नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को गुरुवार (27 मार्च) को लंदन के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के केलॉग कॉलेज में अपने पहले भाषण के दौरान वामपंथी छात्रों के विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा.
रिपोर्ट के अनुसार, ये प्रदर्शनकारी पश्चिम बंगाल में आम जनता से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को उठाना चाह रहे थे. लेकिन ममता बनर्जी ने प्रदर्शनकारियों को यह कह चुप कराने की कोशिश की कि, ‘कृपया यहां राजनीति न करें. आप मेरे राज्य में आकर मुझसे राजनीति कर सकते हैं. अगर आपको राजनीतिक मंच चाहिए तो बंगाल जाइए.’
किसने और क्यों किया विरोध प्रदर्शन?
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीएम के पोलित ब्यूरो सदस्य सूर्यकांत मिश्रा ने अपने एक्स पोस्ट में सवाल उठाते हुए लिखा है, ‘ऑक्सफोर्ड जाकर झूठ बोलेंगी और एसएफआई चुप रहेगा? ऐसा नहीं होगा.’
एसएफआई (स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया) सीपीएम का छात्र संगठन है. मिश्रा ने बताया है कि ‘ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के छात्रों और शोधकर्ताओं ने एसएफआई-यूके के बैनर तले ममता बनर्जी के खिलाफ प्रदर्शन किया. उनकी कथित उपलब्धियों के सबूत मांगे, जिनके आधार पर वे पश्चिम बंगाल के विकास का दावा करती हैं. लेकिन जवाब देने के बजाय प्रदर्शनकारियों की शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति को रोकने के लिए पुलिस बुला ली गई.’
SFI-UK held a demonstration in Kellogg College, Oxford against Mamata Banerjee’s speech. We opposed her blatant lies by asking her for evidence of the social development she claims to pioneer. Instead of allowing us to peacefully express our opinions, the police were called. pic.twitter.com/pj0WRpvZUa
— Students’ Federation of India – United Kingdom (@sfi_uk) March 27, 2025
मिश्रा के मुताबिक़, एसएफआई-यूके प्रदर्शनकारी छात्रों ने ममता बनर्जी के समाने कई सवाले उठाए, ‘एसएफआई ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना को लेकर उनके बयान पर सवाल उठाए, जहां उन्होंने पीड़ितों को ही दोषी ठहराया. जब ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में छात्र और लोकतांत्रिक अधिकारों के समर्थन की बात कही, तो एसएफआई ने पूछा कि पिछले छह सालों से विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव क्यों नहीं हुए? जादवपुर यूनिवर्सिटी के छात्रों को उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने पर क्यों प्रताड़ित किया जा रहा है? जब ममता बनर्जी ने महिलाओं के सशक्तिकरण की बात कही, तो एसएफआई ने पूछा कि पिछले एक साल में लड़कियों द्वारा पढ़ाई बीच में छोड़ने की दर 19% क्यों बढ़ गई है और क्यों राज्य में बाल विवाह की दर सबसे ज्यादा है?’
एसएफआई ने केलॉग कॉलेज से भी सवाल किया कि उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति को मंच क्यों दिया, जो अपने राज्य में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ संघर्ष कर रही जनता पर हिंसा करवा रही हैं?
ममता बनर्जी ने क्या किया?
विरोध प्रदर्शन के दौरान ममता बनर्जी कभी छात्रों को शांत कराती नज़र आईं तो कभी नाराज़ होते. उन्होंने कहा, ‘अपने दल से कहें कि वे हमारे राज्य में अपनी ताकत बढ़ाएं ताकि वे हमसे मुकाबला कर सकें.’
ममता बनर्जी ने 1990 की एक ब्लैक एंड ह्वाइट तस्वीर भी दिखाई, जिसमें वे घायल अवस्था में पट्टियों में लिपटी हुई थीं. उन्होंने आरोप लगाया कि यह हमला सीपीएम की युवा इकाई के सदस्य लालू आलम ने किया था और उन्हें मारने की कोशिश की गई थी. हालांकि, साल 2019 में अदालत ने लालू आलम को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था.
If the gate’s closed, she goes over the fence. If the fence is too high, she’ll pole vault in. If that doesn’t work, she’ll parachute in.
But she will fight.
That’s Mamata Banerjee for you. pic.twitter.com/KZEA18KQL2— Souptik🌈 (@SouptikBiswas30) March 27, 2025
ममता ने कहा, ‘मैं मरने वाली थी. यह आपके अत्याचार हैं.’ उन्होंने आगे कहा, ‘यह नाटक नहीं है. आप मेरा अपमान कर सकते हैं, लेकिन अपने संस्थान का नहीं. अपने संस्थान का सम्मान करें.’
प्रदर्शनकारी छात्र अपने साथ बैनर-पोस्टर लेकर आए थे. सवाल उठता है कि क्या ममता बनर्जी को पता था कि उनका विरोध होने वाला है और इसलिए वह भी अपनी पुरानी तस्वीर का पोस्टर बनवाकर लेकर आई थीं?
