धर्मवीर भारती जन्म शताब्दी: वाणी प्रकाशन ने मनाया साहित्य और संस्कृति का उत्सव

वाणी प्रकाशन समूह के प्रबंध निदेशक अरुण माहेश्वरी ने कहा, 'धर्मवीर भारती की रचनाओं ने हिंदी साहित्य की आत्मा को आकार दिया है. यह शताब्दी समारोह उनकी प्रतिभा का सम्मान करने और लेखकों और पाठकों की अगली पीढ़ी को प्रेरित करने का हमारा विनम्र प्रयास है.'

धर्मवीर भारती की जन्म शताब्दी मनाने के लिए सजा वाणी का मंच

नई दिल्ली: प्रख्यात हिंदी साहित्यकार धर्मवीर भारती की जन्म शताब्दी मनाने के लिए वाणी प्रकाशन ने 16 जनवरी को मुंबई के मुक्ति ऑडिटोरियम में एक भव्य साहित्यिक और सांस्कृतिक समारोह आयोजित किया.

यह समारोह धर्मवीर भारती की विरासत का सम्मान करने के लिए साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र के दिग्गजों को एक साथ ले आया, जिन्होंने धर्मवीर भारती की ‘गुनाहों का देवता’ और ‘अंधा युग’ जैसी अमर कृतियों पर गहरा विमर्श किया.

इस श्रद्धांजलि का मुख्य आकर्षण था ‘गुनाहों का देवता’ के 164 वें संस्करण का अनावरण. धर्मवीर भारती के इस उपन्यास ने पीढ़ियों को प्रेरित किया है. यह संस्करण दिवंगत लेखक की पत्नी पुष्पा भारती को उनकी साहित्यिक विरासत को संरक्षित करने और पोषित करने में उनकी भूमिका के लिए आभार के प्रतीक के रूप में भेंट किया गया.

उत्सव की शुरुआत ‘धर्मवीर भारती कविता संगोष्ठी’ से हुई, जिसमें विष्णु शर्मा, राजेश रेड्डी, बोधिसत्व और कमलेश मलिक जैसे रचनाकार शामिल हुए, जिन्होंने भारती की काव्य प्रतिभा और इसकी कालातीत प्रासंगिकता पर विचार किया.

कार्यक्रम के दौरान वीरेंद्र वत्स की पुस्तक ‘तू जीत के लिए बना’ का लोकार्पण हुआ. उनकी कविताओं में गहरा समाज बोध और सरोकार रेखांकित होता है. इसके बाद अलका अग्रवाल सिगतिया की #मीरा_कूल का विमोचन हुआ, जिसमें शोमा घोष, राजेश्वरी सचदेव, विष्णु शर्मा, वंदना शर्मा, हेमंत झा और विवेक अग्रवाल ने चर्चा की.

इसके बाद सूर्यबाला की ‘यादों के शिलालेख’ का लोकार्पण किया गया, जिसमें सुदर्शणा द्विवेदी, हरीश पाठक, हरि मृदुल और चित्रा देसाई ने अपनी अंतर्दृष्टि प्रदान की.

इस दौरान अंबर पांडे की उपन्यास त्रयी की पहले भाग ‘मतलब हिंदू’ का लोकार्पण भी हुआ. इस उपन्यास पर प्रभात रंजन, अदिति माहेश्वरी, सत्य व्यास और प्रियंका दुबे ने एक दिलचस्प चर्चा की, जिसमें हिंदी साहित्य में परंपरा और आधुनिकता के जटिल अंतर्संबंध पर प्रकाश डाला गया.

एक अन्य सत्र में, चिन्मयी त्रिपाठी की ‘आठवें माले पर स्वाधिष्ठान’ पर अशोक मिश्रा, अनु सिंह चौधरी, जोएल मुखर्जी और यूनुस खान ने अपने विचार साझा किये.

धर्मवीर भारती की विरासत पर असगर वजाहत, अरविंद गौर, अतुल तिवारी, अरुण माहेश्वरी, पुयूष मिश्रा, विश्वनाथ सचदेव जैसे दिग्गजों ने तमाम विधाओं पर भारती के प्रभाव पर चर्चा की.

इस उत्सव का समापन ‘द लव स्टोरी ऑफ फाइव जेनरेशन’ में एक भावनात्मक पाठ के साथ हुआ. इस सत्र में प्रसिद्ध अभिनेता सीमा पाहवा, पंकज त्रिपाठी, दिव्या दत्ता, विनीत कुमार, सुतापा सिकदर, हिमानी शिवपुरी और अनूप सोनी द्वारा ‘गुनाहों का देवता’ और ‘अंधा युग’ के अंशों पर प्रदर्शन किए गए. ‘गुनाहों का देवता’ की सूत्रधार अदिति माहेश्वरी थीं और ‘अंधा युग’ के अतुल तिवारी.

वाणी प्रकाशन समूह के प्रबंध निदेशक अरुण माहेश्वरी ने कहा, ‘धर्मवीर भारती की रचनाओं ने हिंदी साहित्य की आत्मा को आकार दिया है. यह शताब्दी समारोह उनकी प्रतिभा का सम्मान करने और लेखकों और पाठकों की अगली पीढ़ी को प्रेरित करने का हमारा विनम्र प्रयास है.’

वाणी प्रकाशन की सीईओ अदिति माहेश्वरी गोयल ने कहा, ‘वाणी प्रकाशन अपने 61वें वर्ष का जश्न मना रहा है, यह उत्सव कालातीत क्लासिक्स और समकालीन आवाज़ों के बीच एक सेतु का प्रतिनिधित्व करता है, जो सुनिश्चित करता है कि भारती जी की विरासत निरंतर सहेजी जा सके.’

कार्यक्रम में धर्मवीर भारती की पत्नी पुष्पा भारती और बेटी प्रज्ञा भारती भी मौजूद थे.

25 दिसंबर को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में जन्मे धर्मवीर भारती की तमाम कृतियां, मसलन सूरज का सातवां घोड़ा, अंधा युग और युद्ध यात्रा, समय और भूगोल से परे हैं. पद्मश्री और व्यास सम्मान जैसे पुरस्कारों से सम्मानित धर्मवीर भारती का साहित्यिक योगदान हिंदी साहित्य की आधारशिला है.

धर्मवीर भारती जन्म शताब्दी महोत्सव साहित्य प्रेमियों, शिक्षाविदों और सांस्कृतिक प्रेमियों को एक साथ आने और एक साहित्यिक दिग्गज के जीवन और कार्यों का जश्न मनाने के लिए आमंत्रित करता है.