नई दिल्ली: पाकिस्तान के मंत्रिमंडल ने मंगलवार (20 मई) को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिसमें सेना प्रमुख आसिम मुनीर को हाल ही में संपन्न भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष के दौरान उनके नेतृत्व के मद्देनजर फील्ड मार्शल के शीर्ष पद पर पदोन्नत करने का प्रस्ताव दिया गया था.
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की सरकारी मीडिया ने इस संबंध में जानकारी दी है और सेना प्रमुख ने मंत्रिमंडल के फैसले को स्वीकार कर लिया है.
मंत्रिमंडल ने पाकिस्तान के वायुसेना प्रमुख की सेवाएं भी उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद भी जारी रखने का फैसला किया है, जो अगले साल की शुरुआत में खत्म होना था.
पाकिस्तान के सरकारी मीडिया पीटीवी ने कहा है कि इस महीने की शुरुआत में भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान ‘देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दुश्मन (भारत) को हराने’ के साथ ही उनके ‘अद्वितीय नेतृत्व’ के लिए सेना प्रमुख मुनीर को उनके नए पद फील्ड मार्शल पर पदोन्नत करने का फैसला किया गया है.
उर्दू में इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस डिपार्टमेंट के माध्यम से जारी एक बयान में सेना प्रमुख मुनीर ने फील्ड मार्शल की अपनी पदोन्नति को ‘पूरे देश, पाकिस्तान के सशस्त्र बलों, विशेष रूप से नागरिक और सैन्य शहीदों और गाजियों’ को समर्पित किया.
मालूम हो कि फील्ड मार्शल पाकिस्तानी सेना में प्राप्त होने वाला सर्वोच्च पद है.
यह एक पांच सितारा औपचारिक रैंक है और इसे पाने वाले एकमात्र अन्य पाकिस्तानी सैनिक देश के पूर्व नेता अयूब खान हैं, जिनके संबंध में रॉयटर्स से बात करते हुए एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि 1965 में उन्होंने खुद को ही यह सम्मान दिया था.
उल्लेखनीय है कि खान ने 1958 में तख्तापलट कर सत्ता हथिया ली थी. अधिकारी ने यह भी बताया था कि यह रैंक आमतौर पर किसी को उसके ‘असाधारण नेतृत्व और युद्धकालीन उपलब्धि’ के लिए दी जाती है.
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, इस पद वाले लोग ब्रिटिश प्रणाली के तहत, जिस पर भारतीय और पाकिस्तानी सेनाएं आधारित हैं, सेना की ‘सक्रिय सूची’ में आजीवन बने रहते हैं.
इस बीच पाकिस्तान की कैबिनेट ने यह भी फैसला किया कि देश के वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ज़हीर अहमद बाबर सिद्धू, अगले साल अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी अपनी क्षमता में काम करेंगे.
उनका कार्यकाल विस्तार ऐसे समय में हुआ है जब इस्लामाबाद ने दावा किया है कि पाकिस्तानी सेना ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान पांच भारतीय लड़ाकू विमानों को मार गिराया था.
मालूम हो कि इस संबंध में भारतीय वायुसेना ने यह बताने से इनकार कर दिया था कि संघर्ष के दौरान उन्हें कितना नुकसान हुआ और केवल इतना कहा कि ‘नुकसान लड़ाई का एक हिस्सा है’ और भारत ने अपने लक्ष्य आतंकी शिविरों को नष्ट करने का अपना उद्देश्य हासिल कर लिया है.
इससे पहले पाकिस्तान की संघीय विधायिका ने नवंबर में एक कानून पारित किया था, जिसमें देश के सेवा प्रमुखों के वैधानिक कार्यकाल को तीन साल से बढ़ाकर पांच साल कर दिया गया था. इसी के तहत वायुसेना प्रमुख को विस्तार मिला था.
भारत के ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में पाकिस्तान द्वारा किए गए ऑपरेशन बुनियान-उन-मरसूस के दौरान ‘पाकिस्तानी सशस्त्र बलों के अधिकारियों और सैनिकों, गाजियों, शहीदों और विभिन्न क्षेत्रों के पाकिस्तानी नागरिकों’ को उनकी ‘मूल्यवान सेवाओं’ के लिए पुरस्कारों से सम्मानित करने का भी फैसला किया है.
गौरतलब है कि भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में ‘आतंकवादी इंफ्रास्ट्रक्चर’ वाले नौ स्थलों पर मिसाइल हमले करके 7 मई की सुबह ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की थी.
