अमेरिकी संघीय व्यापार अदालत ने ट्रंप के टैरिफ पर रोक लगाई, ह्वाइट हाउस करेगा अपील

न्यूयॉर्क स्थित यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने डोनाल्ड ट्रंप को आयात पर व्यापक टैरिफ लगाने से रोक दिया है. यह मुकदमा लिबर्टी जस्टिस सेंटर ने पांच छोटे व्यवसायों की ओर से दायर किया था. यह ट्रंप की टैरिफ नीति को दी गई पहली बड़ी क़ानूनी चुनौती मानी जा रही है.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस के रोज़ गार्डन में नए टैरिफ की घोषणा के एक कार्यक्रम के दौरान भाषण देते हुए. (फोटो: एपी/पीटीआई)

नई दिल्ली: न्यूयॉर्क के मैनहैटन स्थित एक अमेरिकी संघीय व्यापार अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक आपातकालीन अधिकार कानून के तहत आयात पर व्यापक टैरिफ लगाने से रोक दिया है.

ज्ञात हो कि ट्रंप ने इस वर्ष 2 अप्रैल को सभी प्रकार के आयात पर टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिससे वैश्विक व्यापार में भारी अनिश्चितता फैल गई थी.

कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद ह्वाइट हाउस की ओर से प्रतिक्रिया आई कि ‘गैर निर्वाचित जजों का यह अधिकार नहीं है कि वे यह तय कर सके कि राष्ट्रीय आपातकाल स्थिति से कैसे निपटा जाए.’ 

सरकार ने न्यूयॉर्क स्थित यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड के इस फैसले के खिलाफ अपील करने की घोषणा की.

तीन जजों की पीठ द्वारा दिया गया यह फैसला कई मुकदमों के बाद आया, जिनमें कहा गया था कि ट्रंप ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए व्यापार नीति को अपनी इच्छाओं पर आधारित बना दिया और आर्थिक अराजकता पैदा कर दी.

आमतौर पर अमेरिका में टैरिफ लगाने के लिए कांग्रेस की मंज़ूरी आवश्यक होती है, लेकिन ट्रंप का तर्क रहा है कि देश का व्यापार घाटा एक राष्ट्रीय आपातकाल है और इस आधार पर वे अकेले निर्णय ले सकते हैं.

यह मुकदमा लिबर्टी जस्टिस सेंटर ने उन पांच छोटे व्यवसायों की ओर से दायर किया था जो उन देशों से माल आयात करते हैं, जिन्हें टैरिफ के दायरे में लाया गया था. यह ट्रंप की टैरिफ नीति को दी गई पहली बड़ी कानूनी चुनौती मानी जा रही है. हालांकि, टैरिफ को लेकर अन्य कई कानूनी चुनौतियां अभी लंबित हैं.

(मूल रूप से डीडब्ल्यू पर प्रकाशित)