आईएमए ने आयुर्वेदिक चिकित्सा पाठ्यक्रम के साथ एमबीबीएस के प्रस्तावित एकीकरण की निंदा की

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने केंद्र सरकार के आयुर्वेदिक चिकित्सा पाठ्यक्रम के साथ एमबीबीएस को मिलाकर पाठ्यक्रम शुरू करने के प्रस्ताव की निंदा की और इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया. इसने कहा कि विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों के इस अवैज्ञानिक मिश्रण से डॉक्टरों या रोगियों को कोई लाभ नहीं होगा.

प्रतीकात्मक फोटो: सर्जरी करते डॉक्टर. (फोटो साभार: sswain_1999/Flickr, CC BY 2.0)

नई दिल्ली: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने जवाहरलाल इंस्टिट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (जेआईपीएमईआर), पुडुचेरी में एमबीबीएस (बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी) और बीएएमएस (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) कार्यक्रमों को मिलाकर एक पाठ्यक्रम शुरू करने के प्रस्ताव की आलोचना की है.

शुक्रवार (30 मई) को आईएमए ने इस कदम की निंदा की और इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया.

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, इसने कहा कि ‘विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों के इस अवैज्ञानिक मिश्रण से डॉक्टरों या रोगियों को कोई लाभ नहीं होगा.’

आईएमए ने एक बयान में कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र सरकार ने चिकित्सा प्रणालियों को अवैज्ञानिक तरीके से मिश्रित करने की अपनी योजना पर आगे बढ़ने का फैसला किया है. रिपोर्ट्स से पता चलता है कि एमबीबीएस और बीएएमएस को मिलाकर पहला एकीकृत कोर्स पुडुचेरी के प्रमुख संस्थान जेआईपीएमईआर में शुरू किया जाएगा.’

इससे पहले केंद्र सरकार ने आधुनिक और आयुर्वेदिक चिकित्सा को एक शैक्षणिक पाठ्यक्रम के अंतर्गत एकीकृत करने की अपनी योजना की घोषणा की थी.

आईएमए ने दोनों पाठ्यक्रमों को एकीकृत करने के कदम की आलोचना करते हुए कहा, ‘सभी प्रणालियों को उनकी मौलिक शुद्धता बनाए रखने दें. हाइब्रिड डॉक्टर तैयार करने से बचें जो केवल योग्य नकली डॉक्टर होंगे. भारतीय डॉक्टर कई पश्चिमी देशों में चिकित्सा सेवाओं की रीढ़ हैं. आईएमए सरकार के इस गलत कदम में कोई ठोस कारण या तर्क नहीं देख पा रहा है.’

आईएमए के बयान में कहा गया है, ‘सरकार को समझाने में विफल होने के बाद आईएमए के पास लोगों को विश्वास में लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. आईएमए देश से अपील करता है कि वह भविष्य की पीढ़ियों के स्वास्थ्य के लिए इस अविवेक का विरोध करें.’

इसमें चीन का उदाहरण भी दिया गया और कहा गया कि आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक चीनी दवाओं को मिलाने का प्रयास उस देश में विफल हो गया था.