नई दिल्ली: गैर-सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की एक रिपोर्ट बताती है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 2023-24 में चुनाव या सामान्य प्रचार पर 1,754 करोड़ रुपये खर्च किए, जो उस वर्ष पार्टी के कुल खर्च का बड़ा हिस्सा था.
द हिंदू की खबर के अनुसार, इस रिपोर्ट में सभी छह राष्ट्रीय दलों की कुल आय और व्यय का विश्लेषण किया गया, जैसा कि इन पार्टियों ने चुनाव आयोग को सौंपी गई अपनी वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट में जानकारी दी है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि कांग्रेस ने चुनाव संबंधी खर्चों पर 619.67 करोड़ रुपये खर्च किए. अन्य खर्चों में भाजपा ने प्रशासनिक लागत पर 349.71 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि कांग्रेस ने प्रशासनिक और सामान्य खर्चों के लिए 340.70 करोड़ रुपये खर्च किए.
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने प्रशासनिक और सामान्य खर्चों पर अधिकतम 56.29 करोड़ रुपये खर्च किए, इसके बाद कर्मचारी लागत पर 47.57 करोड़ रुपये खर्च किए.
छह राष्ट्रीय दलों- भाजपा, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), आम आदमी पार्टी और नेशनल पीपुल्स पार्टी ने चंदे से कुल 2,669.86 करोड़ रुपये की आय घोषित की.
भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) तीनों दलों को चुनावी बॉन्ड के जरिये 2,524.13 करोड़ रुपये, यानी अपने कुल चंदे का 43.36% मिला था.
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल में इस चंदे को असंवैधानिक बताते हुए इसे तत्काल बंद करने का आदेश दिया था.
चुनावी बॉन्ड से भाजपा को सबसे ज्यादा 1,685.63 करोड़ रुपये मिले, जबकि कांग्रेस को 828.36 करोड़ रुपये और आप को 10.15 करोड़ रुपये मिले.
गौरतलब है कि सभी पार्टियों के लिए वार्षिक लेखापरीक्षित खाता (annual audited accounts) जमा करने की नियत तारीख 31 अक्टूबर, 2024 थी, लेकिन केवल बहुजन समाज पार्टी, नेशनल पीपुल्स पार्टी और आम आदमी पार्टी ने समय पर अपनी ऑडिट रिपोर्ट जमा की.
सीपीआई (एम), कांग्रेस और भाजपा ने क्रमशः 12 दिन, 53 दिन और 66 दिन की देरी के बाद अपनी रिपोर्ट चुनाव आयोग को सौंपी.