नई दिल्ली: वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन के लिए ट्रस्ट बनाने के उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले का मथुरा के पुजारियों ने विरोध किया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, पुजारियों ने राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के इस कदम को ‘ब्राह्मण विरोधी’ करार दिया है.
इस संबंध में बुधवार (4 जून) को द टेलीग्राफ को मंदिर के पूर्व अध्यक्ष ताराचंद गोस्वामी ने बताया, ‘हमारे पूर्वजों की तपस्या के कारण ही भगवान यहां प्रकट हुए थे. मंदिर उनकी देखरेख में पूजनीय बन गया था, लेकिन अब सरकार इसके प्रबंधन को विनियमित करने के बहाने इसे अपने नियंत्रण में ले रही है.’
एक अन्य पुजारी विष्णु गोस्वामी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार पर जानबूझकर ब्राह्मणों की आजीविका छीनने का आरोप लगाया.
मालूम हो कि पिछले सप्ताह राज्य सरकार ने एक अध्यादेश पारित किया था, जिसके तहत श्री बांके बिहारीजी मंदिर न्यास ट्रस्ट की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया है. ट्रस्ट को मंदिर के प्रबंधन और इसके दैनिक अनुष्ठानों की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
गोस्वामी संप्रदाय के पुजारी पिछले कुछ सौ वर्षों से मंदिर का प्रबंधन कर रहे हैं. कुछ गोस्वामी पुजारियों ने कहा है कि अगर सरकार ने मंदिर का प्रबंधन अपने हाथ में लेने के अपने फैसले की समीक्षा नहीं की, तो वे मूर्ति को हटा देंगे, जिसके बारे में उनका कहना है कि इसे उनके पूर्वजों ने 1864 में स्थापित किया था.
इस मामले पर उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, जो पिछले कुछ दिनों से मथुरा में रह रहे हैं, ने कहा, ‘मंदिरों पर कब्जा करने वाली सरकार धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकती. सरकार लगातार गलत इरादे से धर्म को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है. सरकार गोस्वामी परंपरा के खिलाफ दिखती है और अपने आधिकारिक पुजारी रखना चाहती है.’
सरकार का कहना है कि मंदिर के चारों ओर 500 करोड़ रुपये की लागत से बांके बिहारी कॉरिडोर के निर्माण के लिए ट्रस्ट जरूरी है.
ज्ञात हो कि इस साल की शुरुआत में भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने मुस्लिम समुदाय और विपक्ष के सदस्यों के कड़े विरोध के बीच वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 पारित किया था. तब राज्यसभा में निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल ने बहस के दौरान कहा था कि औकाफ और ट्रस्ट में अंतर है. सिब्बल ने विधेयक के उस प्रावधान की आलोचना की थी, जिसमें कहा गया था कि केवल मुसलमान ही वक्फ के रूप में संपत्ति दान कर सकते हैं.
उन्होंने कहा था, ‘औकाफ में दान की गई जमीन भगवान की होती है. यह ट्रस्ट की नहीं होती. ट्रस्ट की तरह आप इसे कभी बेच नहीं सकते. वक्फ की संपत्ति धार्मिक उद्देश्यों के लिए दान की जा सकती है.’
