नई दिल्ली: भारत सरकार की ‘पुश बैक’ रणनीति के तहत पिछले छह महीनों में दिल्ली से लगभग 700 ‘अवैध’ प्रवासियों को बांग्लादेश वापस भेजा गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने पहलगाम आतंकी हमले के बाद अवैध प्रवासियों को वापस भेजने की प्रक्रिया में तेजी आई है.
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, पहलगाम हमले के बाद पूरी राजधानी में चलाए गए अभियान के तहत दिल्ली पुलिस ने 470 लोगों की पहचान अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के रूप में की और 50 अन्य लोगों की पहचान ऐसे विदेशियों के तौर पर की गई, जो अपने निर्धारित समय से अधिक समय तक देश में रह रहे हैं.
इसके बाद इन लोगों को हिंडन एयर बेस से त्रिपुरा के अगरतला ले जाया गया और फिर उन्हें जमीनी सीमा के रास्ते बांग्लादेश भेज दिया गया.
इस संबंध में दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बताया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पिछले साल उन्हें अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों और रोहिंग्या की पहचान करने और उन्हें हिरासत में लेने के लिए सत्यापन अभ्यास करने का निर्देश दिया था.
एक अधिकारी ने अखबार से कहा कि पिछले एक महीने में गाजियाबाद के हिंडन एयर बेस से करीब 3-4 विशेष उड़ानें सभी अवैध प्रवासियों को छोड़ने के लिए अगरतला गई हैं.
अखबार के एक सूत्र के अनुसार, ‘दिल्ली पुलिस ने करीब पांच अस्थायी होल्डिंग सेंटर बनाए हैं. उन्हें एफआरआरओ के साथ समन्वय करने और अवैध प्रवासियों को एक विशेष विमान से अगरतला एयरपोर्ट और पश्चिम बंगाल छोड़ने के लिए कहा गया है.’
भाजपा शासित राज्यों से कई प्रवासी हिरासत में लिए गए
दिल्ली के अलावा, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और गोवा सहित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्यों में कई अवैध प्रवासियों को हिरासत में लिया गया और बाद में उन्हें वापस भेजने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सौंप दिया गया.
द हिंदू के अनुसार, जनवरी से अब तक दिल्ली पुलिस ने सबसे अधिक अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को हिरासत में लिया है, जिनकी संख्या कम से कम 120 है. इसके बाद महाराष्ट्र (कम से कम 110), हरियाणा (80), राजस्थान (70), उत्तर प्रदेश (65), गुजरात (65) और गोवा (10) राज्य पुलिस हैं.
एक अधिकारी ने अखबार को बताया कि बीएसएफ ने पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश सीमा पर एक सेक्टर से 1,200 से अधिक बांग्लादेशियों को वापस भेजा है.
अधिकारी ने कहा, ‘ये गिरफ्तारियां उस समय की गईं जब वे जमीनी सीमा से भारत में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे. गृह मंत्रालय के आदेश पर उन्हें अगले दिनों में वापस भेज दिया गया.’
गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा ने 10 मई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि सरकार ने कानूनी रास्ता अपनाने के बजाय घुसपैठ को रोकने के लिए ‘पुश बैक’ तंत्र को लागू करने का फैसला किया है.
वहीं, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने इससे पहले 8 मई को भारत को एक पत्र भेजा था, जिसमें ‘देश में लोगों को ऐसे धकेले जाने पर चिंता जताई गई थी और भारत सरकार से स्थापित प्रत्यावर्तन तंत्र का पालन करने का आग्रह किया गया था.’
