नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में चार मुस्लिम युवकों पर बीफ तस्करी का आरोप लगाते हुए 24 मई को हिंदुत्व संगठनों से जुड़े लोगों ने हमला किया था. अब इस मामले में पुलिस सूत्रों ने द वायर को जानकारी दी है कि जब्त किया गया मांस गाय का नहीं था.
हरदुआगंज थाने के एसएचओ धीरज कुमार ने पुष्टि की कि मथुरा की सरकारी लैब में जांच के लिए भेजे गए मांस के नमूनों की रिपोर्ट में गाय का मांस होने की बात नकार दी गई है.
बुधवार (28 मई) की सुबह अलीगढ़ पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि बीफ तस्करी के आरोप झूठे हैं.
थाना हरदुआगंज- अवगत कराना है कि दिनांक 24.05.25 को पनैठी साधु आश्रम मार्ग पर मीट व्यापारियों के साथ मारपीट की घटना कारित की गई, पुलिस टीम द्वारा तत्काल मौके पर पहुँचकर पीडितों को निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया, दोनो ही पक्षों की तत्काल एफआईआर पंजीकृत की गई, मारपीट करने वाले… pic.twitter.com/454L86TJlz
— ALIGARH POLICE (@aligarhpolice) May 28, 2025
गौरतलब है कि बीते 15 दिनों में यह दूसरी दफ़ा था जब इन्हीं आरोपियों के समूह ने पीड़ितों के मांस ढोने वाले वाहन को उसी जगह पर निशाना बनाया. इस बार हमलावरों ने वाहन में आग लगा दी और हाईवे को जाम कर दिया.
हमले का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें आरोपी पुलिस की मौजूदगी में एक पीड़ित को बेहोशी की हालत में पुलिस गाड़ी से घसीटते हुए बाहर निकालते नजर आ रहे हैं. जिन चार पीड़ितों की पहचान हुई है, वे हैं– अरबाज, अकील, कदीम और मुन्ना खान. सभी अलीगढ़ के अतरौली कस्बे के निवासी हैं. आरोप है कि भीड़ ने उन्हें निर्वस्त्र कर तेजधार हथियारों, ईंटों, लाठियों और रॉड से बेरहमी से पीटा.
एसएचओ धीरज कुमार ने द वायर को बताया कि इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से तीन के नाम पहले से एफआईआर में दर्ज थे, जबकि चौथे आरोपी की पहचान वीडियो फुटेज के आधार पर की गई.
इन आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है, जिनमें 191(3) (घातक हथियार के साथ दंगा), 109 (हत्या का प्रयास), 308(5) (मौत की धमकी देकर वसूली) और 310(2) (डकैती) शामिल हैं.
कहा जा रहा है कि चारों पीड़ितों को स्थानीय पुलिस ने बचाया था, लेकिन तब तक उन्हें गंभीर चोटें आ चुकी थी. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अमृत जैन ने मीडिया से कहा था कि पुलिस ने घायलों को अलीगढ़ के दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती कराया, जहां तीन की हालत गंभीर बनी हुई है.
हमले और फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद अब पीड़ितों के परिवारों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी हमलावरों को गिरफ्तार किया जाए और पीड़ितों के खिलाफ दर्ज ‘झूठी’ एफआईआर को वापस लिया जाए.
ज्ञात हो कि एक स्थानीय व्यक्ति विजय बजरंगी ने चार मुस्लिम युवकों के खिलाफ उत्तर प्रदेश गोवध निषेध अधिनियम, 1955 की धारा 3, 5 और 8 के तहत एफआईआर दर्ज करवाई थी. हालांकि, पुलिस ने विजय बजरंगी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन एफआईआर अभी तक रद्द नहीं की गई है.
अक़ील के भाई मोहम्मद साजिद ने कहा कि लैब रिपोर्ट से साफ हो गया है कि जब्त किया गया मांस ‘भैंस’ का था, इसलिए अब झूठे केस को खत्म किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, ‘सच अब पूरी दुनिया और मीडिया के सामने है. यह झूठा केस उन्होंने खुद को बचाने के लिए डाला था. अगर सरकार खुद इसे खत्म नहीं करती, तो इससे ज्यादा शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता. ये हमारे लिए दोहरी मार है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने हमसे वादा किया है कि यह फर्जी केस वापस लिया जाएगा.’
विपक्ष ने की थी निंदा
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी और एआईएमआईएम जैसे विपक्षी दलों के नेताओं ने इस हमले की निंदा की थी और बाद में पीड़ितों के परिवारों से मुलाकात की है.
27 मई को भीम आर्मी के प्रमुख और नगिना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने अलीगढ़ के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में घायलों से मुलाकात की. उन्होंने कहा, ‘यह सिर्फ एक कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि मुस्लिम और गरीब तबके के व्यापार पर संगठित हमला है.’
अक़ील के पिता सलीम ने पहले द वायर से बातचीत में कहा था कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के आने के बाद से उनका कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है और उनकी आजीविका खतरे में पड़ गई है. उन्होंने बताया था कि उनके पास लाइसेंस भी था और मांस का नमूना पुलिस को सौंपा भी गया था, इसके बावजूद उन पर हमला किया गया.
वहीं साजिद ने कहा, ‘ये जो गोरक्षक हैं, ये अब वसूली गिरोह बन चुके हैं. इन्हें सरकार का पूरा संरक्षण प्राप्त है. इस बार तो हमला पुलिस की मौजूदगी में हुआ. पुलिस की गाड़ी से उन्हें घसीटकर बाहर निकाला गया. भाजपा, आरएसएस, बजरंग दल- ये सब एक ही हैं. इन्होंने हिंदू-मुस्लिम के नाम पर समाज को बांटने के लिए गुंडागर्दी का माहौल बना दिया है. कोई गैरकानूनी काम नहीं किया जा रहा था, फिर भी हमला किया गया.’
(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)
