नई दिल्ली: विधानसभा चुनावों से पहले केरल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बुधवार (11 मार्च) का कोच्चि दौरा, जिसमें वे राज्य में कई परियोजनाओं का शुभारंभ कर रहे हैं, राजनीतिक रंग ले चुका है. राज्य के वाम मोर्चा सरकार के कुछ मंत्री और कांग्रेस के कुछ नेता विभिन्न कारणों से इस कार्यक्रम का बहिष्कार करने का निर्णय ले चुके हैं.
यह कार्यक्रम ऐसे समय हो रहा है जब सभी राजनीतिक दल आगामी विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों की सूची और रणनीति तय करने में व्यस्त हैं.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, कोच्चि के कलूर स्थित जवाहरलाल नेहरू इंटरनेशनल स्टेडियम में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री कई परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे. इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री और भाजपा के राज्य अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर भी मौजूद रहेंगे. इसी दिन स्टेडियम के अंदर बनाए गए दूसरे मंच से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के चुनाव अभियान की शुरुआत भी करेंगे.
हालांकि जिन परियोजनाओं का उद्घाटन होना है, उनके विज्ञापनों में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और उनके कैबिनेट सहयोगियों – लोक निर्माण विभाग मंत्री पीए मोहम्मद रियास, बिजली मंत्री के. कृष्णनकुट्टी, स्थानीय स्वशासन मंत्री एमबी राजेश – के साथ कांग्रेस नेताओं बेनी बेहनन, हिबी ईडन और विधायक उमा थॉमस के नाम भी शामिल थे, फिर भी कई नेता इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री विजयन और उनके कैबिनेट सहयोगियों ने कार्यक्रम से दूर रहने का फैसला किया है. राज्य सरकार का आरोप है कि केंद्र ने केरल के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री पीए मोहम्मद रियास को आधिकारिक कार्यक्रम से बाहर रखकर उनका अपमान किया है.
बहिष्कार का तात्कालिक कारण यह बताया गया कि केंद्र सरकार ने रियास को उस समारोह में शामिल नहीं किया, जिसमें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राजमार्ग‑66 (NH‑66) के दो बड़े प्रोजेक्ट शुरू करने वाले हैं: थलप्पडी–चेंगला खंड का छह-लेन निर्माण और कोझिकोड बाईपास (वेंगलम–रामनट्टुकरा) का छह-लेन विस्तार.
रियास ने पत्रकारों से कहा, ‘पहले भी राष्ट्रीय राजमार्ग के कई उद्घाटन हुए हैं और मैं उनमें शामिल हुआ हूं. यह सिर्फ राज्य के पीडब्ल्यूडी मंत्री को कार्यक्रम से दूर रखने की बात नहीं है, बल्कि यह केरल का अपमान करने जैसा है.’
हाईवे परियोजनाओं के श्रेय संबंधी विवाद
रियास ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार के दौरान केरल में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं लगभग ठप हो गई थीं. उनके अनुसार, ‘उस समय केरल में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का कार्यालय लगभग बंद होने की स्थिति में था और अधिकारी राज्य छोड़ने की तैयारी कर रहे थे.’
रियास ने कहा कि 2016 में जब एलडीएफ सरकार सत्ता में आई, तब मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मिलकर केरल में हाईवे परियोजनाओं को फिर से शुरू कराने की पहल की.
उन्होंने कहा कि परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण की लागत को केंद्र के साथ साझा करने का फैसला किया.
रियास ने कहा कि केरल सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण पर 5,800 करोड़ रुपये का योगदान दिया है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर को आधिकारिक कार्यक्रम में शामिल किया गया, जबकि राज्य के पीडब्ल्यूडी मंत्री को नजरअंदाज कर दिया गया.
इस आलोचना का जवाब देते हुए राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को आमंत्रित किया गया था. उन्होंने कहा, ‘अगर मुख्यमंत्री चाहते थे कि उनके दामाद भी कार्यक्रम में शामिल हों, तो उन्हें इसके बारे में पहले ही प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को सूचित करना चाहिए था.’
रियास की शादी मुख्यमंत्री विजयन की बेटी टी. वीणा विजयन से हुई है. जब यह बताया गया कि रियास मुख्यमंत्री के दामाद होने के साथ-साथ राज्य के पीडब्ल्यूडी मंत्री भी हैं, तो चंद्रशेखर ने कहा कि राज्य सरकार के प्रमुख होने के नाते मुख्यमंत्री को कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था.
दूसरे मंत्री भी कार्यक्रम से दूर
द हिंदू के अनुसार, बेनी बेहनन, जो फिलहाल दिल्ली में संसद सत्र में भाग लेने के लिए मौजूद हैं, ने कहा कि अगर वे राज्य में भी होते तो भी कार्यक्रम में शामिल नहीं होते क्योंकि वे ‘भाजपा के राजनीतिक अभियान का समर्थन नहीं करना चाहते.’
हालांकि हिबी ईडन ने कहा कि वे कार्यक्रम में शामिल होंगे क्योंकि यह ‘एक सांसद के रूप में उनका अधिकार’ है, हालांकि वे इसे भाजपा के चुनावी अभियान का हिस्सा बनाने के कदम का विरोध करते हैं.
ईडन ने यह भी कहा कि सरकारी कार्यक्रम में राजीव चंद्रशेखर की मौजूदगी ‘इस बात का संकेत है कि भाजपा इसे राजनीतिक कार्यक्रम बनाना चाहती है.’
उन्होंने यह भी आपत्ति जताई कि प्रधानमंत्री के भाषण का अनुवाद करने के लिए भाजपा के एक नेता को चुना गया है.
उमा थॉमस ने कहा कि वे इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगी क्योंकि उन्हें अपने विधानसभा क्षेत्र त्रिक्काकरा में एक अन्य कार्यक्रम में भाग लेना है.
बताया गया है कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, जिनका उस दिन कोई सार्वजनिक कार्यक्रम तय नहीं है, तिरुवनंतपुरम में ही रहेंगे. सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री के कोच्चि कार्यक्रम के बारे में ‘उचित रूप से जानकारी नहीं दी गई’, इसलिए मुख्यमंत्री इसमें शामिल नहीं होंगे.
स्थानीय स्वशासन मंत्री एमबी राजेश को कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था, लेकिन उन्होंने भी बहिष्कार की घोषणा कर दी. इसे भी पीडब्ल्यूडी मंत्री को आमंत्रित न किए जाने के विरोध के रूप में देखा जा रहा है.
राजेश ने कहा कि उन्हें कार्यक्रम का निमंत्रण ‘काफी देर से’ मिला और उनके कैबिनेट सहयोगी को आमंत्रित नहीं किया गया. उनका कहना है कि उन्हें कार्यक्रम की जानकारी सिर्फ 24 घंटे पहले दी गई. उन्होंने कहा, ‘इन कारणों ने कार्यक्रम में शामिल न होने के मेरे फैसले को प्रभावित किया.’
न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, राजेश ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले महीने तिरुवनंतपुरम में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान उन्हें स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप के अधिकारियों ने प्रवेश से पहले आधार कार्ड दिखाने को कहा था, जिसे उन्होंने अपमानजनक बताया.
