कोलंबिया विश्वविद्यालय की भारतीय छात्रा ने किया स्व-निर्वासन, हमास के कथित समर्थन के चलते वीज़ा रद्द हुआ

रंजनी एफ-1 स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका गई थीं. कैंपस में फ़लस्तीन के समर्थन में हुए प्रदर्शनों और हमास का समर्थन करने को लेकर कथित तौर पर 5 मार्च को उनका वीज़ा रद्द कर दिया गया था. हमास को अमेरिका और कई अन्य देशों ने आतंकवादी संगठन घोषित किया है.

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रंजनी श्रीनिवासन अमेरिका से स्व-निर्वासन करते हुए. (फोटा साभार: स्क्रीनग्रैब/ सोशल मीडिया)

नई दिल्ली: अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय से अर्बन प्लानिंग में पीएचडी कर रहीं भारतीय छात्रा रंजनी श्रीनिवासन ने बीते दिनों वीजा रद्द होने के चलते स्वदेश वापसी कर ली है. अमेरिका के होमलैंड सुरक्षा विभाग (डीएचएस) ने कहा है कि रंजनी ने खुद को स्व निर्वासित कर लिया है और वे भारत आ गई हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, रंजनी एफ-1 स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका गई थीं. कैंपस में फ़लस्तीन के समर्थन में हुए प्रदर्शनों और हमास का समर्थन करने को लेकर कथित तौर पर 5 मार्च को उनका वीज़ा रद्द कर दिया गया था. हमास को अमेरिका और कई अन्य देशों ने आतंकवादी संगठन घोषित किया है.

डीएचएस ने बताया कि श्रीनिवासन ने 11 मार्च को स्व-निर्वासन के लिए हाल ही में शुरू किए गए कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (सीबीपी) होम ऐप का इस्तेमाल किया. डीएचएस द्वारा 10 मार्च को लॉन्च किया गया यह ऐप अमेरिका में अवैध रूप से मौजूद व्यक्तियों को स्व-निर्वासन के लिए अपना इरादा प्रस्तुत करके स्वेच्छा से देश छोड़ने की अनुमति देता है.

डीएचएस ने कहा कि यह टूल उपयोगकर्ताओं को भविष्य में कानूनी रूप से वापस लौटने का अवसर प्रदान करता है, यदि वे इसका अनुपालन करते हैं तो. साथ ही डीएचएस ने चेतावनी भी दी है कि ऐसा नहीं करने वाले व्यक्तियों पर निर्वासन की कार्रवाई के साथ ही पुनः प्रवेश पर स्थायी प्रतिबंध लगाया जा सकता है.

होमलैंड सिक्योरिटी की सचिव क्रिस्टी नोएम ने श्रीनिवासन के स्व-निर्वासन पर संतोष व्यक्त करते हुए एक बयान में कहा, “अमेरिका में रहने और पढ़ने के लिए वीजा प्राप्त करना एक विशेषाधिकार है. जब आप हिंसा और आतंकवाद की वकालत करते हैं तो उस विशेषाधिकार को रद्द कर दिया जाना चाहिए और आपको इस देश में नहीं रहना चाहिए.”

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, रंजनी श्रीनिवासन कोलंबिया विश्वविद्यालय से अर्बन प्लानिंग में पीएचडी कर रही थीं. फ़ुलब्राइट स्कॉलरशिप हासिल करने वाली रंजनी ने कोलंबिया विश्वविद्यालय से ही अर्बन प्लानिंग में एमफ़िल किया है. उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से डिज़ाइन में मास्टर्स किया है. इसके अलावा उन्होंने अहमदाबाद की सीईपीटी यूनिवर्सिटी से डिज़ाइन में बैचलर डिग्री हासिल की है.

रंजनी के वीज़ा को रद्द करने के पीछे हमास का कथित समर्थन करने के अलावा और क्या ख़ास कारण थे, इसके बारे में अमेरिकी सरकार ने और अधिक जानकारी नहीं दी है.

श्रीनिवासन के स्व-निर्वासन के बाद अमेरिका में फिलिस्तीन समर्थक गतिविधियों से जुड़े कई व्यक्तियों और संस्थानों के खिलाफ व्यापक सरकारी कार्रवाई देखी गई है.

हाल ही में फिलिस्तीन मूल के छात्र महमूद खलील को भी हिरासत में लिया गया है. इसके अलावा डीएचएस ने वेस्ट बैंक की एक फिलिस्तीनी मूल की छात्रा लेका कोर्डिया को भी गिरफ्तार किया गया है, जिन पर वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी देश नहीं छोड़ने के आरोप हैं.

कोर्डिया का वीजा जनवरी 2022 में समाप्त हो गया था. उन्हें पहले अप्रैल 2024 में कोलंबिया विश्वविद्यालय में हमास समर्थक विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए गिरफ्तार किया गया था.

मालूम हो कि इन कार्रवाइयों के समानांतर ही ट्रंप प्रशासन ने कोलंबिया विश्वविद्यालय की 40 करोड़ डॉलर की फ़ंडिंग ये कहते हुए रोक दी है कि वो कैंपस में यहूदी विरोधी भावना से लड़ने में नाकाम रहा है.

फंडिंग में कटौती यहूदी विरोधी भावना से निपटने के लिए संयुक्त कार्य बल द्वारा व्यापक प्रयासों का हिस्सा थी, जिसमें न्याय विभाग (डीओजे), शिक्षा विभाग (इडी) और स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग (एचएचएस) जैसी एजेंसियां ​​शामिल हैं.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रशासन के इस रुख की पुष्टि करते हुए कहा है कि वो उन स्कूलों और विश्वविद्यालयों की फ़ंडिंग छीन लेंगे जो ‘अवैध प्रदर्शनों’ की अनुमति देगा.

इस संबंध में शिक्षा सचिव लिंडा मैकमोहन ने कहा, ‘यदि विश्वविद्यालयों को संघीय वित्त पोषण प्राप्त करना है, तो उन्हें सभी संघीय भेदभाव विरोधी कानूनों का पालन करना होगा.’

मालूम हो कि बीते साल फ़लस्तीन के समर्थन में अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय में हुए हुए प्रदर्शनों ने काफी ध्यान आकर्षित किया था. न्यूयॉर्क के कोलंबिया कैंपस में गाजा में इजरायली कार्रवाई के खिलाफ कई हफ़्तों तक विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद अप्रैल 2024 से विश्वविद्यालय के वेस्ट लॉन में छात्रों के शिविर स्थापित किए जाने लगे थे.

इन विरोध प्रदर्शनों के कारण कोलंबिया यूनिवर्सिटी ज्यूडिशियल बोर्ड (यूजेबी) ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की, जिसमें हैमिल्टन हॉल पर कब्जे में शामिल छात्रों के लिए कई साल का निलंबन, अस्थायी डिग्री रद्द करना और निष्कासन सहित प्रतिबंध जारी किए गए. विश्वविद्यालय ने एक बयान में कहा कि वह अपने नियमों और नीतियों को लागू करने और आगे चलकर अनुशासनात्मक प्रक्रियाओं में सुधार करने के लिए प्रतिबद्ध है.