नई दिल्ली: फिलिस्तीनी मूल के नागरिक और कोलंबिया विश्वविद्यालय कैंपस के कार्यकर्ता महमूद ख़लील इन दिनों सूर्खियों में हैं. उन्हें 8 मार्च को अमेरिकी इमिग्रेशन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई) ने गिरफ्तार कर लिया है.
मालूम हो कि अल्जीरियाई नागरिक ख़लील अमेरिका में फिलिस्तीन समर्थक आंदोलनों का बड़ा चेहरा रहे हैं. फिलहाल उन्हें हिरासत में रखा गया है और उनके निर्वासन की तैयारी की जा रही है.
हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, ख़लील की गिरफ्तारी ट्रंप प्रशासन के उस अभियान का हिस्सा है, जो फिलिस्तीन समर्थक छात्र आंदोलनों को दबाने और कथित ‘यहूदी-विरोधी’ गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए चलाया जा रहा है.
आईसीई एजेंट्स ने शुरू में महमूद ख़लील की गिरफ्तारी को उनके छात्र वीजा को रद्द करने के आधार पर शुरू किया था, लेकिन जब पता चला कि उनके पास ग्रीन कार्ड है, तो उसे भी रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की गई है. अधिकारियों ने दावा किया कि ख़लील ने हमास का समर्थन किया था. हालांकि, इस संबंध में कोई आपराधिक आरोप औपचारिक रूप से दर्ज नहीं किया गया है.
ख़लील की गिरफ्तारी को लेकर कई विपक्षी डेमोक्रेट सांसदों, छात्रो, मानवाधिकार संगठनों और संविधान विशेषज्ञों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है और कहा कि यह अमेरिका में लोकतांत्रिक व्यवस्था के क्षरण की शुरुआत है. उनका कहना है कि राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी के खिलाफ ऐसी कार्रवाई कतई न्यायसंगत नहीं है. यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कुठाराघात है. खुद को लोकतंत्र का सबसे बड़ा हिमायती बताने वाला अमेरिका अपने ही न्याय, स्वतंत्रता और समानता के मूल सिद्धातों के खिलाफ काम कर रहा है.
इस संबंध में 10 मार्च को न्यूयॉर्क में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने ख़लील की रिहाई के लिए मार्च किया. उसी दिन, एक संघीय न्यायाधीश जेसी एम. फुरमैन ने उनकी निर्वासन प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगा दी, ताकि उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हो सके.
ख़लील के वकील, एमी ग्रीर का कहना है कि उनके मुवक्किल को राजनीतिक सक्रियता और इजरायल की नीतियों का विरोध करने के कारण निशाना बनाया जा रहा है. यह मामला अमेरिकी सरकार द्वारा छात्र सक्रियता और राजनीतिक अभिव्यक्ति को दबाने का प्रयास है. 14 अमेरिकी सांसदों ने भी एक पत्र पर हस्ताक्षर कर आईसीई से ख़लील को रिहा करने की मांग की है.
ज्ञात हो कि ख़लील 2022 में स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका गए थे. उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय से बीते साल स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की है. इससे पहले उन्होंने लेबनानी अमेरिकी विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस में स्नातक की डिग्री हासिल की थी.
महमूद ने पिछले साल कोलंबिया विश्वविद्यालय में इज़रायल के खिलाफ फिलिस्तीन समर्थक विरोध प्रदर्शनों में बड़ी भूमिका निभाई थी और छात्रों की ओर से मुख्य वार्ताकार थे.
महमूद की शादी एक अमेरिकी नागरिक नूर अबदल्ला से हुई है, जो फिलहाल 8 महीने की गर्भवती हैं. पिछले साल ही महमूद को अमेरिका का ग्रीन कार्ड मिला है, जो उन्हें स्थायी निवासी का दर्जा देता है.
ख़लील को एक कट्टरपंथी विदेशी हमास समर्थक छात्र बताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘यह आने वाली कई गिरफ्तारियों में से पहली है. अगर आप निर्दोष पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की हत्या सहित आतंकवाद का समर्थन करते हैं तो आपकी उपस्थिति हमारी राष्ट्रीय और विदेश नीति के हितों के विपरीत है और आपका यहां स्वागत नहीं है.’
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने भी ख़लील पर हमास का समर्थन करने का आरोप लगाया.
ख़लील की गिरफ़्तारी के तुरंत बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि ट्रंप प्रशासन अमेरिका में हमास समर्थक छात्रों के वीज़ा और ग्रीन कार्ड रद्द करेगा, ताकि उन्हें निर्वासित किया जा सके.
इस संबंध में कोलंबिया विश्वविद्यालय ने वर्तमान स्थिति पर एक आधिकारिक बयान जारी किया, जिसमें ख़लील की गिरफ्तारी को पहली सार्वजनिक रूप से ज्ञात निर्वासन कार्रवाई के रूप में दर्ज किया गया है.
कोलंबिया विश्वविद्यालय के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के संकाय ने प्रेस की स्वतंत्रता का बचाव करते हुए अपने बयान में कहा कि अमेरिकी लोकतंत्र का एक आधारभूत सिद्धांत खतरे में है. हम अपने परिसर में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों समेत सभी के अधिकारों का समर्थन करने और उनका प्रयोग करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं.
विश्वविद्यालय ने आगे कहा कि हाल ही में स्नातक हुए महमूद ख़लील को बिना किसी अपराध के हिरासत में लिया गया, जिससे कई अंतरराष्ट्रीय छात्रों की चिंताएं बढ़ गई हैं और वे परिसर में कक्षाओं और कार्यक्रमों में भी शामिल नहीं हो रहे हैं. विश्वविद्यालय उनकी चिंताओं को जायज़ मानता है, क्योंकि कुछ संकाय सदस्य और छात्र जिन्होंने गाजा युद्ध को लेकर विरोध प्रदर्शनों को कवर किया, उन्हें बदनाम करने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं और उन्हें निशाना बनाया जा रहा है.
ख़लील का उदाहरण देते हुए कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने कहा कि अमेरिका में सभी तेरह मिलियन वैध निवासी (ग्रीन कार्ड धारक) अब डर में रहेंगे, अगर वे कुछ भी ऐसा बोलने या प्रकाशित करने की हिम्मत करते हैं, जो सरकार के विचारों के विपरीत है.
इस बीच, कोलंबिया स्नातक और अमेरिका के स्थायी निवासी का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह क्लीयर के निदेशक रामजी कासेम ने ख़लील पर लगे आरोपों की आलोचना करते हुए कहा कि ये सारी बातें केवल बकवास हैं, इसमें कोई सच्चाई नहीं है.
संवैधानिक अधिकारों से जुड़ी एक स्टाफ अटोर्नी समाह सिसा ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘महमूद को कई राज्यों की सीमाओं के पार ले जाया गया और उसके बाद उनके बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करने के कुछ ही घंटों बाद लुइसियाना की एक दूरस्थ जेल में स्थानांतरित कर दिया गया, जो एक जानबूझकर किया गया प्रतिशोधात्मक काम था. ये न्यूयॉर्क अदालत के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करने का प्रयास था.
वहीं, ख़लील के वकीलों ने कहा है कि उनकी कैंपस सक्रियता फिलिस्तीनी अधिकारों के समर्थन में रही है और उनका हमास से कोई संबंध नहीं है.
