नई दिल्ली: 1980 से भारत में रह रहे कथित पाकिस्तानी नागरिक अब्दुल वहीद भट की बुधवार (30 अप्रैल) को अटारी-वाघा बार्डर पर निर्वासन प्रक्रिया (डिपोर्ट) के दौरान मौत हो गई.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वह लगभग 80 वर्ष के थे और कथित तौर पर लकवाग्रस्त थे. अटारी में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट गेट के बाहर खड़ी बस में उनकी मौत हो गई. बाद में उनके शव को अमृतसर के सिविल अस्पताल में ले जाया गया.
भट 60 से 70 कथित पाकिस्तानी नागरिकों के समूह का हिस्सा थे, जिन्हें पुलिस जम्मू से अटारी सीमा के रास्ते पाकिस्तान डिपोर्ट करने के लिए लाई थी.
उन्हें विदेशी पंजीकरण कार्यालय (श्रीनगर) द्वारा औपचारिक ‘भारत छोड़ने का नोटिस’ दिया गया था, जिसमें 1980 में उनके वीजा की समाप्ति के बाद से उनके अवैध प्रवास का हवाला दिया गया था. 25 अप्रैल, 2025 के नोटिस के अनुसार, गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया था कि अवैध रूप से रह रहे सभी विदेशी नागरिकों को 27 अप्रैल तक भारत छोड़ देना चाहिए.
इस निर्देश के तहत भट को निर्वासित किए जाने की प्रक्रिया चल रही थी, तभी उनकी हालत गंभीर रूप से बिगड़ गई. अधिकारियों ने बताया कि डिपोर्ट प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही भट की बस के अंदर ही मौत हो गई. वह अकेले यात्रा कर रहा था. उनकी कोई संतान नहीं है.
सूत्रों ने बताया कि भट का शव बस के अंदर ही रहा, क्योंकि भारतीय अधिकारी इस बात को लेकर अनिश्चित थे कि उनके पास डिपोर्ट के लिए वैध दस्तावेज हैं या नहीं.
अखबार ने एक सूत्र के हवाले से बताया है, ‘जम्मू-कश्मीर पुलिस कुछ ऐसे लोगों को वापस भेजने के लिए लाई है जिनके पास पासपोर्ट या दिल्ली में पाकिस्तानी दूतावास से ज़रूरी प्रमाणपत्र नहीं है. हम उन लोगों को वापस नहीं भेज सकते जिनके पास इनमें से कुछ भी नहीं है. यह स्पष्ट नहीं है कि भट के पास पाकिस्तानी पासपोर्ट था या नहीं.’
ज्ञात हो कि बीते 22 अप्रैल को पहलगाम के बैसरन मैदान में आतंकवादियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी, जिनमें ज़्यादातर पर्यटक थे. उसके बाद केंद्र सरकार ने जवाबी कार्रवाई में भारत में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों को देश छोड़ने के लिए 27 अप्रैल तक का समय दिया था.
स्क्रॉल की रिपोर्ट के अनुसार, 27 अप्रैल को समय सीमा समाप्त होने पर कम से कम 537 पाकिस्तानी अटारी-वाघा सीमा पार करके भारत से चले गए.
