नई दिल्ली: अमेरिका में दो भारतीय स्कालर्स द्वारा निर्वासन की चेतावनी का सामना करने के बाद भारत ने शुक्रवार (21 मार्च) को कहा कि दोनों छात्रों में से किसी ने भी उनके मिशन से सहायता नहीं मांगी है.
रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों को स्थानीय कानूनों का पालन करना चाहिए.
मालूम हो कि बीते साल फ़िलस्तीन के समर्थन में अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों में हुए हुए प्रदर्शनों ने काफी ध्यान खींचा था, जिसके खिलाफ ट्रंप प्रशासन अब कार्रवाई करता दिखाई दे रहा है.
इसी सिलसिले में वाशिंगटन के जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय में ‘पोस्टडॉक्टरल फेलो’ बदर खान सूरी को सोमवार (17 मार्च) रात होमलैंड सुरक्षा विभाग ने ‘हमास के दुष्प्रचार को सक्रिय रूप से फैलाने’ के आरोप में हिरासत में लिया.
हालांकि, गुरुवार (20 मार्च) को वर्जीनिया में एक संघीय न्यायाधीश ने फैसला सुनाया कि होमलैंड सुरक्षा विभाग जे-1 वीजा के तहत अमेरिका में रह रहे भारतीय नागरिक बदर खान सूरी को निर्वासित नहीं कर सकता. इसके साथ ही न्यायाधीश ने सूरी को अमेरिका से निर्वासित करने पर रोक लगा दी.
अमेरिकी सरकार ने उन पर हमास को लेकर ‘प्रचार’ फैलाने का आरोप लगाया है, जिसका उनके वकील ने खंडन किया.
ज्ञात हो कि हाल के हफ्तों में इस तरह की कार्रवाई का सामना करने वाले सूरी दूसरे भारतीय नागरिक हैं. इससे पहले इस महीने की शुरुआत में कोलंबिया विश्वविद्यालय की स्कॉलर रंजनी श्रीनिवासन को राज्य विभाग द्वारा उनका छात्र वीजा रद्द करने के बाद अमेरिका छोड़कर कनाडा जाने के लिए मजबूर होना पड़ा था.
ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने रंजनी के वीज़ा को रद्द करने के पीछे उनका हमास को कथित समर्थन का हवाला दिया था, जबकि श्रीनिवासन का कहना है कि फिलिस्तीन से संबंधित उनकी सक्रियता निम्न-स्तरीय विरोध प्रदर्शनों और सोशल मीडिया पोस्ट तक ही सीमित थी.
शुक्रवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि उन्हें सूरी की हिरासत के बारे में केवल मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से पता चला.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘ इस संबंध में न तो अमेरिकी सरकार और न ही इन व्यक्ति ने हमसे या दूतावास से संपर्क किया है.’
इसी तरह रंजनी श्रीनिवासन के बारे में भी जायसवाल ने कहा कि उन्होंने किसी मदद के लिए हमारे वाणिज्य दूतावास या हमारे दूतावास से संपर्क करने की जानकारी नहीं है.
उन्होंने कहा, ‘हमें ख़बरों के माध्यम से ही अमेरिका से उनके जाने के बारे में पता चला, जो संकेत देते हैं कि वह कनाडा चली गई हैं.’
जायसवाल ने यह भी दोहराया कि वीजा और आव्रजन नीतियां किसी भी देश के संप्रभु मामले हैं और विदेशी नागरिकों को स्थानीय कानूनों का पालन करना चाहिए.
उन्होंने कहा, ‘जिस तरह हम भारत में विदेशी नागरिकों से हमारे कानूनों और नियमों का पालन करने की अपेक्षा करते हैं, उसी तरह विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों को भी उन देशों के कानूनों का पालन करना चाहिए, जहां वे रहते हैं.’
जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के इस बयान के बारे में पूछे जाने पर कि उसे सूरी की किसी भी अवैध गतिविधि के बारे में जानकारी नहीं है, जायसवाल ने कहा, ‘जैसा कि मैंने बताया, न तो छात्र और न ही अमेरिकी सरकार ने हमसे संपर्क किया है. अगर वे ऐसा करते हैं, तो हम मामले का आकलन करेंगे और तय करेंगे कि किस तरह से सबसे बेहतर तरीके से संपर्क किया जा सकता है.’
अमेरिकी मीडिया की ख़बरें बताती हैं कि सूरी के खिलाफ कार्रवाई किसी गतिविधि के कारण नहीं बल्कि हमास के एक पूर्व अधिकारी की बेटी से उनकी शादी के चलते की गई है.
यह पूछे जाने पर कि क्या भारत हमास को आतंकवादी समूह मानता है, जयसवाल ने कहा, ‘हमास पर हमारी स्थिति आपको अच्छी तरह से पता है. इसलिए मैं वही एक बार फिर से अपनी स्थिति दोहराना चाहूंगा.’
ज्ञात हो कि दिसंबर 2023 में सरकार ने संसद में इसी तरह के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा था कि हमास प्रतिबंधित सूची में नहीं है.
जवाब में कहा गया था कि ‘किसी संगठन को आतंकवादी घोषित करना गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के अंतर्गत आता है और किसी भी संगठन को आतंकवादी घोषित करने पर संबंधित सरकारी विभागों द्वारा अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार विचार किया जाता है.’
