नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश पुलिस ने ऐसे तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें वह व्यक्ति भी शामिल है, जिसने खुद को गोरक्षक बताते हुए पहलगाम आतंकी हमले के प्रतिशोध में आगरा में एक मुस्लिम रेस्तरां कर्मचारी- गुलफाम की हत्या की जिम्मेदारी लेते हुए सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था.
पुलिस ने उन तीन लोगों में से दो को भी गिरफ्तार कर लिया है, जिन्होंने 23 अप्रैल की रात को गुलफाम की कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी थी और उसके चचेरे भाई सैफ अली को घायल कर दिया था.
पुलिस ने बताया कि शिवम बघेल (20) और प्रियांश यादव (21) नामक दो आरोपियों को 28 अप्रैल को कथित मुठभेड़ में पैर में गोली लगने के बाद गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने बताया कि उनके पास से दो .315 बोर की देसी पिस्तौल बरामद की गई. तीसरा आरोपी पुष्पेंद्र बघेल अभी भी फरार है.
मनोज चौधरी, वह व्यक्ति जिसने गुलफाम और सैफ की शूटिंग का श्रेय लेते हुए इंस्टाग्राम पर एक वीडियो अपलोड किया था, को भी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.
आगरा पुलिस ने कहा कि चौधरी ने वीडियो अपलोड किया था, जिसमें उसने ‘क्षत्रिय गोरक्षा दल’ का सदस्य होने का दावा किया था, जिसका उद्देश्य सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने के उद्देश्य से ध्यान भटकाना था.
पुलिस ने बताया कि इस हत्या का पहलगाम हमलों से कोई संबंध नहीं है, बल्कि यह पैसे के विवाद के कारण हुआ, जो घटना से कुछ दिन पहले बिरयानी की दुकान पर तीन मुख्य आरोपियों और गुलफाम के बीच हुआ था.
आगरा के पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने कहा कि चौधरी, जिसका किसी भी क्षत्रिय संगठन से कोई संबंध नहीं है, ने हत्या को कथित तौर पर क्षत्रिय गोरक्षक दल से जोड़ने की कोशिश की थी.
आरोपियों ने पिछले विवाद को लेकर गुलफाम को गोली मारी: पुलिस
वरिष्ठ अधिकारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि तीनों लोगों ने पैसे को लेकर रेस्तरां में हुए पिछले विवाद को लेकर गुलफाम को गोली मारी. उन्होंने कहा कि विवाद इतना मामूली था कि किसी भी पक्ष ने इस मामले में पुलिस से संपर्क करने नहीं किया था. कुमार ने कहा कि आरोपियों ने मामले में गवाह सैफ की गवाही के अनुसार ‘जाति या धर्म’ से जुड़ी कोई टिप्पणी नहीं की.
आगरा पुलिस ने आरोप लगाया कि पुष्पेंद्र बघेल ने गुलफाम को गोली मारी जबकि शिवम बघेल ने सैफ को गोली मारी. प्रियांश यादव ने घटना का वीडियो बनाया. तीनों आरोपी व्यक्ति आगरा के एक ही गांव के मूल निवासी हैं और छोटे-मोटे काम करके अपना गुजारा करते हैं.
चौधरी का आपराधिक रिकॉर्ड है. 2017 में उस पर हत्या का आरोप लगा था. 23 अप्रैल को गोलीबारी की खबर आने के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने लगा जिसमें खुद को क्षत्रिय गो रक्षा दल का कथित सदस्य मनोज चौधरी बता रहा एक व्यक्ति कह रहा था कि उसने आगरा में दो मुसलमानों की हत्या की है. उसने कहा कि उसने पहलगाम में हुई हत्याओं का बदला लेने के लिए ऐसा किया था.
वीडियो के व्यापक रूप से प्रसारित होने के बाद आगरा पुलिस ने एक बयान जारी कर कहा कि आगरा में क्षत्रिय गो रक्षा दल नामक कोई संगठन सक्रिय नहीं है. पुलिस ने उन ख़बरों का भी खंडन किया था जिसमें कहा गया था कि संदिग्धों द्वारा उनके नाम और धर्म पूछने के बाद गुलफाम और सैफ अली को निशाना बनाया गया था.
इसके बाद पुलिस ने चौधरी पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से की गई हरकतें) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के तहत मामला दर्ज किया था.
पुलिस ने कहा कि हत्या के बारे में पता होने के बाद भी चौधरी ने आगरा में क्षत्रिय करणी सेना द्वारा हाल ही में किए गए विरोध प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए जानबूझकर क्षत्रिय गो रक्षा दल का नाम लिया और इसे पहलगाम हत्याकांड से जोड़ दिया.
आगरा पुलिस ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया और अन्य वेबसाइट पर ‘भ्रामक’ जानकारी व्यापक रूप से साझा किए जाने के बाद उन्हें दुनिया भर से टिप्पणियां मिलीं और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने का प्रयास किया गया. पुलिस उन सभी सोशल मीडिया हैंडल की जांच कर रही है, जिन्होंने घटना के बाद ‘गैर-जिम्मेदाराना पोस्ट और टिप्पणियां’ कीं. पुलिस ने कहा कि उनकी भूमिका को भी जांच में शामिल किया जाएगा.
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