आरएसएस से संबंध सुधारने की कवायद: पीएम बनने के बाद मोदी पहली बार संघ मुख्यालय पहुंचे

नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद पर रहते संघ के मुख्यालय जाने वाले पहले पीएम हैं. इससे पहले वे जुलाई 2013 में आरएसएस के मुख्यालय गए थे. लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की शानदार जीत और नरेंद्र मोदी के पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद वे अब 2025 में पहली बार नागपुर के आरएसएस मुख्यालय पहुंचे हैं. इसे संघ और भाजपा के संबंधों में सुधार की कोशिश माना जा रहा है.

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पीएम मोदी डॉ. हेडगेवार को श्रद्धांजलि देते हुए. (सभी फोटो साभार: एक्स/@narendramodi)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) इस साल अपनी स्थापना का 100 वर्ष मना रहा है. इस बीच रविवार (30 मार्च) को आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने नागपुर पहुंचकर डॉ. हेडगेवार और आरएसएस के दूसरे प्रमुख एमएस गोलवलकर को श्रद्धांजलि दी.

मालूम हो कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद पर रहते संघ के मुख्यालय जाने वाले पहले पीएम हैं. इससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी 2007 में गोलवलकर शताब्दी समारोह में भाग लेने के दौरान संघ मुख्यालय गए थे, लेकिन तब वह प्रधानमंत्री के पद पर नहीं थे.

खबरों के अनुसार, नरेंद्र मोदी खुद प्रधानमंत्री बनने के एक दशक से अधिक समय बीतने के बाद अब आरएसएस मुख्यालय पहुंचे हैं. इससे पहले वे 2013 में आरएसएस मुख्यालय गए थे, जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे. लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की शानदार जीत और नरेंद्र मोदी के पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद वे अब 2025 में पहली बार नागपुर के आरएसएस मुख्यालय पहुंचे हैं.

हालांकि, इस बीच उन्होंने संघ के पदाधिकारियों के साथ कई कार्यक्रमों में भाग लिया है और मंच भी साझा किया है. पिछले साल जनवरी में अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठान समारोह में भी पीएम मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मंच साझा किया था.

प्रधानमंत्री के आरएसएस मुख्यालय दौरे को इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के रिश्तों में खटास की खबरें मीडिया और राजनीति के गलियारों में चर्चा का विषय बन गई थीं.

उस दौरान पांचवें चरण के मतदान से एक दिन पहले भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा एक इंटरव्यू में आरएसएस के समक्ष अपनी पार्टी की स्थिति को बतलाते हुए कहा था: ‘शुरू में हम अक्षम होंगे, थोड़ा कम होंगे, आरएसएस की जरूरत थी… आज हम बढ़ गए हैं, सक्षम हैं… तो भाजपा अपने आप को चलाती है.’

लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान द वायर हिंदी ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि पिछले कुछ वर्षों में भाजपा-संघ के संबंधों में आए खटास को देखा जा सकता है. चुनाव के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्वयंसेवकों का भाजपा से मोहभंग भी हुआ था. यह 2024 में चुनावों की स्थिति को 2014 और 2019 से अलग कर रहा था.

अब प्रधानमंत्री के इस दौरे को दोनों के संबंधों में सुधार की ओर एक कदम माना जा रहा है. इसे संघ और भाजपा के बीच की दूरी को खत्म करने की कोशिश की तरह भी देखा जा रहा है.

मीडिया रिपोर्ट  के मुताबिक, रविवार को आरएसएस मुख्यालय में प्रधानमंत्री के साथ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, संघ के पूर्व महासचिव सुरेश भैयाजी जोशी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी थे.

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पीएम मोदी के साथ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, संघ के पूर्व महासचिव सुरेश भैयाजी जोशी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी .

इस दौरान पीएम मोदी ने प्रमुख स्मारकों पर श्रद्धांजलि अर्पित की, एक नेत्र अस्पताल की आधारशिला रखी.

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में लिखा, ‘आरएसएस के दो मजबूत स्तंभों का स्मारक उन लाखों स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणा है जिन्होंने राष्ट्र की सेवा के लिए खुद को समर्पित कर दिया है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘मैं स्मृति मंदिर में आकर अभिभूत हूं, जो परम पूज्य डॉ हेडगेवार और पूज्य गुरुजी की यादों को संजोए हुए है.’

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में दो मौकों पर आरएसएस की तारीफ भी की है.

फरवरी में तीन दिवसीय 98वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन में भाग लेने के दौरान उन्होंने आरएसएस की तुलना ‘वट वृक्ष’ से की थी. मोदी ने कहा था कि आरएसएस ने ‘मेरे जैसे लाखों लोगों’ को ‘देश के लिए जीने’ की प्रेरणा दी है.

इसके अलावा इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी पॉडकास्टर लेक्स फ्रीडमैन के साथ एक इंटरव्यू में पीएम मोदी ने अपने जीवन पर संघ के प्रभाव को लेकर चर्चा की थी.

मोदी ने कहा था, ‘पिछले 100 साल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने दुनिया की चकाचौंध से दूर रहते हुए समर्पित भाव से काम किया है और यह मेरा सौभाग्य रहा कि ऐसे संगठन से मुझे जीवन के संस्कार मिले, मुझे लाइफ ऑफ परपज (जीने का मकसद) मिला.’

इस दौरान मोदी ने कहा था कि लाखों लोग संघ से जुड़े हुए हैं और इस संगठन को समझना इतना आसान नहीं है. इसके काम की प्रकृति को सही मायने में समझने की कोशिश करनी चाहिए.