भारत ने तुर्की हवाई अड्डा सेवा कंपनी की सुरक्षा मंज़ूरी रद्द की, राजदूत की नियुक्ति स्थगित

भारत-पाक संघर्ष के दौरान इस्लामाबाद को तुर्की के समर्थन बीच भारत ने 'राष्ट्रीय सुरक्षा' कारणों से एक तुर्की हवाई अड्डा सेवा फर्म को दी गई सुरक्षा मंज़ूरी रद्द कर दी. साथ ही वह समारोह भी स्थगित कर दिया गया जिसमें तुर्की के राजदूत को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना परिचय देना था.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: हाल ही में थमे भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान इस्लामाबाद को तुर्की के समर्थन के कुछ सार्वजनिक विरोध के बीच नई दिल्ली ने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ कारणों से एक तुर्की हवाई अड्डा सेवा फर्म को दी गई अपनी सुरक्षा मंजूरी रद्द कर दी. साथ ही वह समारोह भी स्थगित कर दिया गया जिसमें तुर्की के राजदूत को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना परिचय पत्र प्रस्तुत करना था.

इस बी, केंद्र सरकार द्वारा संचालित तीन विश्वविद्यालयों ने भी तुर्की संस्थानों के साथ सक्रिय समझौता ज्ञापन (एमओयू) को निलंबित कर दिया है, जिनमें से दो ने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों’ को इसका कारण बताया है.

गुरुवार (15 मई) को केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा कि नागरिक एवं विमानन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) ने तुर्की स्थित सेलेबी एविएशन फर्म और उसकी संबद्ध कंपनियों को दी गई सुरक्षा मंजूरी ‘राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित आधार पर’ रद्द कर दी है.

समाचार एजेंसी पीटीआई द्वारा प्रसारित बीसीएएस नोटिस में कहा गया है कि सेलेबी को ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसी के रूप में उसकी भूमिका के लिए नवंबर 2022 में सुरक्षा मंजूरी दी गई थी.

नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘हमारे देश की सुरक्षा से बढ़कर कुछ भी नहीं है तथा राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोपरि है और इससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता.’

इसमें कहा गया है कि प्रभावित हवाई अड्डों पर यात्रियों और माल की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था की जा रही है.

सेलेबी की भारत शाखा ने एक बयान जारी कर कहा कि वह भारत में अपने स्वामित्व और परिचालन के बारे में सभी भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत आरोपों का स्पष्ट रूप से खंडन करती है.

इसने उन पोस्टों पर प्रतिक्रिया दी जिनमें कहा गया था कि दिल्ली हवाई अड्डे के कार्गो टर्मिनल पर सुरक्षा संबंधी चिंताओं का झूठा सुझाव दिया गया है, और कहा कि इसकी सुविधाओं का संचालन और लेखा-परीक्षण बीसीएएस सहित भारतीय प्राधिकारियों द्वारा किया जाता है.

यह कहते हुए कि यह विभिन्न देशों के अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बहुमत में स्वामित्व में है, सेलेबी की भारत शाखा ने लिखा कि यह ‘किसी भी मानक से एक तुर्की संगठन नहीं है.’ और यह वास्तव में एक भारतीय उद्यम है, जिसका नेतृत्व और प्रबंधन भारतीय पेशेवरों द्वारा किया जाता है, जो देश में निवेश करते हैं और इसके विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं.’

इसने इस बात से भी इनकार किया कि तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगां की बेटी सेलेबी के मूल संगठन में शेयरधारक है.

राजदूत की नियुक्ति स्थगित

तुर्की के साथ नाराजगी दर्शाने के अभियान को आधिकारिक स्वीकृति मिल गई है, क्योंकि तुर्की के राजदूत पद के लिए होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के साथ-साथ चार अन्य देशों के राजदूतों के शपथ ग्रहण समारोह को गुरुवार को अचानक स्थगित कर दिया गया.

तुर्की ने मार्च में अली एर्सोय को भारत में अपना राजदूत नियुक्त किया था.

शाम 4 बजे, एसरॉय के साथ-साथ बांग्लादेश, थाईलैंड, सेंट किट्स और नेविस तथा कोस्टा रिका के राजदूतों को मुर्मू के समक्ष अपने परिचय-पत्र प्रस्तुत करने थे, यह एक ऐसा कार्यक्रम था जो उनकी नियुक्ति की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक था. हालांकि, यह कार्यक्रम तीन घंटे पहले ही स्थगित कर दिया गया, विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर इसे ‘शेड्यूल’ संबंधी मुद्दों के कारण स्थगित कर दिया.

हालांकि, अचानक कार्यक्रम में हुए बदलाव का कारण अभी भी अस्पष्ट है, खासकर यह देखते हुए कि इस तरह के समारोह आमतौर पर कई सप्ताह पहले तय किए जाते हैं, जिसमें एक औपचारिक प्रस्तुति के लिए कई दूतों को एक साथ रखा जाता है.

सरकारी अधिकारियों ने स्थगन का कारण तुर्की को नहीं बताया, लेकिन अन्य हालिया घटनाक्रमों के संदर्भ में निर्णय के समय ने एक स्पष्ट संदेश दिया.

संयोगवश, सूत्रों ने पुष्टि की है कि भारत ने तुर्की के समक्ष आधिकारिक तौर पर कोई विरोध दर्ज नहीं कराया है.

विश्वविद्यालयों ने तुर्की संस्थानों के साथ एमओयू रद्द किए

गुरुवार को दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया ने कहा कि वह ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से’ तुर्की सरकार से संबद्ध संस्थानों के साथ सभी समझौता ज्ञापनों को निलंबित कर रहा है. हैदराबाद स्थित मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय ने भी तुर्की के साथ सभी समझौता ज्ञापनों को रद्द कर दिया.

एक दिन पहले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने तुर्की के इनोनू विश्वविद्यालय के साथ फरवरी में हस्ताक्षरित पांच साल के समझौता ज्ञापन को भी ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों’ का हवाला देते हुए निलंबित कर दिया था.

इस बीच, हाल के भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान अंकारा द्वारा पाकिस्तान को दिए गए समर्थन के मद्देनजर भारतीयों से तुर्की की यात्रा न करने या तुर्की के सामानों का बहिष्कार करने का आह्वान किया गया है.

इसी प्रकार की भावनाएं अज़रबैजान के खिलाफ भी व्यक्त की गईं, जिसने संघर्ष के दौरान पाकिस्तान के साथ एकजुटता व्यक्त की थी.

पीटीआई के अनुसार, मेक माई ट्रिप ने बताया है कि पिछले सप्ताह की तुलना में तुर्की और अजरबैजान के लिए बुकिंग में 60% की गिरावट आई है, तथा इसी अवधि के दौरान कैंसलेशन में 250% की वृद्धि हुई है.

इसी दौरान तुर्की के सार्वजनिक प्रसारक टीआरटी वर्ल्ड का एक्स अकाउंट भी बुधवार को भारत में बंद कर दिया गया था, हालांकि बाद में उसी दिन इसे बहाल कर दिया गया.

भारत-पाक संघर्ष के दौरान तुर्की ने पाकिस्तान का समर्थन किया था

22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारत द्वारा 7 मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में ‘आतंकवादी बुनियादी ढांचे’ पर मिसाइल हमले किए जाने के एक दिन बाद तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप ताय्यप एर्दोगां ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को फोन किया, ‘पाकिस्तान के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की’ और ‘हमले में शहीद हुए पाकिस्तानियों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की.’

देश के संचार निदेशालय के अनुसार, ‘इस बात पर गौर करते हुए कि तुर्की इस प्रक्रिया में पाकिस्तान द्वारा अपनाई गई शांत और संयमित नीति का समर्थन करता है.’, एर्दोगां ने कहा कि ‘जम्मू और कश्मीर आतंकी हमले की निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए पाकिस्तान का प्रस्ताव उचित है.’ इस्लामाबाद ने पहलगाम हमले की अंतरराष्ट्रीय जांच का प्रस्ताव रखा था.

एर्दोगां ने बुधवार को शरीफ की एक पोस्ट के जवाब में एक्स पर लिखा कि ‘तुर्की और पाकिस्तान के बीच भाईचारा ‘सच्ची दोस्ती के सर्वोत्तम उदाहरणों में से एक है.’

एर्दोगां ने कहा, ‘हम पाकिस्तानी राज्य की समझदारीपूर्ण, धैर्यपूर्ण नीति की सराहना करते हैं, जो विवादों को सुलझाने में बातचीत और समझौते को प्राथमिकता देती है.’ उन्होंने आगे कहा कि ‘हम अच्छे और बुरे समय में आपके साथ खड़े रहेंगे.’

केंद्रीय रक्षा मंत्रालय ने पिछले सप्ताह कहा था कि भारत ने लगभग 36 स्थानों पर पाकिस्तान द्वारा छोड़े गए कई ड्रोनों को रोका है और उनके मलबे पर आधारित ‘प्रारंभिक रिपोर्ट’ से पता चलता है कि वे तुर्की के अस्सिसगार्ड सोंगार ड्रोन थे.

तुर्की उन देशों में शामिल था जिसने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की थी, और उसी दिन एक कड़े बयान में कहा था कि उसे इस घटना के बारे में जानकर बहुत दुख हुआ है और वह इस जघन्य हमले की निंदा करता है.

हाल के वर्षों में भारत-तुर्की संबंधों में तनाव की एक अन्य वजह संयुक्त राष्ट्र महासभा और पाकिस्तानी संसद में कश्मीर पर एर्दोगां के बयान रहे हैं.

2019 में, जब नई दिल्ली ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया, उसके बाद एर्दोगां ने पाकिस्तान की संसद की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए कहा था कि भारत का यह कदम मौजूदा स्थिति को और खराब करता है, कश्मीरी लोगों की स्वतंत्रता और अधिकारों का हनन करता है और इससे किसी को कोई लाभ नहीं होगा.

बाद में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी इसे दोहराया और यह भी कहा कि अंकारा ‘संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के ढांचे के भीतर और विशेष रूप से कश्मीर के लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप बातचीत के माध्यम से इस मुद्दे को हल करने का पक्षधर है.’

भारत ने इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि तुर्की को अन्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करना सीखना चाहिए तथा अपनी नीतियों पर अधिक गहराई से विचार करना चाहिए.

नई दिल्ली अपने और पाकिस्तान के बीच सभी विवादों को पूरी तरह से द्विपक्षीय मामला मानती है और कहती है कि 1972 का शिमला समझौता इसके लिए आधार प्रदान करता है. दूसरी ओर, इस्लामाबाद कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की कोशिश कर रहा है.

हालांकि, एर्दोगां ने 2024 के संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान कश्मीर का उल्लेख नहीं किया – ऐसा कुछ उन्होंने पिछले चार वर्षों में किया था – और यहां तक ​​कि जी 20 शिखर सम्मेलन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की थी, जहां मोदी के कार्यालय ने कहा कि एर्दोगां ने दक्षिणी तुर्की में 2023 के भूकंप के बाद भारतीय सहायता के लिए मोदी को धन्यवाद दिया.