नई दिल्ली: भारत के साथ मौजूदा तनाव की स्थिति में पाकिस्तान का रुख जो ताक़तवर हस्तियां तय करेंगी, उनमें सेनाध्यक्ष और प्रधानमंत्री सबसे प्रमुख हैं. इनके अलावा कई अन्य संस्थाएं और व्यक्ति भी हैं, जो ऐसे वक्त पाकिस्तान की सुरक्षा नीति और प्रतिक्रिया को तय करेंगे.
सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर
पाकिस्तान के थल सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर देश की सुरक्षा और विदेश नीति पर खास प्रभाव रखते हैं. मसला अगर भारत से जुड़ा हो तब तो सेना प्रमुख का हस्तक्षेप और बढ़ जाता है. हाल ही में कश्मीर को लेकर उनके बयान सख्त और हमलावर थे, जो सेना के पारंपरिक दृष्टिकोण को दोहराते थे कि पाकिस्तान भारत की किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब देने के लिये तत्पर है.
पाकिस्तान के भीतर असंतोष और असुरक्षा के चलते यह सेना की साख और मनोबल की परीक्षा का समय है. जनरल मुनीर की गतिविधियों और बयानों पर देश और विदेश की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि सेना ही पाकिस्तान की सबसे शक्तिशाली संस्था मानी जाती है और भारत को लेकर नीति निर्माण में उसका सबसे बड़ा हाथ होता है.
प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ
भारत के साथ बढ़ते तनाव के बीच देश की औपचारिक कमान प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ के पास है, लेकिन वे पाकिस्तान की सेना की मर्जी पर ही टिके हुए हैं. देश के सबसे लोकप्रिय नेता इमरान खान अभी जेल में हैं और शाहबाज़ के बड़े भाई और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ को राजनीति से अलग कर दिया गया है. इस परिस्थिति में शाहबाज़ शरीफ ने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की आपात बैठकें बुलाई हैं और अपने मंत्रिमंडल के साथ मिलकर साझा नीति बनाने की कोशिश की है.
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की अपील की है और सभी पक्षों से संयम बरतने को कहा है. साथ ही पहलगाम हमले में पाकिस्तान का हाथ होने के आरोपों को भी खारिज किया है. उनकी नेतृत्व शैली पर देश और दुनिया दोनों की नजर है – क्या वे कूटनीतिक संपर्क बनाए रख पाते हैं, आंतरिक हालात संभालते हैं और जनता के दबाव के बीच संतुलन कायम कर पाते हैं या नहीं.
राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (NSC)
राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (NSC), पाकिस्तान की मुख्य नीति निर्धारण संस्था है, खासकर सुरक्षा संकटों के समय. इसमें शीर्ष मिलिट्री और सिविल अधिकारी शामिल होते हैं. पहलगाम हमले के बाद से समिति की कई बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें राजनयिक, सैन्य और खुफिया स्तर पर समन्वय किया गया है. इसी समिति में पाकिस्तान की आधिकारिक प्रतिक्रिया, सेना की तैनाती और अंतरराष्ट्रीय संपर्क की रणनीति तय होती है.
जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) और कोर कमांडर
रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर पाकिस्तान की सेना का संचालन और रणनीतिक योजना केंद्र है. यहां सेना प्रमुख द्वारा बुलाई गई कोर कमांडर कॉन्फ्रेंस में देश के शीर्ष सैन्य अधिकारी मिलकर खतरे की समीक्षा करते हैं और रणनीति तय करते हैं.
इन्हीं बैठकों में सेना की स्थिति, नियंत्रण रेखा (LoC) पर तैनाती और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का खाका तय होता है. इन कमांडरों का सामूहिक प्रभाव इतना है कि उनकी राय अक्सर जनता द्वारा चुनी गई सरकार की राय पर हावी हो जाती है.
नेशनल कमांड अथॉरिटी और स्ट्रेटेजिक प्लान्स डिवीजन
पाकिस्तान के परमाणु हथियारों का नियंत्रण नेशनल कमांड अथॉरिटी (NCA) के पास होता है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं, लेकिन इसमें तीनों सेनाओं के प्रमुख, आईएसआई के प्रमुख और प्रमुख मंत्री शामिल होते हैं.
इसकी कार्यकारी शाखा स्ट्रेटेजिक प्लान्स डिवीजन (SPD) होती है, जिसका नेतृत्व एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी करते हैं (फिलहाल कमान लेफ्टिनेंट जनरल यूसुफ जमाल के पास है.). यह शाखा परमाणु हथियारों की तैनाती, तकनीकी देखरेख और संचालन सुरक्षा सुनिश्चित करती है.
हालांकि औपचारिक रूप से एनसीए का नेतृत्व आवाम द्वारा चुनी हुई सरकार के पास होता है, लेकिन वास्तव में सेना – खासकर सेना प्रमुख, एसपीडी और कोर कमांडर – परमाणु नीति और इस्तेमाल पर अंतिम फैसला लेते हैं, विशेषकर संकट की घड़ी में.
आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद असीम मलिक
लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद असीम मलिक, पाकिस्तान की सबसे ताकतवर खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख हैं. भारत से तनाव की स्थिति में आईएसआई की भूमिका बहुत अहम हो जाती है. यह एजेंसी खुफिया जानकारी एकत्र करने, गुप्त ऑपरेशनों और रणनीतिक योजना बनाने में शामिल रहती है.
आईएसआई के प्रमुख राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) और नेशनल कमांड अथॉरिटी (NCA) के स्थायी सदस्य होते हैं. इनकी आंतरिक राजनीति और नागरिक-सैन्य संबंधों में भी गहरी भूमिका होती है. इस कारण किसी भी राष्ट्रीय संकट में यह पद सबसे महत्वपूर्ण बन जाता है.
वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगज़ेब
मुहम्मद औरंगज़ेब, जो पहले एक बैंक अधिकारी रहे हैं, अब पाकिस्तान के वित्त मंत्री हैं. पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय ऋणों पर निर्भरता के चलते वित्त मंत्री का काम और भी अहम हो गया है.
उनका काम है रक्षा क्षेत्र के लिए संसाधन जुटाना, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों को संभालना और संकट के समय बाजार व वित्तीय सहयोगियों को भरोसा दिलाना. भारत के साथ लंबे समय तक चलने वाले तनावपूर्ण गतिरोधों में आर्थिक सीमाएं अक्सर पाकिस्तान के विकल्पों को सीमित कर देती हैं, जिससे देश की प्रतिक्रिया और बयानबाज़ी दोनों को आकार देने में वित्त मंत्री की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है.
विदेश मंत्री मुहम्मद इस्हाक डार
विदेश मंत्री मुहम्मद इस्हाक डार, जो उपप्रधानमंत्री भी हैं, पाकिस्तान की कूटनीतिक रणनीति के अगुआई कर रहे हैं. वे अंतरराष्ट्रीय संगठनों, संयुक्त राष्ट्र और सहयोगी देशों से संपर्क रख रहे हैं. पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय अपने दूतावासों और उच्चायोगों के माध्यम से पाकिस्तान की स्थिति स्पष्ट कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने का प्रयास कर रहा है. हाल ही में मंत्रालय ने चीन से गहरी मंत्रणा की हैं.
