महिला हॉकी टीम की कोच ने कहा- ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ कि यहां मुझे महत्व या सम्मान दिया गया

भारतीय महिला हॉकी टीम की नीदरलैंड मूल की कोच यानेक शॉपमैन ने कहा है कि भारत महिलाओं के लिए एक मुश्किल देश है. उन्होंने ​कहा कि हॉकी इंडिया द्वारा उन्हें अहमियत और सम्मान नहीं दिया जाता है. शॉपमैन ने टीम की पहली महिला कोच के रूप में क़रीब ढाई साल पहले पदभार संभाला था.

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यानेक शॉपमैन. (फोटो साभार: फेसबुक/Hockey India)

भारतीय महिला हॉकी टीम की नीदरलैंड मूल की कोच यानेक शॉपमैन ने कहा है कि भारत महिलाओं के लिए एक मुश्किल देश है. उन्होंने ​कहा कि हॉकी इंडिया द्वारा उन्हें अहमियत और सम्मान नहीं दिया जाता है. शॉपमैन ने टीम की पहली महिला कोच के रूप में क़रीब ढाई साल पहले पदभार संभाला था.

यानेक शॉपमैन. (फोटो साभार: फेसबुक/Hockey India)

नई दिल्ली: भारतीय महिला हॉकी टीम की पहली महिला कोच यानेक शॉपमैन उस वक्त फूट पड़ीं, जब उन्होंने अपने ढाई साल के कार्यकाल के दौरान सामने आईं रोजमर्रा की चुनौतियों के बारे में खुलकर बात की. दुख के साथ उन्होंने कहा कि ‘यह देश एक महिला के लिए बहुत मुश्किल भरा है.’

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता रहीं शॉपमैन ने दावा किया कि उन्होंने ‘पिछले दो वर्षों में बहुत अकेला’ महसूस किया, उनके नियोक्ता हॉकी इंडिया द्वारा उन्हें ‘अहमियत और सम्मान’ नहीं दिया गया और साथ ही उन्होंने पुरुषों की तुलना में महिला टीम के प्रति भेदभावपूर्ण व्यवहार पर निशाना साधा.

46 वर्षीय शॉपमैन ने आगे कहा कि उन्हें ‘राष्ट्रमंडल खेलों के बाद ही पद छोड़ देना चाहिए था, क्योंकि उनके लिए इसे संभालना बहुत कठिन था’, हालांकि उन्हें वहां रुकने का ‘कोई पछतावा नहीं’ है.

हॉकी इंडिया में अधिकारियों के साथ काम करने के बारे में बात करते हुए शॉपमैन ने कहा, ‘बहुत मुश्किल. बहुत मुश्किल. क्योंकि, आप जानते हैं, मैं उस संस्कृति से आती हूं, जहां महिलाओं का सम्मान किया जाता है और उन्हें महत्व दिया जाता है. मैं यहां वैसा महसूस नहीं करती हूं.’

रविवार (18 फरवरी) को ओडिशा के राउरकेला स्थित बिरसा मुंडा स्टेडियम में एफआईएच प्रो लीग मैच में भारत ने अमेरिका को टाई-ब्रेकर में हरा दिया था, जिसके बाद बात करते हुए नीदरलैंड की शॉपमैन ने ये बातें कहीं.

जब उनसे टीम के साथ उनके भविष्य के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया, ‘(भविष्य) हो सकता है, इस तथ्य के बावजूद कि मुझे पता है कि यह कठिन है. लेकिन जैसा कि मैंने कहा, मुझे लड़कियों से प्यार है और मैं उनमें बहुत संभावनाएं देखती हूं. लेकिन एक व्यक्ति के तौर पर मेरे लिए यह बहुत मुश्किल है.’

बता दें कि तीन साल पहले टोक्यो ओलंपिक में चौथे स्थान पर रहने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने में असफल रही है.

शॉपमैन जनवरी 2020 में तत्कालीन मुख्य कोच शोर्ड मारिन के स्टाफ में एक एनालिटिकल कोच के रूप में शामिल हुई थीं. शॉपमैन ने कहा कि उसी क्षण से वह ऐसा महसूस नहीं करती हैं कि इस खेल को चलाने वाले लोग उन्हें कोई अहमियत भी देते हैं.

उन्होंने कहा, ‘यहां तक कि जब मैं सहायक कोच थी, तब कुछ लोग मेरी ओर देखते भी नहीं थे या मुझे स्वीकारते नहीं थे या प्रतिक्रिया नहीं देते थे और फिर आप मुख्य कोच बन जाते हैं और अचानक लोग आपमें रुचि लेने लगते हैं. मैंने उस स्थिति से बहुत संघर्ष किया.’

मारिन ने टोक्यो ओलंपिक के तुरंत बाद पद छोड़ दिया था और उस समय तैयार की गई उत्तराधिकार योजना के अनुसार, शॉपमैन – जो पहले अमेरिका की कोच थीं – ने पदभार संभाला. उन्होंने दावा किया कि तब भी उनकी राय को महत्व नहीं दिया गया और उन्हें ज्यादा समर्थन नहीं मिला.

शॉपमैन ने कहा, ‘मैं इस अंतर को देखती हूं कि पुरुषों के कोच के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है… सामान्य तौर पर, मेरे और पुरुषों के कोच या महिलाओं और पुरुषों की टीम के बीच. वे कभी शिकायत नहीं करतीं और कड़ी मेहनत करती हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘नीदरलैंड से होने और अमेरिका में काम करने के बाद एक महिला के तौर पर यह देश बहुत मुश्किल है, एक ऐसी संस्कृति से आना जहां आपकी एक राय हो सकती है और इसे महत्व दिया जाता है. यह वास्तव में बहुत मुश्किल है.’

शॉपमैन ने कहा कि पिछले साल उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार तब स्पष्ट हो गया, जब पुरुष हॉकी टीम घरेलू धरती पर विश्व कप के क्वार्टर फाइनल के लिए क्वालीफाई करने में असफल रही. उस परिणाम के बाद सारा ध्यान पुरुष टीम पर था.

उन्होंने कहा, ‘मैं बस इतना जानती हूं कि जब विश्वकप पुरुष टीम के लिए अच्छा नहीं रहा तो सारा ध्यान उन पर था. फरवरी 2023 से, सारा ध्यान पुरुष टीम पर है.’

पिछले साल एशियाई खेलों में भारत के स्वर्ण पदक नहीं जीतने के बाद महासंघ के महासचिव भोला नाथ सिंह कथित तौर पर शॉपमैन को हटाना चाहते थे, लेकिन हॉकी इंडिया के अध्यक्ष और पूर्व भारतीय कप्तान दिलीप टिर्की के हस्तक्षेप के कारण ऐसा नहीं हो सका.

शॉपमैन ने कहा कि उन्हें टिर्की के साथ-साथ संगठन की सीईओ एलेना नॉर्मन से ‘बहुत समर्थन मिला’.

शॉपमैन ने किसी भी घटना के बारे में विशेष रूप से बात नहीं की, लेकिन कहा कि ‘एलेना हमेशा बहुत सहयोगी रही हैं और उन्होंने मुझे इस पद पर बनाए रखा है.’

उन्होंने कहा कि मुझे राष्ट्रमंडल खेलों के बाद चले जाना चाहिए था, क्योंकि मेरे लिए यहां रहना मुश्किल हो गया था.

यह पूछे जाने पर कि सबसे मुश्किल क्या था, उन्होंने कहा, ‘सच्चाई यह है कि मुझे लगता है कि मुझे गंभीरता से नहीं लिया जाता है – मुझे यह भी नहीं पता कि यह सही है या नहीं.’ जब और अधिक उकसाया गया और पूछा गया कि क्या यह हॉकी इंडिया के लोगों की ओर से था, तो शॉपमैन ने स्वीकृति में सिर हिलाया.

भारत के जनवरी में पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने में असफल रहने के बाद से ही शॉपमैन का भविष्य अटकलों का हिस्सा रहा है. उनका अनुबंध जुलाई-अगस्त के खेलों तक था और कैलेंडर के अनुसार भारत की अगली प्रतिस्पर्धा मई में प्रो लीग का यूरोपीय चरण है.

उन्होंने कहा कि वह आगे रहेंगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि क्या खिलाड़ी उन्हें चाहती हैं, महासंघ उन्हें रखने का इच्छुक है और क्या ‘वह स्वयं रहना चाहती हैं’.

उन्होंने कहा, ‘मेरे लिए जो वास्तव में महत्वपूर्ण है वह यह है कि ‘क्या मैं स्वयं काम कर सकती हूं’, लेकिन साथ ही, क्या मुझे वह समर्थन मिलेगा, जिसकी मुझे जरूरत है? जैसा कि मैंने कहा कि लड़कियां शानदार हैं. अगर उन्हें वास्तव में समर्थन दिया जाता है, तो मुझे लगता है कि भारतीय महिला टीम का भविष्य उज्ज्वल है.’