‘अमेरिका ने किया था फोन, लेकिन संघर्षविराम पर भारत-पाकिस्तान के बीच हुई सीधी बात’: एस. जयशंकर

दो सप्ताह पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम लागू कराने का दावा किया था. अब एक साक्षात्कार में जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के तनाव के बीच अमेरिका ने भारत से संपर्क तो किया था, लेकिन गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई बंद करने का मसला भारत और पाकिस्तान के बीच सीधे बातचीत से तय हुआ था.

नीदरलैंड में एक बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर और नीदरलैंड के विदेश मंत्री कैस्पर वेल्डकैंप. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान के साथ हाल ही में हुए संघर्ष के दौरान अमेरिका ने भारत से संपर्क किया था, लेकिन गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई बंद करने का मामला ‘भारत और पाकिस्तान के बीच सीधे बातचीत से तय हुआ था.’

रिपोर्ट के मुताबिक, डच समाचार प्रसारक एनओएस के साथ एक साक्षात्कार में जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान का इतिहास रहा है कि उसने भारत पर दबाव बनाने के लिए सीमा पार आतंकवाद का इस्तेमाल किया है.

भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम में अमेरिका की भूमिका को लेकर जयशंकर ने नीदरलैंड की अपनी हालिया यात्रा के दौरान कहा, ‘अमेरिका संयुक्त राज्य अमेरिका में था. मेरा मतलब है, जाहिर है कि वहां थे… अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो और उपराष्ट्रपति वेंस ने फोन किया था. रुबियो ने मुझसे बात की थी. वेंस ने हमारे प्रधानमंत्री से बात की थी. आप जानते हैं कि उनके पास अपना दृष्टिकोण था और वे हमसे बात कर रहे थे और वे पाकिस्तानियों से बात कर रहे थे, जैसा कि वास्तव में कुछ अन्य देश भी कर रहे थे. मेरा मतलब है कि संयुक्त राज्य अमेरिका इसमें अकेला नहीं था….’

उन्होंने आगे कहा, ‘जब दो देश संघर्ष में उलझे होते हैं तो यह स्वाभाविक है कि दुनिया के देश फोन करके पूछते हैं और चिंता जाहिर करने की कोशिश करते हैं और बताते हैं कि ऐसी स्थिति में वे क्या कर सकते हैं. लेकिन युद्ध विराम, गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई बंद करना कुछ ऐसा था जिस पर भारत और पाकिस्तान के बीच सीधे बातचीत हुई थी.’

ट्रंप का दावा- भारत-पाक तनाव व्यापार बंद करने की धमकी के चलते ख़त्म हुआ

मालूम हो कि इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच युद्ध विराम कराने का दावा किया था. तब से ट्रंप लगातार इसका श्रेय लेते रहे हैं, जिसमें यह भी शामिल है कि उन्होंने परमाणु संघर्ष से बचने के लिए व्यापार बंद करने की धमकी का सहारा लिया था.

हालांकि, इस मामले पर 13 मई को भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने युद्ध विराम के ट्रंप के बयान को सार्वजनिक रूप से खारिज़ कर दिया था और कहा था कि सैन्य तनाव को रोकने का फैसला भारतीय सैन्य कार्रवाई के बाद लिया गया, जिसके कारण पाकिस्तान को पीछे हटना पड़ा था.

जयशंकर ने एनओएस के साथ साक्षात्कार में इसे दोहराया.

जयशंकर ने कहा, ‘हमारे पास एक-दूसरे से बात करने के लिए एक तंत्र है, एक हॉटलाइन है. 10 मई को पाकिस्तानी सेना ने संदेश भेजा कि वे गोलीबारी बंद करने के लिए तैयार हैं और हमने उसी के अनुसार जवाब दिया.’

जयशंकर ने आगे कहा, ‘पाकिस्तान ने एक कट्टरपंथी, मैं कहूंगा कि चरमपंथी धार्मिक एजेंडे को आगे बढ़ाया है, जिसके तहत सीमा पार आतंकवाद का इस्तेमाल करके हम पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है. यह उनका इतिहास रहा है. अब अगर आप मुझसे पूछें कि हम इससे कैसे निपटेंगे? हम पाकिस्तानियों के साथ द्विपक्षीय रूप से इससे निपटने का प्रस्ताव रखते हैं. यह कुछ ऐसा है जिसे हमें और पाकिस्तान को आमने-सामने बैठकर सुलझाना होगा.’

जयशंकर ने यह भी कहा कि 1947 से पाकिस्तान ने कश्मीर के एक हिस्से पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है.

जयशंकर ने कहा, ‘आप जानते हैं कि कश्मीर भारत का हिस्सा है. कोई भी देश अपने भूभाग के किसी हिस्से पर बातचीत नहीं करता. इसलिए हमारे लिए कश्मीर भारत का हिस्सा है. कश्मीर का एक हिस्सा आज 1947-48 से पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है. इसलिए हम… आप जानते हैं कि हम उनसे इस बारे में चर्चा करना चाहेंगे कि वे कब उस हिस्से को छोड़ना चाहते हैं और उसे वापस सौंपना चाहते हैं.’

जब साक्षात्कारकर्ता ने पूछा कि क्या ट्रंप की इसमें कोई भूमिका नहीं है, तो जयशंकर ने कहा, ‘यह हमारे और पाकिस्तान के बीच की बात है. अब उनके प्रस्ताव का तर्क यह लगता है कि अगर आप उन संघर्षों को अलग रख दें – उन्हें संघर्ष पसंद नहीं है – तो आप दोनों देश मिलकर अमीर बन सकते हैं.’

‘भारत की सुरक्षा चुनौतियां कहीं ज़्यादा ख़तरनाक हैं’

जयशंकर ने कहा कि भारत की सुरक्षा चुनौतियां यूरोपीय देशों की तुलना में कहीं अधिक ख़तरनाक हैं और इसलिए भारत को सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी.

जयशंकर के अनुसार, ‘आखिरकार विकास मजबूत बुनियादी ढांचे से आता है. आप जानते हैं, मेरा मतलब है कि हमारे पास जो कुछ भी था, पिछले कुछ हफ्तों में संघर्ष था, लेकिन मुझे लगता है कि आप भारत के विकास के मूल सिद्धांतों को जानते हैं, तथ्य यह है कि आज हम 4 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहे हैं, जैसा कि मैं कहता हूं कि हम आने वाले दशकों में 6 से 8% की विकास दर की बैंडविड्थ में हैं, हमारे पास हमारे पक्ष में बहुत अच्छी जनसांख्यिकी है.’

जयशंकर ने पहलगाम हमले पर भी बात की और कहा कि इसका उद्देश्य धार्मिक मतभेद पैदा करना था.

जयशंकर ने कहा, ‘इसकी शुरुआत इसलिए हुई क्योंकि यह भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में एक बहुत ही बर्बर आतंकवादी हमले से शुरू हुआ था, जहां 26 पर्यटकों की उनके परिवारों के सामने उनकी आस्था का पता लगाने के बाद हत्या कर दी गई थी और यह इस तरह से किया गया था कि इसका उद्देश्य पर्यटन को नुकसान पहुंचाना था जो कश्मीर की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है और जानबूझकर धार्मिक मतभेद पैदा करना था.’

उन्होंने आगे कहा, ‘और इसे समझने के लिए आपको यह भी देखना होगा कि पाकिस्तान की तरफ़ आपके पास एक पाकिस्तानी नेतृत्व है, ख़ास तौर पर सेना प्रमुख, जो बहुत ज़्यादा धार्मिक दृष्टिकोण से प्रेरित है. इसलिए जो विचार व्यक्त किए गए और जो व्यवहार किया गया, उनके बीच स्पष्ट रूप से कुछ संबंध है.’

जयशंकर ने बताया कि भारत जानता है कि हमलावर लश्कर-ए-तैयबा और आतंकवादी समूहों के कमांड सेंटर से जुड़े थे, जिन पर 7 मई को हमला किया गया था.