भारत ने बांग्लादेश में टैगोर के पैतृक घर में तोड़फोड़ की निंदा की, दोषियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की मांग

बांग्लादेश के सिराजगंज ज़िले में टैगोर के पुश्तैनी घर को एक पर्यटक और कर्मचारियों के बीच पार्किंग शुल्क को लेकर हुई बहस के बाद भड़की हिंसा के बाद अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है. भारत ने इस घटना को कट्टरपंथियों द्वारा दोनों देश की मिलीजुली सांस्कृतिक विरासत को कमजोर करने की ‘व्यवस्थित’ कोशिशों का हिस्सा बताया है.

रवींद्रनाथ टैगोर. (फोटो: Cherishsantosh/Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0)

नई दिल्ली: भारत ने गुरुवार (12 जून) को बांग्लादेश के सिराजगंज जिले में नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के पुश्तैनी घर में हुई तोड़फोड़ की कड़ी निंदा की है.

भारत ने इस घटना को कट्टरपंथियों द्वारा दोनों देश की मिलीजुली सांस्कृतिक विरासत को कमजोर करने की ‘व्यवस्थित’ कोशिशों का हिस्सा बताया है.

टैगोर के ज़मींदार रहते हुए एक एस्टेट कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किए गए इस ऐतिहासिक स्थल को अब पर्यटकों के लिए अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है. यह कदम ईद की छुट्टियों के दौरान एक पर्यटक और कर्मचारियों के बीच पार्किंग शुल्क को लेकर हुई बहस के बाद भड़की हिंसा के बाद उठाया गया. 

साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 8 जून को रवींद्र कचहरीबाड़ी पर हुए हमले को ‘घृणित’ और ‘नोबेल पुरस्कार विजेता की स्मृति और उनकी समावेशी विचारधारा पर कलंक’ बताया.

उन्होंने कहा, ‘यह हमला उन व्यवस्थित प्रयासों का हिस्सा है, जिनके तहत कट्टरपंथी सहिष्णुता के प्रतीकों को मिटाने और बांग्लादेश की साझा संस्कृति व सांस्कृतिक विरासत को नष्ट करने में लगे हैं. हम अंतरिम सरकार से अपील करते हैं कि वह कट्टरपंथियों पर लगाम लगाए और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे, ताकि ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं, जो दुर्भाग्यवश लगातार सामने आ रही हैं.’

विवाद की पृष्ठभूमि

10 जून को ‘प्रोथोम आलो’ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, 8 जून को एक पर्यटक मोहम्मद शहनवाज़ को संग्रहालय के रूप में परिवर्तित इस स्थल पर कर्मचारियों द्वारा पीटे जाने का वीडियो वायरल हो गया. स्थानीय समाचारों के मुताबिक, मुख्य गेट पर उस समय बहस शुरू हुई जब शहनवाज़ अलग पार्किंग टोकन नहीं दिखा सका. 

यह विवाद बढ़ता चला गया और कर्मचारियों ने कथित रूप से उसे कार्यालय के भीतर खींचकर डंडों से पीटा. बाद में उसके रिश्तेदारों और स्थानीय बीएनपी नेताओं ने उसे बचाया. शहनवाज़ ने उसी रात पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.

10 जून की दोपहर को शाहजादपुर के निवासियों ने प्रेस क्लब के बाहर हमले में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए मानव श्रृंखला बनाई. इसके बाद कचहरीबाड़ी परिसर तक एक विरोध मार्च निकाला गया. प्रदर्शनकारियों ने सभागार और कस्टोडियन कार्यालय सहित परिसर के कुछ हिस्सों में तोड़फोड़ की.

बुधवार (11 जून) को समाचार एजेंसी बीएसएस ने बताया कि पुरातत्व विभाग ने हमले और नुकसान की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है. कस्टोडियन मोहम्मद हबीबुर्रहमान ने पत्रकारों को बताया कि ‘अनिवार्य परिस्थितियों’ के चलते पर्यटकों का प्रवेश निलंबित कर दिया गया है.

स्थानीय पुलिस ने बताया कि कचहरीबाड़ी पर हमला और तोड़फोड़ करने वाले 50-60 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.

भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस पर साधा निशाना

भारत में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस घटना को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी और तृणमूल कांग्रेस पर भी निशाना साधा.

पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि हिंसा कई दिनों से इस्लामी संगठनों- जमात-ए-इस्लामी और हिफाजत-ए-इस्लाम द्वारा योजनाबद्ध तरीके से की गई. उन्होंने कहा कि भाजपा इस मामले को गंभीरता से ले रही है और इसे दोनों देशों की साझा विरासत पर हमले के रूप में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की जरूरत है. पात्रा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चुप्पी पर भी सवाल उठाया.

वहीं, इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बांग्लादेश सरकार के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराने की मांग की. उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह इस ‘घिनौनी और मूर्खतापूर्ण हरकत’ पर त्वरित न्याय की मांग करे.

अपने पत्र में ममता बनर्जी ने इस हमले को ‘साझा विरासत पर चोट’ बताया और कहा कि टैगोर का पुश्तैनी घर बंगाली साहित्य और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का प्रतीक है. उन्होंने लिखा, ‘इस पर हमला हमारे क्षेत्र की आत्मा पर हमला है.’