दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) के एक कार्यकर्ता को जम्मू के डोडा ज़िले में पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत हिरासत में लिया गया है. आप के जम्मू-कश्मीर प्रमुख ने आरोप लगाया है कि यह गिरफ्तारी एक वरिष्ठ भाजपा नेता के कहने पर हुई है.
फगसू (डोडा) निवासी मोहम्मद रफी उर्फ पिंका को पीएसए की धारा 8 के तहत डोडा के जिलाधिकारी हरविंदर सिंह (2019 बैच के आईएएस अधिकारी) ने 10 अप्रैल को हिरासत में लेने का आदेश दिया.
पीएसए की धारा 8 के तहत जम्मू-कश्मीर के जिलाधिकारियों को यह अधिकार है कि वे ऐसे किसी व्यक्ति को हिरासत में ले सकते हैं जिसके खिलाफ पुलिस ने यह रिपोर्ट दी हो कि वह राज्य की सुरक्षा या कानून व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है.
रफी, सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ता हैं और फगसू में छोटी दुकान चलाते हैं. वह डोडा से सरपंच और जिला विकास परिषद (डीडीसी) का चुनाव भी लड़ा चुके हैं.
दिसंबर 2021 में उन्होंने डोडा जिले में एक सरकारी योजना (Integrated Watershed Management Programme) में गड़बड़ियों की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो और उपराज्यपाल के शिकायत प्रकोष्ठ में की थी. बाद में उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी शिकायत को वापस लेने के लिए उनकी फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया.
पीएसए डोजियर (पुलिस की रिपोर्ट) में रफी को ‘OGW (Category-A)’, यानी आतंकियों का ओवरग्राउंड वर्कर बताया गया है. कहा गया है कि उनके भाषण ‘उकसाने वाले और आपत्तिजनक’ हैं और वे डोडा जिले में ‘कानून-व्यवस्था बिगाड़ सकते हैं’.
हालांकि इस रिपोर्ट में जिन एफआईआर, डेली डायरी रिपोर्ट्स और इश्तेगासा रिपोर्टों का हवाला दिया गया है, उनमें से कोई भी यूएपीए के तहत नहीं है— जो आमतौर पर आतंकवाद या अलगाववाद से जुड़े मामलों में लगाई जाती है.
मुख्य आरोप:
2013 की एफआईआर में कहा गया है कि रफी और कुछ लोग लाठियों के साथ फगसू पुलिस चौकी में घुसे और पुलिस को धमकाया.
2014 की एफआईआर में एक महिला के घायल होने की घटना के बाद लापरवाही से गाड़ी चलाने का आरोप लगाया गया.
2021 की एफआईआर में बिना अनुमति कोविड-19 पाबंदियों के दौरान प्रदर्शन करने का मामला दर्ज है.
मार्च 2024 की एफआईआर में रफी पर एक सहायक अभियंता के साथ बदसलूकी और अपशब्द कहने का आरोप है.
इन चार मामलों में से एक में वे बरी हुए हैं, दूसरे में डिस्चार्ज हुए हैं, तीसरे में दोषी ठहराए गए हैं (लेकिन वह मामला सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित नहीं है), और चौथा मामला अभी जांच में है.
डोजियर में कहा गया है कि रफी युवाओं को भड़काते हैं, राज्य के खिलाफ माहौल बनाते हैं और हिंसा की ओर ले जाते हैं.
आप के प्रदेश प्रमुख और डोडा से विधायक मेहराज मलिक ने 19 मिनट की फेसबुक लाइव वीडियो में आरोप लगाया कि डोडा प्रशासन ने भाजपा के दबाव में रफी को हिरासत में लिया है.
उन्होंने कहा कि रफी ने अवैध खनन में शामिल कुछ पुलिसकर्मियों और जूनियर इंजीनियर का पर्दाफाश किया था. इसके बाद उन्होंने भाजपा नेता सुनील शर्मा पर आरोप लगाया कि उन्होंने जिलाधिकारी को फोन कर रफी को जेल भिजवाने को कहा.
फेसबुक लाइव वीडियो को अब तक 8.5 लाख बार देखा गया, 8,200 से अधिक कमेंट्स और 5,900 से ज्यादा शेयर हो चुके हैं.
मेहराज मलिक ने जिलाधिकारी को संबोधित करते हुए कहा, ‘आप माफिया को नहीं रोक पा रहे हैं, अस्पतालों में इलाज नहीं मिल रहा, और गरीबों को दबाने में आप सबसे आगे हैं. गुंडे आपसे बेहतर थे. शर्म आनी चाहिए. क्या ऐसे लोग देश चलाएंगे?’
पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकार की अक्षमता कानून-व्यवस्था बनाए रखने में कोई बहाना नहीं हो सकती और पीएसए जैसे कानूनों का मनमाने तरीके से इस्तेमाल नहीं होना चाहिए.
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने भी साफ कहा है कि सरकार की आलोचना करने वालों को हिरासत में लेना निवारक कानून का दुरुपयोग है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी नीतियों की आलोचना को हिरासत का आधार नहीं बनाया जा सकता.
पिछले महीने जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि 400 से अधिक युवाओं को पीएसए के तहत बिना सबूत या आरोप के हिरासत में लिया गया है— यह कानून बिना मुकदमे के दो साल तक हिरासत की अनुमति देता है.
(इस ख़बर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)
