नई दिल्ली: ‘मैडलिन’ नामक एक जहाज़, जो गाजा के लिए ज़रूरी सहायता लेकर जा रहा था, उसे इज़रायली सेना ने रास्ते में रोक लिया है. अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक़, जहाज़ पर सवार यात्रियों को ज़बरन उतार लिया गया है और अब उन्हें इज़रायल ले जाया जा रहा है.
यह जहाज़ गाजा की नाकेबंदी को तोड़ने की एक कोशिश था और इसका नाम गाजा की एक मछुआरन के नाम पर रखा गया है. जब इसे रोका गया, तब यह गाजा से लगभग 160 किलोमीटर दूर था.
इस जहाज़ पर फ्रांसीसी डॉक्टर बैपटिस्ट आंद्रे, स्वीडिश जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग, डच कार्यकर्ता मार्को वैन रैन्स, अल जज़ीरा के पत्रकार ओमार फैयाद, फ्रांसीसी कार्यकर्ता पास्कल मॉरिएरास और रेवा वियार्ड, यूरोपीय संसद की फ़्रांसीसी-फ़िलिस्तीनी सदस्य रीमा हसन, स्पेनिश कार्यकर्ता सर्जियो तोरीबियो, तुर्की कार्यकर्ता सुवैब ओर्दु, ब्राज़ीली कार्यकर्ता थियागो एविला, फ्रांसीसी पत्रकार यानिस मम्दी और जर्मन कार्यकर्ता यासेमिन अकार सवार थे.
थियागो एविला और ग्रेटा थनबर्ग उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने जहाज़ को रोके जाने की स्थिति में पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो जारी किए हैं.
Vídeo gravado por Thiago Ávila caso fosse sequestrado pelos sionistas pic.twitter.com/wt5W4jVRtQ
— Instituto Brasil-Palestina 🇵🇸 (@Ibraspal) June 9, 2025
Greta Thunberg has been kidnapped by lsrael. #Madleen pic.twitter.com/9sdmYkutLV
— Muhammad Smiry 🇵🇸 (@MuhammadSmiry) June 9, 2025
फ़्रीडम फ़्लोटिला कोएलिशन ने एक बयान में कहा कि उनके जहाज़ को ‘अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में इज़रायली सेना ने हमला कर जबरन रोका.’
बयान में कहा गया, ‘जहाज़ पर अवैध रूप से कब्ज़ा किया गया, निहत्थे नागरिक चालक दल को अगवा कर लिया गया और उसमें लदे सामान — जिसमें बच्चों के लिए दूध पाउडर, खाना और दवाइयां शामिल थीं — ज़ब्त कर लिया गया.’
फ़्रीडम फ़्लोटिला कोएलिशन एक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन है, जो फ़िलिस्तीन के गाजा पट्टी पर लगे इज़रायली नाकाबंदी को चुनौती देने के लिए शांतिपूर्ण समुद्री अभियानों का आयोजन करता है. इसका उद्देश्य गाजा में मानवीय सहायता पहुंचाना और इज़रायल द्वारा लगाए गए ‘अवैध’ समुद्री प्रतिबंधों के खिलाफ आवाज़ उठाना है.
मानवाधिकार वकील और फ़्रीडम फ़्लोटिला की आयोजक हुऔदा अर्राफ़ ने द गार्डियन को बताया कि इज़रायल के पास मैडलिन पर सवार लोगों को हिरासत में लेने का कोई वैध अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि यह जब्ती अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन है और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) के उस आदेश के भी खिलाफ है जिसमें गाजा को बिना किसी बाधा के मानवीय सहायता पहुंचाने को कहा गया है.
बयान में यह भी कहा गया कि मदद पहुंचाने या नाकेबंदी को चुनौती देने के लिए जहाज़ पर सवार लोगों को अपराधी नहीं ठहराया जा सकता. अर्राफ़ ने कहा, ‘यह हिरासत मनमानी, गैरकानूनी है और इसे तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए.’
संयुक्त राष्ट्र में कब्जे वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों की विशेष प्रतिनिधि (स्पेशल रैपोर्टेयर) फ्रांसेस्का अल्बानीज़ ने अन्य देशों से भी गाजा के लिए सहायता जहाज़ भेजने की अपील की.
उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, ‘#Madleen को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए. भूमध्यसागर के हर बंदरगाह से गाजा के लिए सहायता जहाज़ रवाना होने चाहिए. वे एक साथ चलें — और जब एकजुट होंगे, तो कोई उन्हें रोक नहीं सकेगा.’
