128 बुलडोज़र कार्रवाइयों में मुसलमान थे निशाना, 600 से अधिक प्रभावित हुए: एमनेस्टी रिपोर्ट

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भारत में होने वाली ‘बुलडोज़र कार्रवाइयों’ को लेकर दो रिपोर्ट जारी करते हुए मुस्लिमों के घरों, कारोबार और उपासना स्थलों के व्यापक और ग़ैर-क़ानूनी विध्वंस को तत्काल रोकने का आह्वान किया है. रिपोर्ट बताती है कि भाजपा शासित मध्य प्रदेश में ‘सज़ा के तौर’ पर सर्वाधिक 56 बुलडोज़र कार्रवाइयां हुईं.

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जुलाई 2023 में हरियाणा के नूंह में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद क्षेत्र में हुई ध्वस्तीकरण कार्रवाई. (फोटो: द वायर)

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भारत में होने वाली ‘बुलडोज़र कार्रवाइयों’ को लेकर दो रिपोर्ट जारी करते हुए मुस्लिमों के घरों, कारोबार और उपासना स्थलों के व्यापक और ग़ैर-क़ानूनी विध्वंस को तत्काल रोकने का आह्वान किया है. रिपोर्ट बताती है कि भाजपा शासित मध्य प्रदेश में ‘सज़ा के तौर’ पर सर्वाधिक 56 बुलडोज़र कार्रवाइयां हुईं.

जुलाई 2023 में हरियाणा के नूंह में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद क्षेत्र में हुई ध्वस्तीकरण कार्रवाई. (फोटो: द वायर)

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भारत में मुस्लिमों के घरों, कारोबारों और उपासना स्थलों के व्यापक और गैरकानूनी विध्वंस को तत्काल रोकने का आह्वान किया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन ने बुधवार (7 फरवरी) को दो रिपोर्ट- ‘इफ यू स्पीक अप, योर हाउस विल बी डेमॉलिश्ड: बुलडोज़र इनजस्टिस इन इंडिया’ (अगर आप आवाज़ उठाएंगे, तो आपका घर गिरा दिया जाएगा: भारत में बुलडोजर अन्याय) और ‘अनअर्दिंग एकाउंटेबिलिटी: जेसीबीज़ रोल एंड रेस्पॉन्सिबिलिटी इन बुलडोज़र इनजस्टिस इन इंडिया’ (भारत के बुलडोजर अन्याय में जेसीबी की भूमिका और जिम्मेदारी) जारी की हैं.

रिपोर्ट में भारत के कम से कम पांच राज्यों में जेसीबी-ब्रांड के बुलडोजर का इस्तेमाल करके मुस्लिम स्वामित्व वाली संपत्तियों को सजा के तौर पर ध्वस्त करने की कार्रवाइयों को दर्ज करते हुए इसे ‘अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ घृणा अभियान’ कहा गया है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल के महासचिव एग्नेस कैलामार्ड ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, ‘भारतीय अधिकारियों द्वारा मुस्लिम संपत्तियों का गैरकानूनी विध्वंस, जिसे ‘बुलडोजर न्याय’ कहा जाता है, क्रूर और भयावह है. इस तरह का विस्थापन और बेदखली बेहद अन्यायपूर्ण, गैरकानूनी और भेदभावपूर्ण है. वे परिवारों को तबाह कर रहे हैं और उन्हें तुरंत रुकना चाहिए.’

संगठन ने एक प्रेस नोट जारी करते सरकार से आग्रह किया कि वह ‘न्यायेतर सजा जे तौर पर लोगों के घरों को ढहाने करने के चलन को तुरंत रोकें और सुनिश्चित करें कि जबरन बेदखली के चलते कोई भी बेघर न हो.’ साथ ही संगठन ने कहा है कि विध्वंस कार्रवाइयों से प्रभावित सभी लोगों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए.

एमनेस्टी की पड़ताल के अनुसार, अप्रैल और जून 2022 के बीच पांच राज्यों में सरकारी अधिकारियों ने सांप्रदायिक हिंसा या भेदभाव के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बाद ‘सजा’ तौर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की.

रिपोर्ट में जिन 128 घटनाओं का विवरण दिया गया है, उसमें जेसीबी कंपनी के बुलडोज़र के इस्तेमाल के कम से कम 33 उदाहरण हैं. बताया गया है कि इन कार्रवाइयों के चलते 617 व्यक्ति प्रभावित हुए, जो या तो बेघर हो गए या अपनी आजीविका गंवा बैठे.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भाजपा शासित मध्य प्रदेश में ‘सजा के तौर’ पर सर्वाधिक 56 बुलडोज़र कार्रवाइयां हुईं.

रिपोर्ट के अनुसार, अक्सर अवैध निर्माण को हटाने की आड़ में की जाने वाली ध्वंस कार्रवाई और तोड़फोड़ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून में उल्लिखित उचित प्रक्रिया के उल्लंघन में होती है. उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया है कि तोड़फोड़ की इन कार्रवाइयों में मुस्लिम बहुल इलाकों को निशाना बनाया गया, जहां मुस्लिम-स्वामित्व वाली संपत्तियों को चुनिंदा तौर पर गिराया गया और आस-पास की हिंदू-स्वामित्व वाली संपत्तियां अछूती रहीं.

इसके साथ ही इन कार्रवाइयों में इस्तेमाल किए जाने वाले जेसीबी बुलडोजर एक पसंदीदा ब्रांड बन गए हैं, जिसकी कंपनी को दक्षिणपंथी मीडिया और नेता ‘जिहादी कंट्रोल बोर्ड’ जैसे नामों से पुकारते दिख रहे हैं.

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पहले इस मामले को लेकर जेसीबी को लिखा था. जवाब में कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि उनके उत्पादों का इस्तेमाल कैसे किया जाता है, इस पर उनका कोई नियंत्रण या जिम्मेदारी नहीं है.

हालांकि, एमनेस्टी का कहना है कि व्यापार और मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार, जेसीबी की ज़िम्मेदारी है कि वह मानवाधिकारों का सम्मान करे और इसके संचालन से जुड़े प्रतिकूल मानवाधिकार प्रभावों को पहचानने, रोकने और कम करने के लिए उचित काम करे.

कैलामार्ड ने कहा, ‘ अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत जेसीबी यह पता लगाने के लिए ज़िम्मेदार है कि तीसरे पक्ष के खरीदार उसके उपकरणों के साथ क्या करते हैं. कंपनी को नज़रें फेरना बंद करना चाहिए क्योंकि जेसीबी मशीनों का इस्तेमाल मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने और सजा देने के लिए किया जाता है, वहीं लोग इन बुलडोज़रों पर चढ़कर मुस्लिम विरोधी नारे लगाते हैं. जब इसकी मशीनों का इस्तेमाल बार-बार मानवाधिकारों के हनन के लिए किया जा रहा है, जेसीबी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती.’