नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में चमू कृष्णशास्त्री की शैक्षणिक योग्यताओं और बायोडाटा की जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया है. चमू शास्त्री वर्तमान में शिक्षा मंत्रालय की ओर से गठित भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष हैं.
यह जानकारी द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट में सामने आई है, जिसमें बताया गया कि अखबार द्वारा दाखिल आरटीआई के जवाब में शिक्षा मंत्रालय न तो शास्त्री की शैक्षणिक पृष्ठभूमि बता सका और न ही यह स्पष्ट कर पाया कि उनके वेतन का निर्धारण किस आधार पर किया गया.
गौरतलब है कि चमू कृष्णशास्त्री वर्ष 2021 में इस पद पर नियुक्त किए गए थे. वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ी संस्था संस्कृत भारती के सदस्य हैं, जो बच्चों के लिए संस्कृत शिविर जैसे कार्यक्रमों के ज़रिए इस भाषा को बढ़ावा देने का काम करती है.
भारतीय भाषा समिति की स्थापना नवंबर 2021 में भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के उपाय सुझाने के लिए की गई थी.
आरटीआई के शुरुआती जवाब में जब संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई, तो द टेलीग्राफ ने अपील दायर की. अपील के जवाब में 20 मार्च को पहली अपीलीय प्राधिकारी सुमन दीक्षित ने कहा कि मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि जो जानकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध थी, वही दी गई है.
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि दिसंबर 2023 से चमू शास्त्री को हर महीने 2.5 लाख रुपये का वेतन मिल रहा है, जो किसी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति के वेतन से भी ज़्यादा है.
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि यह सरकार की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है—खासकर तब, जब बात सार्वजनिक धन के इस्तेमाल और महत्वपूर्ण पदों पर की जा रही नियुक्तियों की हो.
