नई दिल्ली: न्यूयॉर्क की एक अदालत ने इस महीने की शुरुआत में एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि खालिस्तान समर्थक अलगाववादी वकील गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा दायर एक मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को समन सफलतापूर्वक नहीं दिए गए.
रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी में भारतीय प्रधानमंत्री की वाशिंगटन यात्रा के दौरान आधिकारिक गेस्ट हाउस की सुरक्षा करने वाली सीक्रेट सर्विस ने समन स्वीकार करने से इनकार कर दिया था.
मालूम हो कि 18 सितंबर, 2024 को न्यूयॉर्क की दक्षिणी जिला न्यायालय ने भारत सरकार और व्यक्तिगत रूप से डोभाल, पूर्व रॉ प्रमुख सामंत गोयल, पूर्व रॉ अधिकारी ‘विक्रम यादव’ के साथ-साथ हिरासत में लिए गए भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को पन्नू द्वारा दायर एक सिविल मुकदमे में समन जारी किया था.
यह मुकदमा अमेरिकी अभियोजकों द्वारा निखिल गुप्ता के खिलाफ दायर अभियोग पर आधारित था, जिसमें उन पर तत्कालीन अनाम दिल्ली स्थित रॉ अधिकारी के निर्देश पर पन्नू की हत्या के लिए एक ‘हिटमैन’ को काम पर रखने की कोशिश का आरोप लगाया गया था.
इस मामले में एक महीने बाद अक्टूबर 2024 में एक और अभियोग पत्र जारी किया गया, जिसमें औपचारिक रूप से रॉ के पूर्व ऑपरेटिव विकास यादव को साजिश का मास्टरमाइंड बताया गया.
इस साल जनवरी में भारत सरकार ने इन आरोपों को स्पष्ट रूप से स्वीकार करते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि एक उच्चस्तरीय सरकारी समिति ने ‘एक व्यक्ति’ के खिलाफ ‘कानूनी कार्रवाई’ की सिफारिश की है.
इस साल 12 फरवरी को जिस दिन नरेंद्र मोदी वाशिंगटन, डीसी पहुंचने वाले थे, अमेरिकी अदालत ने पन्नू को ‘वैकल्पिक सेवा’ (alternative service) की अनुमति दी, जिससे डोभाल की यात्रा के दौरान उन्हें सुरक्षा देने वाले किसी भी सीक्रेट सर्विस एजेंट को समन दिया जा सके.
अपनी यात्रा के दौरान डोभाल मोदी के साथ ब्लेयर हाउस में ठहरे हुए थे, जो संयुक्त राज्य अमेरिका में विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के लिए आधिकारिक निवास है. जनवरी में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद भारतीय पीएम की यह पहली यात्रा थी.
गौरतलब है कि डोभाल ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल के दौरान सितंबर 2024 में भारतीय पीएम की पिछली अमेरिका यात्रा में साथ नहीं गए थे.
26 फरवरी को अदालत को सौंपे गए पत्र के अनुसार, पन्नू की कानूनी टीम ने ब्लेयर हाउस में डोभाल को समन देने के कई असफल प्रयासों का विवरण दिया है.
इस पत्र मे कहा गया है कि पहला प्रयास 12 फरवरी की शाम को मोदी के निर्धारित आगमन के ठीक एक घंटे बाद किया गया. पत्र में उल्लेख किया गया है कि एंबिको वालेस नामक प्रक्रिया सर्वर (समन लेकर जाने वाला)ने बताया कि क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा थी, जिसमें बैरिकेड्स और सीक्रेट सर्विस एजेंट्स द्वारा संचालित एक चेकपॉइंट था.
सुरक्षाकर्मियों को समन की अनुमति देने वाले न्यायालय के आदेश को दिखाने के बावजूद वालेस को वहां प्रवेश से रोक दिया गया और उन्हें जाने का निर्देश दिया गया. उन्हें सुपरवाइज़र से बात करने की भी अनुमति नहीं दी गई.
पत्र में कहा गया है, ‘एजेंट ने अपना नाम बताने या वालेस को पर्यवेक्षक से बात करने की अनुमति देने से भी इनकार कर दिया. वालेस को डर था कि अगर उन्होंने कुछ और किया तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.’
दूसरे प्रोसेस सर्वर- वेन एंग्राम ने अगले दिन दोपहर में फिर से समन देने का प्रयास किया. उस समय पीएम के शेड्यूल के अनुसार, रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी ब्लेयर हाउस में मोदी से मुलाकात कर रहे थे.
एंग्राम को चेकपॉइंट पर तीन सीक्रेट सर्विस एजेंट्स ने भी रोका, जिन्होंने समन स्वीकार करने से इनकार कर दिया.
पत्र में कहा गया है, ‘कोई अन्य विकल्प न होने पर एंग्राम ने एजेंट्स से कहा कि वह समन दस्तावेजों वाले लिफाफे को उनके सामने जमीन पर रख देंगे – ये समन देने का एक मानक तरीका है जिसे एंग्राम ने प्रोसेस सर्वर के रूप में अपने पंद्रह वर्षों में कई बार इस्तेमाल किया है. हालांकि, एजेंट्स में से एक ने एंग्राम से कहा कि अगर वह दस्तावेजों को जमीन पर छोड़ देते हैं, तो एजेंट उन्हें गिरफ्तार कर लेंगे.’
इसके बाद, एंग्राम ने समन वाले लिफाफे को पास की स्टारबक्स कॉफी शॉप के बाहर बैठने की एक सार्वजनिक जगह पर रख दिया और एजेंट्स को इसके स्थान के बारे में सूचित किया.
पत्र में बताया गया है, ‘एजेंट्स में से एक ने ‘ठीक है’ कहा और एंग्राम को मिलिट्री सैल्यूट किया.’ उसी दिन, पन्नू की कानूनी टीम ने ब्लेयर हाउस की कार्यकारी निदेशक एलिजाबेथ लुईस को समन, शिकायत और अदालती आदेश भी ईमेल किया, जिसमें अनुरोध किया गया कि वह उसे वरिष्ठ भारतीय अधिकारी को दे दें.
उन्होंने तर्क दिया कि न्यायालय के आदेश के तहत ये काम पूरा हो गया था, जिसने दस्तावेजों को सीक्रेट सर्विस अधिकारियों को देने की अनुमति दी थी, भले ही इसे प्राप्तकर्ता द्वारा ‘स्वीकार’ न किया गया हो.
हालांकि, 3 मार्च के फैसले में न्यायाधीश कैथरीन पोल्क फेला ने कहा कि ये प्रयास वैध सेवा के लिए न्यायालय की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करते हैं.
न्यायाधीश ने उल्लेख किया कि दस्तावेज़ न तो ब्लेयर हाउस के कर्मचारियों को दिए गए थे और न ही किसी सुरक्षा अधिकारी द्वारा स्वीकार किए गए थे, जिससे न्यायालय के 12 फरवरी के आदेश में निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया गया.
ज्ञात हो कि अब तक केवल गुप्ता, जो संघीय जेल में मुकदमे की प्रतीक्षा कर रहे हैं, को पिछले साल नवंबर में मामले में सफलतापूर्वक समन दिया गया है.
न्यायालय के आदेश के आधार पर प्रतिवादियों को समन भेजने की समय सीमा 19 जून है.
