बांग्लादेश: सेना प्रमुख का दिसंबर में चुनाव कराने पर ज़ोर, कहा- स्थिरता के लिए निर्वाचित सरकार ज़रूरी

बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार-उज़-ज़मां ने ढाका छावनी में अधिकारियों के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि कि केवल एक निर्वाचित सरकार ही देश में राजनीतिक स्थिरता ला सकती है.

बांग्लादेशी सेना प्रमुख जनरल जनरल वकार-उज़-ज़मां. (फोटो: चीफ एडवाइजर जीओबी/फेसबुक)

नई दिल्ली: बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार-उज़-ज़मां ने अपने अधिकारियों से कहा है कि इस साल दिसंबर तक आम चुनाव करा लिए जाने चाहिए.

रिपोर्ट के मुताबिक, सेना प्रमुख ने बुधवार (21 मई) को ढाका छावनी में अधिकारियों के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि कि केवल एक निर्वाचित सरकार ही देश में राजनीतिक स्थिरता ला सकती है.

इस कार्यक्रम में कुछ अधिकारियों ने व्यक्तिगत और कुछ ने वर्चुअल रूप से भाग लिया. ये अधिकारी संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में दुनिया भर में तैनात हैं.

कई बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट्स ने सूत्रों का हवाला देते हुए लिखा है कि सेना प्रमुख ने कहा कि 2025 के अंत तक आम चुनाव होने चाहिए.

डेली स्टार से बातचीत में एक सूत्र ने कहा, ‘बांग्लादेश को राजनीतिक स्थिरता की जरूरत है. यह केवल निर्वाचित सरकार के जरिए ही संभव है, अनिर्वाचित निर्णयकर्ताओं के जरिए नहीं.’

इस समय सेना प्रमुख की टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले साल अगस्त में सत्ता संभालने वाली अंतरिम सरकार ने अभी तक देश में चुनाव की तारीख की घोषणा नहीं की है.

मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने अब तक कहा है कि दिसंबर 2025 और जून 2026 के बीच कभी भी चुनाव हो सकते हैं, लेकिन उन्होंने कोई समयसीमा तय नहीं की है.

उल्लेखनीय है कि सेना ने बांग्लादेशी राजनीति में एक जटिल भूमिका निभाई है. सेना ने यहां 1990 तक 15 साल और फिर दिसंबर 2008 तक दो साल तक सीधे शासन किया है.

हालांकि, शेख हसीना सरकार में सेना राजनीतिक क्षेत्र से बाहर रही. हसीना को सत्ता से हटाने में सेना प्रमुख की अहम भूमिका थी.

उस दौरान सैनिकों को सड़कों पर मौजूद प्रदर्शनकारियों पर गोली न चलाने का निर्देश दिया गया था, हसीना सैन्य विमान से भारत पहुंची, जहां उन्होंने शरण ली. हसीना के निर्वासन के तुरंत बाद वकर-उज़-ज़मान ने घोषणा की कि अंतरिम सरकार बनाई जाएगी.

ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, जनरल ने ज़ोर देकर कहा था कि ‘देश के भविष्य को आकार देने का अधिकार एक निर्वाचित सरकार का है’.

उल्लेखनीय है कि हसीना शासन के दौरान राजनीतिकरण के आरोपों के कारण पुलिस की बदनामी हुई थी और वह कानून-व्यवस्था बनाए रखने में असमर्थ रही थी, इसलिए सेना को मजिस्ट्रेटी अधिकार दे दिए गए.

हालांकि, बांग्लादेश के सेना प्रमुख ने चिंता जताई कि ऐसी भूमिका सेना की दीर्घकालिक रक्षा तैयारियों को कमजोर कर सकती है.

उन्होंने कहा, ‘सेना राष्ट्र की रक्षा के लिए है, पुलिसिंग के लिए नहीं. हमें चुनाव के बाद बैरकों में लौट जाना चाहिए.’

सेना प्रमुख ने 30 मिनट के संबोधन के बाद अधिकारियों के सवालों के जवाब भी दिए.

उन्होंने कथित तौर पर म्यांमार के रखाइन राज्य के साथ प्रस्तावित ह्यूमैनिटेरियन कॉरिडोर की आलोचना की और इसे अस्वीकार्य बताया.

मीडिया रिपोर्टों में उनके हवाले से कहा गया कि वहां कोई कॉरिडोर नहीं होगा. बांग्लादेश की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है.

उन्होंने आगे कहा कि केवल लोगों द्वारा चुनी गई सरकार ही ऐसे फैसले ले सकती है.

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि कॉरिडोर योजना बांग्लादेश को एक खतरनाक छद्म संघर्ष में धकेल सकती है.