.’