ट्रंप बोले- भारत-पाक तनाव व्यापार बंद करने की धमकी के चलते ख़त्म हुआ, भारत का इनकार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को दावा किया कि अमेरिका द्वारा व्यापार बंद करने की धमकी ने भारत और पाकिस्तान को अपनी लड़ाई रोकने पर मजबूर कर दिया. हालांकि, पीएम मोदी ने संघर्षविराम के लिए भारत के सहमत होने के कारणों को स्पष्ट करते हुए अमेरिका का कोई उल्लेख नहीं किया.

ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया, जिसे रूस से तेल खरीदने के दंडात्मक कदम के तौर पर देखा जा रहा है. (फोटो साभार: X/@WhiteHouse)

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (12 मई) को दावा किया कि अमेरिका द्वारा व्यापार बंद करने की धमकी ने भारत और पाकिस्तान को अपनी लड़ाई रोकने पर मजबूर कर दिया. उन्होंने कहा कि उनके प्रशासन ने भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु टकराव को रोका है.

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की यह टिप्पणी भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन से ठीक पहले और भारत-पाकिस्तान द्वारा संघर्षविराम की घोषणा के तीन दिन बाद आई है.

ट्रंप ने ह्वाइट हाउस के एक कार्यक्रम में कहा, ‘मैंने कहा चलो, हम आप लोगों के साथ बहुत सारा व्यापार करने जा रहे हैं. चलो इसे रोकते हैं. अगर आप इसे रोकते हैं, तो हम व्यापार करेंगे. अगर आप इसे नहीं रोकते हैं, तो हम कोई व्यापार नहीं करेंगे. लोगों ने वास्तव में कभी भी व्यापार का उस तरह से इस्तेमाल नहीं किया है, जैसा मैंने किया और अचानक उन्होंने कहा, हम इसे रोकने जा रहे हैं.’

इस संबंध में भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई हैं. हालांकि, आधिकारिक सूत्रों ने ट्रंप के इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि ‘भारत अमेरिका के इस दावे का खंडन करता है.’

भारतीय अधिकारियों ने कहा- व्यापार पर चर्चा नहीं हुई

इस संबंध में पहली बार भारतीय अधिकारियों ने संघर्ष के दौरान अमेरिकी समकक्षों के साथ उच्च स्तरीय कॉल का विवरण जारी किया, जिसमें कहा गया कि उनमें से किसी में भी व्यापार पर चर्चा नहीं हुई.

सूत्रों ने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 09 मई को पीएम मोदी से बात की. सचिव रुबियो ने 8 मई और 10 मई को विदेश मंत्री से और 10 मई को एनएसए से बात की. इनमें से किसी भी चर्चा में व्यापार का कोई संदर्भ नहीं था.’

ज्ञात हो कि एक दिन पहले ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में भी उल्लेख किया था कि ‘चर्चा नहीं हुई, लेकिन मैं इन दोनों महान देशों के साथ व्यापार को काफी हद तक बढ़ाने जा रहा हूं.’

सोमवार को दिए गए अपने भाषण में ट्रंप ने कहा कि उनके प्रशासन ने भारत और पाकिस्तान के बीच पूर्ण और तत्काल संघर्षविराम कराने में मदद की है और उन्हें लगता है कि यह स्थायी संघर्षविराम है, जिससे बहुत सारे परमाणु हथियारों वाले दो देशों के बीच एक खतरनाक संघर्ष समाप्त हो गया है.

उन्होंने भारत-पाकिस्तान को ‘एक दूसरे पर बहुत ज़्यादा दबाव बनाने वाले’ देश बताया और कहा कि ऐसा लग रहा था कि वे रुकने वाले नहीं हैं.’

व्यापार को एक महत्वपूर्ण जरिया बताते हुए ट्रंप ने कहा कि भारत और पाकिस्तान ने कई कारणों से युद्ध रोका है, लेकिन व्यापार एक बड़ा कारण है. उन्होंने कहा, ‘हम पाकिस्तान और भारत के साथ बहुत ज़्यादा व्यापार करने जा रहे हैं. हम अभी भारत के साथ बातचीत कर रहे हैं. हम जल्द ही पाकिस्तान के साथ बातचीत करने जा रहे हैं.’

आंशिक परमाणु युद्ध की संभावना जाहिर करते हुए ट्रंप ने कहा, ‘हमने एक परमाणु संघर्ष को रोका. मुझे लगता है कि यह एक बुरा परमाणु युद्ध हो सकता था. लाखों लोग मारे जा सकते थे. इसी कारण मुझे इस पर बहुत गर्व है.’

उन्होंने स्थिति की गंभीरता को समझने और लड़ाई को समाप्त करने के लिए ‘बुद्धिमत्ता’ और ‘धैर्य’ के लिए भारत और पाकिस्तान के नेतृत्व को धन्यवाद दिया. साथ ही उपराष्ट्रपति वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के प्रयासों की सराहना की.

पीएम मोदी ने संघर्षविराम को लेकर अमेरिका का कोई उल्लेख नहीं किया

वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने राष्ट्रीय संबोधन में संघर्षविराम के लिए भारत के सहमत होने के कारणों को स्पष्ट करते हुए अमेरिका का उल्लेख नहीं किया.

पीएम मोदी ने कहा, ‘भारत ने पहले तीन दिनों में ही पाकिस्तान को इतना नुकसान पहुंचाया, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी. इसलिए भारत की आक्रामक कार्रवाई के बाद पाकिस्तान बचने के रास्ते तलाशने लगा. पाकिस्तान दुनिया से तनाव कम करने की गुहार लगा रहा था. और भारी नुकसान झेलने के बाद पाकिस्तान की सेना ने 10 मई की दोपहर को हमारे डीजीएमओ से संपर्क किया.’

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने ‘अपील की और कहा कि वह आगे किसी भी तरह की आतंकी गतिविधि या सैन्य दुस्साहस में शामिल नहीं होगा. भारत ने इस पर विचार किया.’

जहां ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने परमाणु संघर्ष रोक दिया है. वहीं, पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत किसी भी परमाणु ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेगा.

मालूम हो कि 10 मई को सचिव रुबियो ने घोषणा की थी कि अमेरिका और भारत ‘तटस्थ स्थल पर मुद्दों के व्यापक सेट पर बातचीत शुरू करने के लिए सहमत हुए हैं.’

इसके बाद ट्रंप ने यह भी कहा कि वह कश्मीर विवाद का ‘समाधान‘ खोजने के लिए दोनों देशों के साथ काम करेंगे.

भारतीय आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान के साथ कोई बातचीत की योजना नहीं है. हालांकि, भारतीय आधिकारिक सूत्रों ने इस बात से इनकार किया कि पाकिस्तान के साथ ऐसी कोई बातचीत की योजना बनाई जा रही है.

सीमा पार आतंकवाद और पीओके के मुद्दों के समाधान तक भारत पाकिस्तान से बात नहीं करेगा- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत तब तक पाकिस्तान के साथ बातचीत नहीं करेगा जब तक कि सीमा पार आतंकवाद और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के मुद्दों का समाधान नहीं हो जाता.

गौरतलब है कि भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसमें पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ढांचे से जुड़े नौ ठिकानों को निशाना बनाया गया था.

हवाई और मिसाइल हमले 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की जवाबी कार्रवाई के तौर पर किए गए थे, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे, जो ज़्यादातर पर्यटक थे.

इसके बाद पाकिस्तान की ओर से जवाबी कार्रवाई की गई और अगले कुछ दिनों में ड्रोन घुसपैठ, हवाई रक्षा मुठभेड़ और गोलीबारी सहित सैन्य तनाव में तेज़ वृद्धि देखी गई.

जैसे-जैसे दो परमाणु-सशस्त्र पड़ोसियों के बीच व्यापक संघर्ष की संभावना पर वैश्विक चिंता बढ़ती गई, कूटनीतिक जुड़ाव बढ़ता गया.

ट्रंप ने 10 मई को सोशल मीडिया के माध्यम से अमेरिका की मध्यस्थता में युद्ध विराम की घोषणा की.

तीन दिन बाद भारत और पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशकों (डीजीएमओ) ने बातचीत की और युद्धविराम को बनाए रखने और आगे के सैन्य टकराव से बचने पर सहमति व्यक्त की.