नई दिल्ली: गोवा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच) के वरिष्ठ डॉक्टर रुद्रेश कुट्टीकर की सार्वजनिक रूप से फटकार लगाने और उन्हें तत्काल निलंबित करने के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे की आलोचना जारी है.
हालांकि, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने रविवार (8 जून) को निलंबन को खारिज कर दिया, लेकिन इस प्रकरण से व्यापक आक्रोश फैल गया है और कई लोगों ने राणे पर अपने पद का दुरुपयोग करने और ऐसा करते समय उनके असाधारण आचरण की आलोचना की है.
कहा जा रहा है कि राणे ने पिछले सप्ताह जीएमसीएच के कैजुअल्टी वार्ड का अचानक दौरा किया था. मंत्री, जो अपने साथ एक टेलीविजन क्रू को लेकर गए थे, जिन्होंने उनके दौरे को फिल्माया, कैजुअल्टी वार्ड में घुसते हुए और गुस्से में स्टाफ से सीएमओ या मुख्य चिकित्सा अधिकारी के बारे में पूछते हुए देखे जा सकते हैं.
सोशल मीडिया पर कई बार शेयर किए गए वीडियो में वे कुट्टीकर को कई कठोर टिप्पणियां करते हुए दिखाई दे रहे हैं.
वीडियो में वे कहते हैं, ‘आप अपनी जुबान पर काबू रखना सीखें. मुझे काम करने के लिए मजबूर न करें. जब आप मेरे सामने खड़े हों तो अपने हाथ (जेब से) बाहर रखें. मैं आमतौर पर अपना आपा नहीं खोता, लेकिन आपको खुद से व्यवहार करना होगा. आप चाहे कितने भी बोझिल क्यों न हों, आपको मरीज से ठीक से बात करनी चाहिए और मरीज का मार्गदर्शन करना चाहिए.’
Is it the Dictatorship of Goa BJP Govt Health Minister @visrane ?
All because one person from the press complained to him and if it was Normal Person he would not care also.
1. Walking around the hospital like he owns it
2. Recording videos in an area where it’s clearly stated… pic.twitter.com/zgdXlCtc9P
— Suraj G Naik (@yoursurajnaik) June 7, 2025
वह फिर दूसरे व्यक्ति की ओर मुड़ते हैं और कहते हैं, ‘उनका निलंबन आदेश बनाओ और उन्हें बाहर निकालो. ये डॉक्टर समझ नहीं पाते.’
जब डॉक्टर स्पष्टीकरण देने की कोशिश करते हैं, तो राणे उन्हें चुप करा देते हैं, कई बार उन्हें वहां से चले जाने को कहते हैं और सुरक्षाकर्मियों से उन्हें वहां से ले जाने को कहते हैं.
राणे को यह कहते हुए सुना जा सकता है, ‘जब जांच शुरू होगी, तो आप अपना स्पष्टीकरण दीजिए, उस समय मैं विचार करूंगा कि मुझे आपको वापस लेना है या नहीं. अन्यथा, अगले दो सालों के लिए आपको निलंबित कर दिया जाएगा…जब तक मेरा कार्यकाल है.’
मंत्री ने कहा, ‘आप बस एक बात समझ लीजिए, आप मेरे साथ काम कर रहे हैं. मैं आपको जाने के लिए कह रहा हूं.’ उन्होंने कहा कि आप चुप रहना सीखिए.
आईएमए ने की निंदा
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की गोवा शाखा ने एक बयान जारी कर स्वास्थ्य मंत्री के अनियंत्रित कृत्य की निंदा की है.
इसमें कहा गया है, ‘आईएमए गोवा राज्य शाखा इस प्रसारित वीडियो को देखकर अत्यंत व्यथित और निराश है, जिसमें स्पष्ट रूप से गोवा के स्वास्थ्य मंत्री, मीडियाकर्मियों के साथ गोवा मेडिकल कॉलेज के आपातकालीन वार्ड में प्रवेश करते हुए दिखाई दे रहे हैं और केवल एक प्रेस रिपोर्टर द्वारा फोन पर की गई कथित शिकायत के आधार पर, तथ्यों के बारे में अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना आपातकालीन विभाग से एक वरिष्ठ डॉक्टर को निलंबित कर दिया जाता है और साथ ही सार्वजनिक रूप से उस पर ऐसे लहजे और तरीके से फटकार लगाई जाती है, जो ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों पर भावनात्मक हमला है.’
इसमें आगे कहा गया है, ‘इस तरह की कार्रवाई बेहद खेदजनक और अस्वीकार्य है. यह न केवल उचित प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय को दरकिनार करती है, बल्कि पूरे चिकित्सा समुदाय की पेशेवर गरिमा और मनोबल का भी अनादर करती है. हम इस मनमाने और अत्याचारी व्यवहार की कड़ी निंदा करते हैं, जिसने जनता और मीडिया के सामने एक समर्पित चिकित्सा पेशेवर को अपमानित और पीड़ित किया है.’
आईएमए ने कहा, ‘हम अधिकारियों से तत्काल निलंबन रद्द करने और डॉक्टर को बहाल करने का आग्रह करते हैं, साथ ही यह सुनिश्चित करते हैं कि निष्पक्ष सुनवाई किसी भी शिकायत निवारण प्रक्रिया का अभिन्न अंग बनी रहे. आईएमए गोवा पीड़ित डॉक्टर के साथ मजबूती से खड़ा है और उम्मीद करता है कि बेहतर समझ और न्याय की जीत होगी.’
‘एक असहाय, बुजुर्ग महिला के बचाव में’
जब वीडियो की आलोचना हुई, तो मंत्री ने स्पष्टीकरण देते हुए एक बयान जारी किया. उन्होंने कहा कि उन्हें एक बुजुर्ग व्यक्ति के परिवार के सदस्य से संदेश मिला था, जो पहले से ही दर्द में था और उसे रोजाना इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी गई थी, लेकिन सार्वजनिक अवकाश के दिन अस्पताल के कैजुअल्टी वार्ड में उन्हें इंजेक्शन लगाने से मना कर दिया गया.
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘मामले को और भी बदतर बनाने वाली बात यह थी कि उस समय अस्पताल में मरीजों की संख्या बहुत कम थी, और फिर भी सहानुभूति और देखभाल नहीं की गई. मुझे यह बात बेहद परेशान करने वाली लगी.’
कई डॉक्टरों ने एक्स पर लिखा है कि विटामिन बी 12 का इंजेक्शन किसी भी तरह से आपातकालीन खुराक नहीं था और न ही इसे आमतौर पर रोजाना दिया जाता है.
राणे ने कहा, ‘हां, स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर मैंने हस्तक्षेप किया और मैं स्वीकार करता हूं कि मेरे लहजे और शब्दों में और अधिक संयम हो सकता था. मैं आलोचना से ऊपर नहीं हूं. मैंने जिस तरह से संवाद किया, उसकी पूरी जिम्मेदारी मैं लेता हूं और मैं आपको आश्वासन देता हूं कि इस तरह का व्यवहार दोहराया नहीं जाएगा.’
माफी मांगने से इनकार
हालांकि, राणे ने माफी मांगने से इनकार कर दिया, जिसे उन्होंने ‘देखभाल से वंचित किए गए एक मरीज के लिए खड़े होने’ का नाम दिया.
उन्होंने लिखा, ‘हालांकि, मैं जिस बात के लिए माफी नहीं मांगूंगा, वह है उस मरीज के लिए खड़ा होना, जिसे इलाज से वंचित किया गया. समाज में डॉक्टरों का एक महान स्थान है, और जीएमसी में उनमें से अधिकांश बहुत समर्पण के साथ सेवा करते हैं. लेकिन जब अहंकार कर्तव्य में बदल जाता है, जब करुणा की जगह उदासीनता आ जाती है, तो कार्रवाई करना मेरी जिम्मेदारी है. क्योंकि अगर हम इस तरह के व्यवहार को अनदेखा कर देते हैं, तो हम यह संदेश देते हैं कि किसी वरिष्ठ नागरिक या किसी अन्य व्यक्ति को चिकित्सा सहायता से वंचित करना स्वीकार्य है.’
उन्होंने कहा, ‘मैंने जो किया, वह एक असहाय, बुजुर्ग महिला की बचाव के लिए किया. और मैं हमारे अस्पताल में आने वाले हर मरीज के अधिकारों के लिए बोलना, काम करना और लड़ना जारी रखूंगा.’
सीएम का डैमेज कंट्रोल
इस बीच, मुख्यमंत्री सावंत ने डैमेज कंट्रोल का प्रयास करते हुए निलंबन आदेश रद्द कर दिया.
एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, ‘मैंने गोवा मेडिकल कॉलेज में इस मुद्दे की समीक्षा की है और स्वास्थ्य मंत्री के साथ चर्चा की है. मैं गोवा के लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि डॉ. रुद्रेश कुट्टीकर को निलंबित नहीं किया जाएगा.’
उन्होंने कहा, ‘राज्य सरकार और हमारी समर्पित मेडिकल टीम हर नागरिक के लिए स्वास्थ्य सेवा के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. हम अपने डॉक्टरों के अथक प्रयासों और अमूल्य सेवा की भी सराहना करते हैं, जो लगातार लोगों की जान बचा रहे हैं.’
